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जिले की 4142 चकों-ढाणियों में आज तक नहीं पहुंचाई बिजली यहां चिमनियों की रोशनी में पढ़ाई, हवा लेने को बनाए जुगाड़

ब्रह्मप्रकाश शर्मा/ रोहित शर्मा| सूरतगढ़/श्रीगंगानगर। केंद्र सरकार ने देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने का...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 07:15 AM IST

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    ब्रह्मप्रकाश शर्मा/ रोहित शर्मा| सूरतगढ़/श्रीगंगानगर।

    केंद्र सरकार ने देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने का दावा किया है। इस दावे की हकीकत जाननी है तो आप जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर सूरतगढ़ बाइपास चले आइए। 1998 से बसी यहां की ढाणी में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। यहां 15 परिवार रहते हैं। इलाकावासियों ने कई बार कनेक्शन के लिए आवेदन भी किया, लेकिन मिला नहीं। यही हाल सूरतगढ़ की मानकसर पंचायत के गांव 34 पीबीएन-ए(मौजगढ़) का है। वहां 500 लोग चिमनी की रोशनी में जीने को मजबूर हैं। जिलेभर की बात करें तो 5 हजार से ज्यादा ढाणियाें और चकों में बिजली आज तक नहीं पहुंच पाई है। अकेले श्रीगंगानगर जिले में 24 हजार लोग अंधेरे में जी रहे हैं।

    भास्कर ने बिजली विभाग के आंकड़ों को खंगाला तो खुद अफसर मानते हैं, जिलेभर में 4142 ढाणियां ऐसी हैं, जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची है। ये ढािणयां ऐसी हैं, कहीं एक परिवार रहता है तो कहीं पांच परिवार भी रहते हैं। इसी तरह जिलेभर के गांवों में 786 परिवार ऐसे भी सामने आए हैं, जहां बिजली तो पहुंच चुकी, लेकिन इन परिवारों ने कनेक्शन नहीं लिय। अब यहां भी सौभाग्य योजना के तहत कनेक्शन दिया जाएगा। बिजली िवभाग ने इन ढाणियों को भी विद्युतीकृत करने के लिए 28 करोड़ रुपए की योजना बनाई है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही घोषणा की है कि देशभर के 100% गांवों-ढाणियों में बिजली पहुंच चुकी है। भास्कर ने इस दावे की पड़ताल की तो चौंकाने वाले हालात दिखे। हजारों ढाणियां ऐसी हैं, जहां आज भी अंधेरा है तो कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां पोल तो हैं, पर कनेक्शन नहीं हुए

    ब्लाकवार यह है जिले की स्थिति

    श्रीगंगानगर 503

    अनूपगढ़ 816

    श्रीविजयनगर 214

    श्रीकरणपुर 46

    पदमपुर 114

    रायसिंहनगर 614

    सूरतगढ़ 816

    सादुलशहर 294

    घड़साना 732

    (दीनदयाल योजना के सर्वे के अनुसार)

    जिले में सबसे ज्यादा भयावह हालात अनूपगढ़-सूरतगढ़ उपखंड में

    श्रीगंगानगर. 4 ए ढाणी में लाइट के अभाव में दीए की लो में पढ़ते बच्चे। फोटो: राकेश वर्मा

    श्रीगंगानगर से 80 किमी. दूर मौजगढ़

    चूल्हे की आग की रोशनी में पकता है खाना, कपड़ों से लेते हैं हवा

    इमरती देवी 18 साल पहले इस घर में आई थी। तब से ये घर आज तक कच्चा है। रसोई में बने चूल्हे में जब आग जलती है तो उसी रोशनी में खाना पकता है और उसी रोशनी में पूरा परिवार खाता है। यहां बड़ी परेशानी है कि टिब्बों में हवाएं चलती हैं तो न चिमनी जलती है न ही लालटेन। हवा लेने को देसी जुगाड़ कर रखा है। पदमपुरा की ढाणियों में छत के गार्डर पर कपड़ा अटका रखा है, उसी से रस्सी बांधी है। इसी को हिला परिवार हवा लेता है।

    सूरतगढ़ में सरकारी दावों के विपरीत तहसील क्षेत्र की 690 ढाणियां और 10 से अधिक चकों में आज भी बिजली कनेक्शन नहीं हैं। सूरतगढ़ से 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मानकसर के गांव 34 पीबीएन-ए-(मौजगढ़) में 500 लोग चिमनी की रोशनी में जी रहे हैं। सरपंच व ग्रामीण बताते हैं कि पिछले वर्ष गांव का पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना में बिजली के लिए सर्वे तक हो चुका है व गांव के आसपास बिजली के खंभे भी आ चुके हैं, पर घरों में कनेक्शन नहीं हो पाए।

    भास्कर : बिना बिजली की हजारों ढाणियां गांव नहीं हैं?

    ऊर्जा विभाग का जवाब : ढाणियाें की कोई परिभाषा नहीं

    प्रमुख सचिव संजय मल्होत्रा का कहना है कि की कोई परिभाषा नहीं है। गांव व घर ही यूनिट है। गांवों में 75%, कनेक्शन हो चुके है। खेतों में बने मकानों को छोड़ दें तो सितंबर तक पूरा राजस्थान 100% विद्युतीकृत हो जाएगा।

    श्रीगंगानगर से महज 4 किमी. दूर 4 ए

    20 साल से नहीं पहुंची बिजली सौर ऊर्जा ही इन परिवारों का सहारा

    सूरतगढ़-पदमपुर बाइपास पर ढाणी है 4 ए गांव। यहां दीपक सैन सहित कई परिवार 20 साल से बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। कनेक्शन नहीं मिलने पर इन परिवारों ने अब सौर ऊर्जा का सहारा लिया है। लेकिन उससे भी केवल एक बल्ब जलता है या मोबाइल फोन ही चार्ज होता है। इन परिवारों को पानी रोज दूसरे गांव से लाना पड़ता है तो रात को गर्मी से बचने को सोना भी छत पर पड़ता है।

    वो गणित:जिसने हर गांव में बिजली पहुंचा दी

    ढाणियां व 100 से 250 आबादी वाले छोटे गांवों को गिनना ही भूले अफसर

    सरकार ने हर गांव तक बिजली पहुंचाने के दावों से पहले 10 हजार से ज्यादा ऐसे गांव व ढाणियों की गणना ही नहीं की, जिनकी आबादी 100 से 250 है। प्रदेशभर की बात करें तो 300 तक की आबादी वाले करीब दो हजार गांव, ढाणियां अब भी बिजली से वंचित हैं।

    यहां परिवारों के लिए आज भी सपना हैं टीवी, वािशंग मशीन

    सूरतगढ़ के इस गांव से सटे घरों में बिजली नहीं होने का नुकसान यदि किसी को होता है तो वे हैं विद्यार्थी। विद्यार्थियों को चिमनी या लालटेन के सहारे ही पढ़ना पड़ता है। इनसे प्रदूषण तो होता ही है, आंखें भी कमजोर हो जाती हैं। गांव की 9वीं की छात्रा पूजा व देशराज, सातवीं के अनिल की परेशानी भी कम नहीं है। तीनों के घर पास-पास होने के कारण एक ही जगह पढ़ते हैं। पूजा बताती है, उनके घर में लैंप व चिमनी की ही व्यवस्था है। उम्र सबकी 10 साल से ज्यादा है, लेकिन टीवी, कूलर, वािशंग मशीन जैसी जरूरी सुविधाओं का लाभ आज तक नहीं उठाया। हवा के लिए सब हाथ पंखे का इस्तेमाल ही करते हैं। 285 आरडी मेंे पोल लगाए तो काफी समय बीत गया, कनेक्शन दिए ही नहीं।

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