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फसल बीमा के नाम पर कंपनियों की ठगी, बुआई से पहले ही किसानों के काट लिए प्रीमियम के 55 करोड़ रुपए

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर देश में फसल बीमा करने वाली कंपनियां हजारों...

Bhaskar News Network| Last Modified - Aug 02, 2018, 08:30 AM IST

फसल बीमा के नाम पर कंपनियों की ठगी, बुआई से पहले ही किसानों के काट लिए प्रीमियम के 55 करोड़ रुपए
फसल बीमा के नाम पर कंपनियों की ठगी, बुआई से पहले ही किसानों के काट लिए प्रीमियम के 55 करोड़ रुपए
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर देश में फसल बीमा करने वाली कंपनियां हजारों करोड़ रुपए का कमाई कर लेती हैं और बदले में क्लेम के नाम पर कुछ करोड़ रुपए लौटाए जा रहे हैं। जिले के किसानों से इस साल दुगुनी प्रीमियम राशि वसूल करने की आशंका है। कृषि विभाग ने एक संशोधित अधिसूचना जारी कर किसानों को प्रीमियम राशि जमा करवाने की तिथि बढ़ाकर 3 अगस्त कर दी है। किसानों से प्रीमियम उसी समय काट लिया जब वे किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लिए गए लोन का बैंकों में ब्याज जमा करवाने गए थे। किसानों के साथ प्रीमियम के नाम पर अन्याय होता है। इस साल सभी फसलों का प्रीमियम बढ़ा हुआ आने पर किसान संगठनों ने विरोध जताते हुए केंद्र सरकार पर किसानों का गला घोंटने का आरोप लगाया है।

सिंचित और असिंचित खरीफ फसलों की बुआई अप्रैल में शुरू हो जाती है और जुलाई के अंत तक चलती है, लेकिन राजस्व विभाग के पटवारी इन फसलों की गिरदावरी सितंबर के अंत तक करते हैं। कई बार तो पटवारी खेतों में ही नहीं जाते। बल्कि गांव में आकर चक के किसी जानकार किसान से अंदाजा लेकर गिरदावरी लिख लेते हैं। सरकार को गिरदावरी की अर्धसत्य रिपोर्ट सितंबर में मिलती है। इसके विपरीत बीमा कंपनियां तो प्रीमियम गिरदावरी की रिपोर्ट आने से पहले काट लेती हैं, जबकि नियम यह है कि फसल बीमे की प्रीमियम गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर काटी जाए।

किसानों को प्रीमियम में हो रहा 3 हजार से अधिक का नुकसान

गिरदावरी रिपोर्ट से पहले प्रीमियम काटने से किसानों का नुकसान हो रहा है। किसानों का आरोप है कि बैंक या तो पिछले साल की फसल बुआई को आधार मानकर प्रीमियम काट लेती है अथवा ग्वार की बुआई से पहले भूमि में सारी फसल कपास लिखकर प्रीमियम की वसूली कर लेती है। इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ग्वार का प्रीमियम 914 और कपास का 4040 रुपए प्रति हैक्टेयर आया है। इस प्रकार किसानों को प्रीमियम में ही 3 हजार रुपए से अधिक की नाजायज चपत लग जाती है। बाद में क्लेम के समय मौके पर दूसरी फसल होने पर बीमा क्लेम देने में कंपनियां आनाकानी कर सकती हैं। इस साल प्रीमियम राशि अनाप-शनाप बढ़ा दी गई है। बाजरा में गत वर्ष 298 रुपए की तुलना में इस साल 763 रुपए प्रति हैक्टेयर प्रीमियम देना पड़ेगा। कपास में पिछले साल किसानाें से 2280 रुपए प्रीमियम काटा गया लेकिन इस साल 4040 रुपए काटे जा रहे हैं। ग्वार में भी दुगुनी प्रीमियम राशि कर दी है। पिछले साल 506 रुपए की तुलना में इस साल ग्वार के किसानों से 914 रुपए प्रीमियम काटा जा रहा है।

गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर फसल बीमे का प्रीमियम काटने का है नियम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के व्यापक लाभ होंगे। ओलावृष्टि, अंधड़, अतिवृष्टि या नहर टूटने से खराब हुई फसलों की क्रॉप कटिंग होगी। पहले की बीमा योजना में किसान योजनाओं से वंचित रह जाते थे। अब किसानों का थोड़ा बहुत पैसा ज्यादा देने पर उनके लिए यह योजना वरदान साबित होगी। राजेंद्र भादू, विधायक सूरतगढ़।

फसलों की प्रीमियम राशि

फसल 2016-17 2017-18

बाजरा 298 763

कपास 2280 4040

मूंगफली 1339 1318

ग्वार 506 914

मोठ 298 756

मूंग 584 767

धान 1003 1428

तिल 332 722

किसानों के साथ केंद्र और राज्य सरकार अन्याय कर रही है। कर्ज में दबे किसानों पर प्रीमियम राशि दुगनी तीन गुणी करके किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। कालू थोरी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा

फसल बीमा के नाम पर सरकार सबसे ज्यादा घपला कर रही है। कृषि मंत्री राधामोहन संसद में बयान दे चुके हैं कि गत वर्ष किसानों ने फसल बीमा में 24000 करोड़ रुपए का प्रीमियम भरा और बीमा क्लेम के नाम पर किसानों को मात्र 700 करोड़ रुपए दिए गए। यह खुली लूट है। रमन रंधावा, अध्यक्ष, खेती बचाओ, किसान बचाओ

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