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दो बेटियां...कठिनाइयां थी, घबराई नहीं, संघर्ष किया, 12वीं बोर्ड में बनी स्कूल टॉपर

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर ये कहानी है दो बेटियों की। जिन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई करते हुए बिना किसी...

Dainik Bhaskar

Jun 04, 2018, 06:35 AM IST
दो बेटियां...कठिनाइयां थी, घबराई नहीं, संघर्ष किया, 12वीं बोर्ड में बनी स्कूल टॉपर
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

ये कहानी है दो बेटियों की। जिन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई करते हुए बिना किसी ट्यूशन के 12वीं बोर्ड परीक्षा में 79 से 92 प्रतिशत तक अंक हासिल किए। पढ़ाई के दौरान इनके जीवन में कई कठिनाइयां आईं, अपनों की मौत का दुख भी आया। लेकिन यह इससे घबराई नहीं। अपनी कठिनाइयों और दुख का पूरे साहस से सामना किया और हौसले व लगन की सीढ़ी बनाकर सफलता की ओर बढ़ती चली गई। पूरे मन से पढ़ाई कर 12वीं आर्ट्स की परीक्षा दी। जब परिणाम आया तो यह खरे सोने की तरह चमकीं....

गुलाबेवाला की ज्योति व 27 जीजी निवासी जसप्रीत कौर ने अभावों के दौरान पढ़ाई कर 12वीं आट्‌र्स में 79 व 92 प्रतिशत अंक हासिल किए

ज्योित: खेतों में काम किया, दिन में पढ़ाई अब स्कूल में सर्वाधिक अंक हासिल किए

गुलाबेवाला की ज्योति ने 12वीं बोर्ड में कला वर्ग में 79 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे, इसलिए गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से ही पढ़ाई की। ज्योति बताती है कि तीन भाई-बहनों में वह सबसे छोटी है। पिता जयमल राम मजदूरी करते हैं और माता भी खेतों में काम करती हैं। इसलिए पढ़ाई का खर्चा उठाना भी काफी मुश्किल था। कई बार तो हालात ऐसे हो गए कि उसे लगा कि अब वह नहीं पढ़ पाएगी, लेकिन उसने हार नहीं मानी। परिवार की सहायता के लिए वह अपनी मां के साथ रात में खेतों में काम करने भी जाती, फिर दिन में अपनी पढ़ाई भी करती। कई बार थकान ऐसी होती थी कि दोनों काम एक साथ करना मुश्किल हो जाता था, लेकिन ज्योति ने हार नहीं मानी। स्कूल के प्रिंसीपल रामस्वरूप, लेक्चरर संतोख सिंह व शिक्षक कृष्ण सिंह ने उसकी सहायता की और कापी किताबों जैसी सारी सुविधाएं मुहैय्या कराईं। ज्योति ने पूरी लगन से परीक्षा दी और 12वीं में वह अपने स्कूल में सबसे अव्वल आई। अब वह शिक्षक बनना चाहती है।

जसप्रीत: पिता की मौत, मां के साथ दूध बेच की पढ़ाई, अब 92.6% के साथ अव्वल

जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। यह कहना है 27 जीजी निवासी जसप्रीत कौर का। राउआमावि 27 जीजी से 12वीं की परीक्षा देने वाली जसप्रीत ने 92.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और सरकारी स्कूलों में पूरे जिले में अव्वल रही हैं। इस सफलता के पीछे उसका कड़ा संघर्ष छिपा है। पिछले साल 2017 में हार्ट फेल होने से जसप्रीत के पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद पूरा परिवार बिखर सा गया और आय का कोई साधन नहीं बचा। छोटा भाई 10वीं में पढ़ रहा था और परिवार का भी कोई साथ देने नहीं आया। लेकिन दोनों ने हिम्मत नहीं छोड़ी, कुछ जमीन थी जो ठेके पर दे दी और घर में पशु है, जिनका दूध बेचकर आमदनी शुरू की। इस काम में जसप्रीत अपनी मां जसवीर कौर का पूरा हाथ बंटाती थी। जसप्रीत ने आर्ट्स में 92.6 प्रतिशत अंक हासिल किए। अब जसप्रीत आईएएस बनना चाहती है और सूरतगढ़ में रहकर प्रशासनिक सेवा की पढ़ाई कर रही है।

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