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एक माह पहले बेसुध हाल में भर्ती लावारिस महिला को नर्सिंग स्टाफ ने संभाला, स्वस्थ होने पर बेंगलुरु से परिजन नहीं आए तो वृद्धाश्रम भिजवाया

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर एक माह पूर्व सूरतगढ़ से बेसुध हाल जिला अस्पताल में भर्ती कराई 55 वर्षीय लावारिस...

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 07:00 AM IST
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

एक माह पूर्व सूरतगढ़ से बेसुध हाल जिला अस्पताल में भर्ती कराई 55 वर्षीय लावारिस महिला का नर्सिंग स्टाफ ने अपने घर के किसी सदस्य की भांति संभालकर उसका बेहतर ढंग से इलाज कराया। स्वस्थ होने पर जब बोलने और सुनने योग्य हुई तो उसने अंग्रेजी भाषा में अपना नाम मंगला और बेंगलुरु निवासी होना बताया। इस पर स्टाफ ने परिजनों से बात कर उसे घर ले जाने के लिए कहा। लेकिन परिजन महिला को लेने नहीं आए तब स्टाफ ने मंगलवार को उसे श्रीकरणपुर के एक वृद्ध आश्रम में भिजवा दिया। महिला के मुताबिक उसे याद नहीं कि वह बेंगलुरू से यहां सूरतगढ़ कैसे पहुंची।

जिला अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ महेश गोयल ने बताया कि मंगला को गत आठ जून को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब वह बोल भी नहीं पा रही थी। स्टाफ ने महिला को फीमेल मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया तो महिला नर्सिंगकर्मी मोहनी देवी को उस लावारिस मरीज में अपनापन दिखाई दिया और मेल नर्सिंग स्टाफ महेश गोयल से चर्चा करते हुए उसका इलाज करा घर भिजवाने की ठान ली। तब मंगला एचबी बहुत कम था और वह सवालों के जवाब नहीं दे पा रही थी। दोनों नर्सिंग स्टाफ ने इंसानियत दिखाते हुए महिला को कपड़े और रोजमर्रा के सामान सहित अन्य वस्तुएं अपने खर्चे पर उपलब्ध कराईं।

अस्पताल में स्टाफ ने घर के सदस्य की भांति ख्याल रखा, उसे स्वयं के खर्च पर कपड़े दिए और खाना खिलाया

अंग्रेजी भाषा में बताया पता तो परिजनों को सूचित किया

नर्सिंग स्टाफ महेश गोयल के मुताबिक कुछ दिन पहले ही मंगला स्वस्थ हुई तो उसने अंग्रेजी में बात करना शुरू किया, जिसे सुनकर स्टाफ आश्चर्यचकित रह गया। मंगला ने स्वयं काे बीकॉम तक पढ़ी लिखी और बेंगलुरु के तुमकुर क्षेत्र का निवासी होना बताया। इस पर परिजनों से बात कर उन्हें महिला के अस्पताल में भर्ती होने के बारे में बताया गया। लेकिन, कोई उसे लेने नहीं आया तो वृद्धाश्रम भिजवा दिया।