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शहर के जिन गंदे नालों में डिसिल्टिंग का दावा, वो गंदगी से अटे पड़े, इसी कारण नहीं निकलता पानी

भास्कर संवाददाता |श्रीगंगानगर शहर में 5 दिन पहले हुई मात्र 54.7 एमएम बारिश का पानी अभी भी शहर में कई जगहों पर सड़क...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 08, 2018, 06:45 AM IST

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    भास्कर संवाददाता |श्रीगंगानगर

    शहर में 5 दिन पहले हुई मात्र 54.7 एमएम बारिश का पानी अभी भी शहर में कई जगहों पर सड़क किनारे खड़ा है। इसके बावजूद नगरपरिषद जिला प्रशासन की हर बैठक में 100 फीसदी नालों की डिसिल्टिंग करवाने का दावा कर रही है। परिषद आयुक्त ने कलेक्टर को लिखे पत्र में 9 मुख्य नालों की सफाई करा देने की जानकारी दी है। वहीं यूआईटी के अधीन 2 नाले हैं। भास्कर ने शुक्रवार को विभिन्न जगहों पर जाकर दावों की रियलिटी चेक की। इसमें जो सच निकलकर सामने आया वह हैरान करने जैसा है। परिषद के बताए सभी नाले थैलियों व सिल्ट से अटे पड़े हैं। जहां पूर्व में नालों से गंदगी निकाली गई, वहां से आज तक मलबा नहीं उठाया गया है। यहां तक कि नालों को फिर से ढका तक नहीं गया है। इसका असर यह हुआ कि यह गंदगी फिर से नालों में चली गई।

    परिषद का भी यही हाल

    शहर में बरसाती पानी से लोग बीते कई वर्ष से परेशानी भुगत रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि शहर में कई जगहों पर नालों पर स्थायी कब्जे हो चुके हैं। गोल बाजार, स्वामी दयानंद मार्ग, कोतवाली मार्ग, सूरतगढ़ रोड आदि पर नालों के ऊपर स्थायी व अस्थायी कब्जों की भरमार है। कुछ ऐसे भी जगह हैं जहां नालों के ऊपर कई मंजिल की बिल्डिंगें व दुकानें बनाई जा चुकी हैं। वहीं, मुख्य गड्ढों पुरानी आबादी व शुगर मिल पर लोगों द्वारा करीब 70 फीसदी जगह पर कब्जा कर लिया है। बड़ी बात यह है कि परिषद ने गड्ढों तक सीसी सड़क पहुंचा दी है, वहीं पानी व बिजली के बिल भी लोगों के पास जा रहे हैं।

    मानसून आ चुका है, पानी निकासी को यूआईटी का हाल देखिए?



    सूरतगढ़ मार्ग नेशनल हाईवे

    सूरतगढ़ रोड स्थित नाला है। इसमें आसपास की चाट-पकौड़ी की दुकानों का कचरा भरा पड़ा था। सुखविंद्र सिंह, रामधन शर्मा आदि का कहना है कि दुकानदार गंदगी डाल देते हैं और यूआईटी कई- कई महीनों तक नाले की सफाई नहीं करवाती।

    नालों की सफाई हुई तभी बारिश

    का पानी 7-8 घंटे में निकल गया

    कार्यवाहक स्वास्थ्य अधिकारी गौतम लाल ने बताया कि नगरपरिषद ने नालों की सफाई करवाई है। इसी का परिणाम है कि बारिश के मात्र 7-8 घंटे में शहर में अधिकतर जगहों से सड़क पर खड़ा पानी निकल गया। जहां अधिक पानी भराव की समस्या रहती है। वहां मुख्य सड़क नाले से नीचे है।

    यूआईटी के जैसा ही है नप का नकारा सिस्टम

    पूर्व मंत्री की कोठी वाली सड़क

    राधेश्याम की कोठी से लेकर मेन बस स्टैंड तक तक एक किमी के नाले के मुहाने पर प्लास्टिक से अटा पड़ा था, यहां सिल्ट निकले काफी समय हो गया है। स्थानीय सुमन मेहरा, नित्यानंद अग्रवाल का दावा है कि नाले की सफाई कई वर्षों से नहीं हुई है।

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