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ये गड्‌ढे‌ बारिश के नहीं, अफसरों की नाकामी के सबूत हैं समय रहते सब जागे होते तो आज पूरा शहर परेशान न होता

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर सड़क पर दिख रहे ये गड्ढ़े बारिश की वजह से नहीं हैं। बल्कि अफसरों की नाकामी की वजह से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 01, 2018, 06:45 AM IST

  • ये गड्‌ढे‌ बारिश के नहीं, अफसरों की नाकामी के सबूत हैं समय रहते सब जागे होते तो आज पूरा शहर परेशान न होता
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    भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

    सड़क पर दिख रहे ये गड्ढ़े बारिश की वजह से नहीं हैं। बल्कि अफसरों की नाकामी की वजह से हैं। नाकामी नगर परिषद व यूआईटी की, प्रशासन व आरयूआईडीपी की भी। आपदा प्रबंधन से निबटने के लिए पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद हर बार बरसात के बाद हालात खराब हो जाते हैं। परिषद के पास बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी, पंपसेट, जनरेटर, बरमे, पंखियां, ट्रैक्टर ट्रालियां मौजूद हैं। वहीं, नागरिक सुरक्षा विभाग के पास 50-60 अच्छे तैराक सहित अन्य व्यवस्था है। लेकिन फिर भी बारिश होती है तो लोगों को परेशान होना ही पड़ता है। इसकी एक नहीं कई बड़ी वजह हैं जिसके चलते पानी की निकासी नहीं हो पाती। बरसात का लाखों लीटर पानी निकासी के लिए शहर के पास कोई बेहतरीन प्लान आज तक ही नहीं बनाया गया है। नालों और नालियों पर लोगों ने कब्जे कर लिए जिनको हटाए बगैर सफाई नहीं हो सकती वहीं कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां नाले और नालियां है ही नहीं। यही वजह है कि शुक्रवार को मानसून की पहली 17.4 एमएम बारिश ने ही शहर के दाेनों मुख्य गड्ढों को लबालब भर दिया है। ऐसे में और बारिश होती है तो पानी निकासी के लिए प्रशासन के पास कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। वहीं, दूसरे दिन बादलवाही रही। बारिश कहीं नहीं हुई।

    श्रीगंगानगर. ये फोटो मधुवन कालोनी की है। यहां 15 से 20 दिन पहले ही नई सड़क बनाई गई थी, जो पूरी तरह टूट गई है। (खबर पेज 16 पर)

    भास्कर रियलिटी चैक

    1. नाले ऊंचे, सड़कें नीची

    सुखाड़िया सर्किल से मीरा चौक, नेशनल हाईवे, पुरानी आबादी टावर रोड पर नालों का लेवल सड़क से कई ऊंचा है। हनुमानगढ़ व सूरतगढ़ मार्ग पर सड़क के एक तरफ नाला ही नहीं है। बरसात का पानी आखिर जाए भी कहां।

    2. गड्ढों पर डाली मिट्टी

    पुरानी आबादी व शुगर मिल गड्ढे पर अतिक्रमणों की भरमार है। परिषद ने शुगर मिल गड्ढे की एक माह पहले सफाई करवाई वहीं पर अब यूआईटी की ओर से मिट्टी डलवाकर आवासीय कॉलोनी बनाई जाएगी। 3 में से एक ही एसटीपी शुरू हुआ। एक का तो काम ही शुरू नहीं हुआ।

    3. सीवरेज की धीमी गति

    शहर में 555 करोड़ रुपए से बनाए जा रहे सीवरेज व 24 घंटे पेयजल प्रोजेक्ट के लिए जिला प्रशासन द्वारा केवल निर्देश ही जारी किए। सीवरेज का काम कर रही कंपनी अधिकारियों की सुनती ही नहीं।

    4. पॉलिथिन का इस्तेमाल

    पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध की बात भी कागजों में ही सिमटकर रह गई। रोजाना शहर में ही करीब तीन क्विंटल पॉलीथिन का उपयोग होता है। एक सप्ताह में यह 21 क्विंटल बन जाता है जो नालों में फैंक दिया जाता है। इसी से नाले और नालियां जाम हो रहे हैं। परिषद साल में कोई 5-6 कार्रवाई करती है, लेकिन वो भी प्रभावी नहीं। सब कागजी होता है।

    प्रशासन की 4 नाकामी, जो सबकी परेशानी का कारण

    सादुलशहर. ये फोटो सादुलशहर-श्रीगंगानगर आरयूबी का है। मुख्य मार्ग स्थित इस आरयूबी में पानी भर गया है। पानी भी इतना कि मोटरसाइकिल ही डूब जाए। लिहाजा, सादुलशहर के मुख्य मार्ग से श्रीगंगानगर तथा कई गांवों से संपर्क कट गया है। अब यहां पानी कब निकलेगा, कोई नहीं जानता। यही हाल कालियां से हिंदुमलकोट, अनूपगढ़ व रायसिंहनगर में बनाए गए नए आरयूबी का है। सबमें पानी भरा हुआ है और निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है।

    प्रशासन ने बुलाई बैठक, आयुक्त ने 9 नाले साफ की बात कही, आज होगा सत्यापन

    हालातों का जायजा लेने के लिए कलेक्टर ज्ञानाराम ने शनिवार शाम को समीक्षा बैठक की। आयुक्त सुनीता चौधरी ने कहा कि शहर के सभी बड़े 9 और छोटे 15 नालों को साफ करवा दिया गया है। कलेक्टर ने पांचों निगरानी अधिकारियों को भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। बैठक में एसडीएम यशपाल आहूजा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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