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किसानों ने मांगा 25 सौ, कलेक्टर बोले-1850 क्यूसेक पानी ही दे पाएंगे, 25 को बीबीएमबी की बैठक पर टिकी आस, तब तक धरना

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर गंगनहर में 25 सौ क्यूसेक पानी खखां हैड पर दिए जाने की मांग को लेकर माकपा और किसान...

Danik Bhaskar | Jun 19, 2018, 06:40 AM IST
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

गंगनहर में 25 सौ क्यूसेक पानी खखां हैड पर दिए जाने की मांग को लेकर माकपा और किसान संगठनों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना शुरू कर दिया है। उधर आईजीएनपी में चार में से दो ग्रुप में पानी की मांग को लेकर किसानों ने घड़साना धानमंडी में महापड़ाव शुरू किया है। घड़साना में किसानों की प्रशासन के साथ हुई सर्वदलीय संगठनों की वार्ता भी बेनतीजा रही है। इधर दोपहर में गंगनहर के किसानों की कलेक्टर से वार्ता हुई जो बेनतीजा रही। अब 25 जून को बीबीएमबी की दोबारा चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में भी अगर 25 सौ क्यूसेक शेयर नहीं दिया तो किसान कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। तब तक धरने को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि 25 जून तक 1850 क्यूसेक शेयर तय हुआ है।

पानी की यह मात्रा खखां हैड पर पूरी करवा दी जाएगी लेकिन किसान इस बात पर अड़े हुए हैं कि खखां हैड पर 2000 क्यूसेक पानी हो तब गंगनहर का रेगुलेशन सही चलाया जा सकता है। इससे कम पानी में कई नहरें बैलेंस में आ जाती हैं, इसका किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पाता है। किसानों की यह भी मांग है कि सिंचाई विभाग ने जो शेयर तय किया है उसमें बांधों के बाद हरी के बैराज तक आते आते पंजाब के सैकड़ों गंदे नालों का पानी भी डाला जा रहा है। इस मात्रा को अलग न गिनकर तय किए गए शेयर में ही गिना दिया जाता है। यह किसानों के साथ धोखा है। अगर इस हिसाब से पानी को खखां हैड पर मापा जाए तो 1850 क्यूसेक शेयर के बदले 22 सौ क्यूसेक पानी पहुंचना चाहिए। लेकिन आश्चर्य की बात ये रही कि सोमवार दोपहर को शिवपुर हैड पर पानी की मात्रा 12 सौ क्यूसेक ही पहुंच रही थी। कुल मिलाकर किसानों ने जिला प्रशासन के आश्वासन को मानने से इनकार कर दिया है। धरने पर किसान संघर्ष समिति एवं किसान सभा की तरफ से पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, गुरबलपाल सिंह संधू, सुभाष सहगल, कालू थोरी, विजय रेवाड़, केवलसिंह, गुरजंट सिंह बूरा, रघुवीर ताखर सहित अनेक किसान धरने पर बैठे।

किसान ने हाथ जोड़ कलेक्टर से कहा, साब-25 साल से खेती कर रहा हूं लेकिन ऐेसे हालात कभी नहीं देखे, बैंक हमें डिफाल्टर घोषित कर रहे, किसान आत्महत्या न करने लग जाएं?

धरना देने पहुंचे बीबी नहर के 55 वर्षीय किसान हरजीत उप्पल ने वार्ता को पहुंचे अन्य किसान नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में पहुंच कलेक्टर से हाथ जोड़ कहा- साहब मेरी बात सुनो। आप एक बार जिले का दौरा करके देखो, जमीनें दूर-दूर तक खाली दिखाई देंगी। फसलों का नाम नहीं। हमारा बुरा हाल है। मुझे 25 साल हो गए खेती करते हुए, लेकिन ऐसी बुरी हालत कभी नहीं देखी। खेतों में सिंचाई पानी के अभाव में फसलें नहीं, सरसों चना की फसल सरकार को बेच चुके उसका भुगतान नहीं हुआ। बैंक तकादा कर रहे हैं, उधर हम डिफाल्टर हो रहे हैं। आप बताएं हम क्या करें? यही हालात रहे तो पंजाब की तरह यहां भी किसान आत्महत्या को मजबूर होंगे। आप के हाथ में डोर है, किसानों को मरने से बचा लीजिए। इस मार्मिक अपील को सुनकर कलेक्टर ज्ञानाराम एक बार तो अवाक हो गए, लेकिन उन्होंने शीघ्र बात संभाल ली और आश्वासन दिया कि गंगनहर के हिस्से का पानी अब आरडी 45 पर नहीं खखां हैड पर पूरा करवाया जाएगा। राजफैड से बात हो चुकी है। दो दिन बाद ही चने और सरसों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

बड़ा सवाल-2003 से 2013 तक के आदेश दिखाए जिनमें 10 हजार क्यूसेक पर भी 2 हजार लिया गया था शेयर : किसान संघर्ष समिति प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल ने कलेक्टर को 2003 से 2013 तक के सिंचाई विभाग के आदेशों की प्रतियां दिखाई जिनमें बीबीएमबी की ओर से राजस्थान की नहरों में न्यूनतम 10 हजार क्यूसेक शेयर में से भी 2 हजार क्यूसेक गंगनहर को मिलता रहा है। इस बार ही क्यों 1850 क्यूसेक दिया गया ?

अधिकारी कर रहे पक्षपात - चीफ इंजीनियर पर सीधा आरोप, गड़बड़ी हमारे अधिकारी करते हैं, दोष पंजाब को क्यों : पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सारी गड़बड़ी चीफ इंजीनियर करते हैं। वो अलग-अलग नहरों के पानी की मात्रा लिखकर देते हैं। हमारा सवाल पंजाब से नहीं, इन अधिकारियों से है। हमें 1850 क्यूसेक नहीं 2 हजार क्यूसेक पानी खखां हैड पर चाहिए, कैसे आएगा वो प्रशासन जाने।

किसान नाराज क्यों - पंजाब के उद्योगों का गंदा पानी मिल रहा बांधों से निकले पानी में: गंगनहर प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन गुरबलपालसिंह संधू एवं जीकेएस के संतवीरसिंह ने कलेक्टर से सवाल किया कि बांधों से छोड़े गए तय हिस्से में ही पंजाब के उद्योगों के नालों का गंदा पानी मिलता है जो हजाराें क्यूसेक होता है। राजस्थान की तीनों नहरों को यही गंदा पानी मिला शेयर पूरा किया जा रहा है।

14 साल बाद सभी राजनैतिक दल किसानों के लिए एक मंच पर आए, पड़ाव डाल दस दिन का अल्टीमेटम

घड़साना|आईजीएनपी में चार में से दो ग्रुपों में सिंचाई पानी की मांग पर सोमवार को किसानों ने हुंकार भरी। महापड़ाव डालकर सरकार को जमकर कोसा। 2006 के आंदोलन के बाद यह पहला मौका था जब 14 वर्षों बाद कांग्रेस, भाजपा, आप और व्यापारी सब किसानों के लिए एक मंच पर आए। सर्वदलीय संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। धानमंडी में महापड़ाव डालकर चार में से दो ग्रुप एक साथ चलाने के लिए सरकार से दो-दो हाथ करने का एेलान कर दिया। माकपा से पूर्व विधायक पवन दुग्गल ने कहा कि यह पहला मौका है जब किसानों को खरीफ की फसल के लिए सिंचाई पानी के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। जबकि इस फसल के समय तो हर बार नहर बंदी के बाद स्वत: ही खरीफ की फसल के लिए रेगुलेशन बनाया जाता है। लेकिन इस बार सरकार ने किसानों को बर्बाद करने की ठान ली है। सभा के बाद सभी किसान सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे। वहां सूरतगढ़ एसडीएम को अपनी मांग का ज्ञापन दिया। यहां एसडीएम ऑफिस में घुसने के लिए एक बारगी किसानों और पुलिस में नोकझोंक भी हुई। अधिकारियों के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रही और किसानों ने अपने दम पर पानी लेने का ऐलान कर दिया। तय किया कि यह बारी किसान अपने खेतों में लगाएं तथा आगामी 25 जून को होने वाली बैठक में अनूपगढ़ शाखा कि लिए दोबारा सिंचाई पानी कि घोषणा नहीं की जाती है तो 29 जून से पुन: घड़साना में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा।

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