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हिस्सा 1850, कलेक्टर के आश्वासन के बावजूद पहुंचा 1340 क्यूसेक, आज फिर होगी वार्ता, पानी पूरा नहीं करवाया तो किसान नेता तेज करेंगे आंदोलन

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर बीबीएमबी ने गंगनहर में भले ही पानी का हिस्सा 1850 क्यूसेक तय किया है लेकिन इसके...

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2018, 06:55 AM IST
हिस्सा 1850, कलेक्टर के आश्वासन के बावजूद पहुंचा 1340 क्यूसेक, आज फिर होगी वार्ता, पानी पूरा नहीं करवाया तो किसान नेता तेज करेंगे आंदोलन
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

बीबीएमबी ने गंगनहर में भले ही पानी का हिस्सा 1850 क्यूसेक तय किया है लेकिन इसके मुकाबले मंगलवार को शिवपुर हैड पर मात्र 1313 क्यूसेक ही पानी पहुंच रहा था। हालांकि सोमवार को ही कलेक्टर ज्ञानाराम ने किसानों से पानी की तय मात्रा को खखां हैड पर उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया था। पानी की मांग को लेकर साेमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना शुरू हो गया है। अखिल भारतीय किसान सभा तथा किसान संघर्ष समिति ने मंगलवार को नहर में पानी की स्थिति को देखते हुए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। बुधवार को वापस कलेक्टर से वार्ता होगी। इसके लिए अधिक से अधिक किसानों को धरने में शामिल होने के लिए आमंत्रण दिए गए हैं। अगर बुधवार को खखां हैड पर पानी की मात्रा 61 क्यूसेक की छीज्जत काटकर 1800 क्यूसेक नहीं दिलाया गया तो किसान कलेक्ट्रेट का घेराव शुरू कर आंदोलन को तेज करेंगे। मंगलवार को धरने पर पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, किसान संघर्ष समिति प्रवक्ता सुभाष सहगल, किसान नेता लक्खासिंह, भूपेंद्रसिंह, विजय रेवाड़, हरजीत उप्पल, पवन बिश्नोई, हैप्पी खोसा, मास्टर रिछपाल सिंह सहित अनेक किसान बैठे। अखिल भारतीय किसान सभा और किसान संघर्ष समिति सहित अन्य किसान नेताओं ने गंगनहर वितरिका क्षेत्रों में संपर्क कर किसानों को बुधवार के घेराव के लिए बुलाया है।

श्रीगंगानगर

हिस्सा 1850 तय, आरडी 45 से खखां हैड तक 61 क्यूसेक की छीजत, पहुंच रहा 13 सौ क्यूसेक : बीबीएमबी की ओर से तय किए गए शेयर को पंजाब सिंचाई विभाग फिरोजपुर फीडर की टेल और बीकानेर कैनाल के हैड आरडी 45 पर 1850 क्यूसेक पानी दे दिया। नियमानुसार खखां हैड तक 61 क्यूसेक की छीजत सिंचाई विभाग मानता है। इस हिसाब से यह पानी 1789 क्यूसेक पहुंचना चाहिए लेकिन मंगलवार शाम को 1340 क्यूसेक पहुंच रहा था। करीब 450 क्यूसेक पानी कहां लापता हो रहा है।

सूरतगढ़ शाखा में 29 से सिंचाई पानी की घोषणा पर भड़के किसान बोले- गुमराह न करो, लिखित में दिया आश्वासन तो माने

श्रीविजयनगर|अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में सूरतगढ़ शाखा के किसानों ने मंगलवार को एसई कार्यालय में सूरतगढ़ और अनूपगढ़ एक्सईएन का घेराव किया। कार्यालय में एसई मौजूद नहीं थे इसलिए किसानों ने दोनों एक्सईएन को घेर लिया। किसानों का आरोप था कि विभाग किसानों को गुमराह कर रहा है। किसानों का कहना था कि जब रेगुलेशन 25 जून तक का है तो सूरतगढ़ शाखा की 29 जून से शुरू होने वाली बारी का औचित्य ही क्या है? किसानों का गुस्सा देख दोनों एक्सईएन ने दावा किया कि वर्तमान रेगुलेशन 16 जुलाई तक प्रभावी रहेगा। किसान नहीं माने और कहा कि उन्हें लिखित में दीजिए। विवाद बढ़ता देख अधिकारियों ने लिखित में दिया कि वर्तमान वरीयता अनुसार 16 जुलाई तक पानी मिलेगा, तब किसानों ने घेराव उठाया।

हर बार आंदोलन लेकिन कोई नहीं सुनता, इस बार ये हैं तीन बड़े कारण, जिससे छिन रहा किसानों का हक

बांधों से निकले पानी में हरी के बैराज पहुंचने तक मिल रही हजारों क्यूसेक गंदगी, उसे साथ न गिनकर दिया जाए हिस्सा : बीबीएमबी की बैठक में तय होने वाला शेयर ही राजस्थान की नहरों को मिलना चाहिए लेकिन पंजाब सिंचाई विभाग इसमें बांधों से लेकर हरी के बैराज तक पंजाब के अनेक शहरों के सीवरेज आैर औद्योगिक गंदगी जो हजारों क्यूसेक में है, को दरिया के पानी में बहा रहा है। इस कारण राजस्थान की नहरों को उनका हिस्सा पंजाब खुद गड़बड़ कर अपनी नहरों को अधिक पानी दे देता है।

कलेक्ट्रेट के बाहर किसान धरने पर, अंदर अिधकारी वीसी में व्यस्त रहे।

श्रीगंगानगर, बुधवार 20 जून, 2018 |

आगे क्या| गांवों में कर रहे संपर्क, घेराव की तैयारी

जून में पंजाब में शुरू हो जाती है धान की रुपाई, इसलिए पानी की मांग भी एकाएक हो जाती है दोगुनी, हमारे हिस्से पर गिरती है गाज: पंजाब में 10 जून से चावल अर्थात धान की पंजीरी की रोपाई शुरू हो जाती है। फिरोजपुर, जलालाबाद और फाजिल्का क्षेत्र में होने वाली धान की रोपाई के कारण पंजाब की नहरों में बिना बंदी लिए पानी चलाया जाता है। इसका असर हमारी नहरों पर पड़ता है। सालभर में पंजाब की ओर से गर्मी के तीन माह में ही पानी कम दिया जाता है। इसके अलावा तय शेयर से भी अधिक दे दिया जाता है।

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