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खतरे में थैलेसीमिया पीड़ित; सरकार ने एक साल से डेस्फेरल इंजेक्शन की सप्लाई बंद की, दिल्ली से मंगवा रहे परिजन

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर खून नहीं बनने से जुड़ी गंभीर बीमारी थैलेसीमिया के उपचार को एक साल से सरकारी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 29, 2018, 07:00 AM IST

खतरे में थैलेसीमिया पीड़ित; सरकार ने एक साल से डेस्फेरल इंजेक्शन की सप्लाई बंद की, दिल्ली से मंगवा रहे परिजन
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

खून नहीं बनने से जुड़ी गंभीर बीमारी थैलेसीमिया के उपचार को एक साल से सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन सप्लाई नहीं हो रहे हैं। भले ही सरकार लोगों का मुफ्त इलाज करने का दम भर रही हो लेकिन श्रीगंगानगर सहित राज्यभर में थैलेसीमिया के पीड़ित हजारों मरीजों की जान पर बनी हुई है। महंगी कीमत के इन इंजेक्शनों को खरीद कर उपचार करवा रहे परिजनों के एक साल में लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन सरकार की ओर से बंद की गई सप्लाई शुरू नहीं की गई है। अब हालत ये हो गई है कि इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों का धैर्य जवाब देने लगा है। इंजेक्शन की सप्लाई सरकारी अस्पतालों में नहीं आने के कारण पीड़ितों के परिजनों को अन्य राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात से यह इंजेक्शन महंगे दाम में खुले बाजार से खरीदना पड़ रहा है। बड़ी बात यह कि गत वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात में थैलेसीमिया रोगियों का जिक्र करने के बाद सरकार ने थैलेसीमिया पीड़ितों को 21 दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल कर लिया। लेकिन इन्हें लाभ आज तक नहीं मिल पा रहा है। श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल की पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना ने प्रबंध निदेशक (आरएमएससी) को पत्र लिखकर डेस्फेरल इंजेक्शन उपलब्ध करवाने की मांग की है। इसके बावजूद आज तक इनकी सप्लाई नहीं आई है। जिम्मेदार केवल पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इधर दवा के समय पर नहीं मिलने के कारण मासूम बच्चों की सांसों की डोर उखड़ती जा रही है।

भास्कर पड़ताल

बाजार में इनकी कीमत करीब 150 रुपए प्रति इंजेक्शन है। गरीब परिवारों के लिए अधिक परेशानी का कारण बन गया है। कारण कि उन परिवारों की मासिक आय ही 10 से 15 हजार रुपए से अधिक नहीं है। जबकि एक मरीज को महीने में 40 से 50 इंजेक्शनों तक की जरूरत पड़ती है। ऐसे में एक परिवार पर ही 4 से 5 हजार रुपए तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। जबकि इन्हें पीड़ित के इलाज पर प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

बहुत जरूरी इंजेक्शन- माह में दो से तीन बार तक चढ़ता है खून, इससे आयरन बढ़ता है: डाॅ. टांटिया

थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए डेस्फेरल इंजेक्शन बहुत जरूरी है। इन मरीजों के हर माह दो से तीन बार खून चढ़ाना होता है। खून चढ़ाने से आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। हार्ट, लीवर में आयरन अधिक जमा हो जाने से मरीज की मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है। डॉ पंकज टांटिया, हिमोटोएन्कोलोजिस्ट, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर।

एक इंजेक्शन की कीमत 150 रुपए, प्रति माह 40 से 50 इंजेक्शन लगते हैं,

मतलब एक मरीज के परिजनों पर एक माह का 4 से 5 हजार रुपए तक का बोझ

नॉलेज|आयरन के तत्व को कम करता है डेस्फेरल इंजेक्शन, नहीं लगा तो मौत संभव

डेस्फेरल इंजेक्शन का उपयोग थैलेसीमिया पीड़ित के शरीर में आयरन तत्व को कम करने के लिए किया जाता है। इन रोगियों को निश्चित अंतराल में खून चढ़ाना होता है। एक यूनिट रक्त में 250 मिलीग्राम तक आयरन होता है। प्रतिमाह या माह में दो बार रक्त चढ़ाने से मरीज के शरीर में आयरन की मात्रा काफी अधिक हो जाती है। इंजेक्शन नहीं लगाए जाने की स्थिति में मरीज की मौत भी संभव है।

पीड़ितों की परेशानी - दिल्ली से इंजेक्शन मंगवाने पड़ रहे हैं : श्रीगंगानगर निवासी जितेंद्र, चूनावढ़ निवासी सागर, सूरतगढ़ निवासी प्रिया सहित अन्य का कहना है कि एक साल से डेस्फेरल इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। श्रीगंगानगर जिले में 150 से 200 पीडि़त हैं, सभी परेशानी में हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें जयपुर, दिल्ली या अन्य राज्यों से यह इंजेक्शन मंगवाना पड़ रहा है।

...और जिम्मेदार बोले- हमने डिमांड सरकार को भेजी है, राजस्थान में ही नहीं है इंजेक्शन: प्रभारी ड्रग हाउस

कलेक्टर साहब, पीएमओ ने भी सरकार को डेस्फेरल इंजेक्शन के लिए डिमांड भेजी है। लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। जैसे ही राज्य सरकार इंजेक्शन की सप्लाई शुरू करेगी और हमारे पास आएगी ताे हम पीड़ितों को उपलब्ध करवा देंगे। डॉ. अजय सिंगला, प्रभारी जिला ड्रग वेयर हाउस, श्रीगंगानगर।

अनुवांशिक बीमारी| थैलेसीमिया में 20 से 30 दिन में चढ़ाना पड़ता है ताजा खून

यह अनुवांशिक रोग है। सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र मात्र 20 दिनों की हो जाती है। इसका सीधा प्रभाव शरीर में स्थित हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है। इससे प्रभावित व्यक्ति एनीमिया से ग्रस्त हो जाता है। उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। समय पर उपचार न होने पर बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है।

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