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श्रीगंगानगर में इस बार 6 से 12 जुलाई के बीच बरसेंगी मानसून की फुहारें, अच्छी बारिश की उम्मीद

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर मानसून की फुहारें इस बार श्रीगंगानगर में 6 से 12 जुलाई के बीच बरसेंगी। मौसम विभाग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 27, 2018, 06:20 AM IST

श्रीगंगानगर में इस बार 6 से 12 जुलाई के बीच बरसेंगी मानसून की फुहारें, अच्छी बारिश की उम्मीद
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

मानसून की फुहारें इस बार श्रीगंगानगर में 6 से 12 जुलाई के बीच बरसेंगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि इससे पहले एक जुलाई को गुजरात के रास्ते बांसवाड़ा क्षेत्र से मानसून राजस्थान में प्रवेश करेगा। फिलहाल प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में प्री-मानसून की बरसात का ज्यादा जोर है। शुरू में ही मानसून के कमजोर पड़ने और देश के कुछ हिस्सों में बरसात के बाद चिंताएं बढ़ गई थीं। जून में उत्तरी भारत में मौसम तंत्र ऐसा सक्रिय हुआ कि कुछ स्थानों पर बरसात हो गई, जिसके बाद चिंता के बादल छंटते दिखे। इलाके में 6 जुलाई से पहले बादलवाही, हवाएं व बूंदाबांदी का दौर रहेगा। भारतीय मौसम विभाग के विज्ञानी डा.केके सिंह ने बताया कि मानसून जुलाई के दूसरे सप्ताह में पूरे प्रदेश में छा जाएगा।

वहीं, फिर बदला मौसम, जिले में कई जगह तेज हवाओं के साथ बारिश, दीवारें ढही, 50 से ज्यादा पेड़ गिरे

इलाके में शाम को ठंडी हवाओं के साथ आसमां से टपकती बूंदों ने मौसम को सुहावना कर दिया। इसे प्री-मानसून कहा जा रहा है। अनूपगढ़ क्षेत्र के नाहरांवाली में सबसे ज्यादा 13 अंगुल बारिश हुई। इसके अलावा गोमांवाली, कूपली, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, रत्तेवाला, खानूवाली, सूरतगढ़, सादुलशहर, घड़साना व चूनावढ़ क्षेत्र में अच्छी बरसात हुई। इन इलाकों में कई सड़कों पर पानी एकत्र हो गए। लोगों को गर्मी से निजात मिली।

अब तक का रिकॉर्ड...जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बरसे बादल: मौसम विभाग के अनुसार 1970 से 2000 तक जून में 36.2 एमएम, जुलाई में 99.2, अगस्त में 71.5 एवं सितंबर में 38.2 एमए औसत बरसात हुई है। इसके अलावा पिछले 18 वर्षों में जून में सर्वाधिक 65 मिलीमीटर बरसात 2007 में हुई। 2011 में सबसे कम मात्र 6.4 मिलीमीटर बरसात हुई। इस वर्ष जून में अब तक 46.1 मिलीमीटर बरसात हो चुकी है।

तय समय मानसून आया तो....बारानी में बुआई आसान होगी, गन्ना व कपास को मिलेगी राहत

हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले के किसानों की खरीफ बुआई की सारी उम्मीदें बरसात पर टिकी हुई हैं। बांधों में पानी कम होने के कारण दोनों जिलों की नहरों में जल संकट है और किसान आंदोलन कर रहे हैं। श्रीगंगानगर जिले में अभी 3 लाख हेक्टेयर में बुआई होना बाकी है। अगर 6 से 12 जुलाई के मध्य अच्छी बरसात हो जाती है तो किसान मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार आदि की बुअाई कर सकेंगे। वहीं पानी के अभाव में झुलस रहे गन्ना, कपास एवं चारे की फसल को जीवनदान मिलेगा।

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