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बच्चों पर पैनी नजर रखें, लेकिन हर समय उनके आसपास न मंडराएं

Suratgarh News - भास्कर संवाददाता श्रीगंगानगर। बचपन जिंदगी का वो दौर होता है जब बच्चों को जो सिखाया जाता है वो उन्हें ताउम्र याद...

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 06:40 AM IST
बच्चों पर पैनी नजर रखें, लेकिन हर समय उनके आसपास न मंडराएं
भास्कर संवाददाता श्रीगंगानगर।

बचपन जिंदगी का वो दौर होता है जब बच्चों को जो सिखाया जाता है वो उन्हें ताउम्र याद रखते हैं। बच्चों को शुरू से सिखाएं कि अपनी चीजों को औरों के साथ शेयर करना है। यह बात मोटिवेशनल गुरु विकास नागरू ने रविवार को बाइसा ग्रुप की और से सूरतगढ़ रोड अनाज मंडी स्थित दी गंगानगर ट्रैडर्स एसोसिएशन भवन में आयोजित इफेक्टिव पेरेंटिंग वर्कशॉप में कही। नागरू ने प्रोजेक्टर के माध्यम से माता-पिता को इमोशन शेयरिंग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि टीनएजर बच्चों पर पैनी नजर रखें। लेकिन हर समय उनके आसपास मंडराने की कोशिश न करें।

बच्चों को भी स्पेस की जरूर होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें समझदारी भी आने लगती है। ज्यादा रोक-टोक करने की बजाय उन्हें अपने निर्णय लेने दें, बल्कि निर्णय लेने में उनकी मदद भी करें। बच्चों से ज्यादा से ज्यादा बात करें और उन्हें अनसुना न करें। बच्चों द्वारा कही गई बात को महत्व दें और उनके साथ समय माता-पिता को समय बिताना चाहिए। वर्कशॉप की शुरूआत अतिथियों ने पौधरोपण कर की। अतिथि के रूप में भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रहलाद राय टाक, विकास जैन, ब्राइसा ग्रुप से रमा सिंगल, अंजू सैनी, डॉ. रिंपी गुप्ता, स्वाति, सीमा गुप्ता, मीनू पौद्दार व संजय सिंगल आदि उपस्थित थे।

ज्यादा से ज्यादा संवाद करें: शोधों में भी यह बात साबित हुई है कि जो माता-पिता अपने बच्चों के साथ बहुत अधिक बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, उन बच्चों का सामाजिक विकास तेजी से होता है। विकास नागरू ने कहा कि समय के साथ-साथ उन बच्चों में बेहतर बातचीत करने की कला भी विकसित होती है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ हमेशा आई कॉन्टेक्ट करते हुए बातचीत करें। जब भी बच्चे दूसरे लोगों से बात करें, तो उनकी बातों से ध्यान से सुनें।

प्रेरणा

बाइसा ग्रुप के इफेक्टिव पेरेंटिंग वर्कशॉप में मोटिवेशनल गुरु विकास नागरू ने माता-पिता को दिए टिप्स

बच्चों की मनोस्थिति समझें

विकास नागरू ने कहा कि बच्चे अपनी जरूरतों को बिना किसी हिचकिचाहट के सबके सामने रख देते हैं। बालमन में यह बात बैठी होती है कि उनकी तरह ही बाकी सभी लोग सोचते हैं। उन्हें लगता है कि वो जिस चीज को मांगते हैं या चाहते हैं दूसरा बच्चा भी वही चीज चाहता है। वे ये नहीं समझ पाते कि जब वे अपनी चीजें दूसरों को नहीं देते तो दूसरा बच्चा भी अपनी चीजों को उन्हें आसानी से नहीं देगा।

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