• Hindi News
  • Rajasthan
  • Todaraising
  • Todaraisingh लैब टैक्निशियन ही नहीं नि:शुल्क जांचें प्रभावित
विज्ञापन

लैब टैक्निशियन ही नहीं नि:शुल्क जांचें प्रभावित

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 06:45 AM IST

Todaraising News - कस्बे के 50 बेड के राजकीय सामुदायिक चिकित्साल केन्द्र में मरीजों की जांच के लिए न लैब टैक्निशियन है और न ही उपचार के...

Todaraisingh - लैब टैक्निशियन ही नहीं नि:शुल्क जांचें प्रभावित
  • comment
कस्बे के 50 बेड के राजकीय सामुदायिक चिकित्साल केन्द्र में मरीजों की जांच के लिए न लैब टैक्निशियन है और न ही उपचार के लिए प्रयाप्त डॉक्टर है। ऐसे में मरीजों को जांच व उपचार के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। सरकार की सभी कडिया जोड देने के बाद भी सरकार द्वारा आंखें मूंद लेने से टोडारायसिंह के नागरिक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे है।

कहने को तो सरकार ने टोडारायसिंह के अस्पताल को 50 बेड का कर दिया है। लेकिन उपचार के लिए यहां पर सभी सृजित पदों पर एक माह में भी नियुक्तियां नही की है। इससे अस्पताल में डॉक्टरों सहित लैब टैक्निशियन का अभाव सबसे बडा पीडा दायी बना हुआ है। जबतक लोगों की स्वास्थ्य से जुडी समस्या का हल नही हो जाता तबतक अन्य विकास का कोई ओचित्य नही है। लैब टैक्निशियन नही होने से डॉक्टरों द्वारा लिखी जांच के लिए मरीज इधर उधर भटकते है।

लैबोरेट्री को एक एनपीसीडीसीएस राष्ट्रीय कार्यक्रम में कार्यरत एक कार्मिक के भरोसे छोडा हुआ है। जोकि 400 से 500 मरीजों के आउट डोर पर प्रयाप्त नही है। हालात यह है कि मरीजों की मलेरिया व टीबी की जांच भी नही हो पारही है। बिना जांच के डॉक्टर मरीज को ठीक से परामर्श नही दे पा रहे है। उपर से इन दिनों मौसमी बीमारियों फैली हुई है। उपखण्ड मुख्यालय के अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर नियुक्त है। मुख्यालय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, आई स्पेशलिस्ट, एम.डी. चिकित्सक का अभाव बना हुआ है।

चििकत्सा का हाल

भास्कर न्यूज| टोडारायसिंह

कस्बे के 50 बेड के राजकीय सामुदायिक चिकित्साल केन्द्र में मरीजों की जांच के लिए न लैब टैक्निशियन है और न ही उपचार के लिए प्रयाप्त डॉक्टर है। ऐसे में मरीजों को जांच व उपचार के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। सरकार की सभी कडिया जोड देने के बाद भी सरकार द्वारा आंखें मूंद लेने से टोडारायसिंह के नागरिक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे है।

कहने को तो सरकार ने टोडारायसिंह के अस्पताल को 50 बेड का कर दिया है। लेकिन उपचार के लिए यहां पर सभी सृजित पदों पर एक माह में भी नियुक्तियां नही की है। इससे अस्पताल में डॉक्टरों सहित लैब टैक्निशियन का अभाव सबसे बडा पीडा दायी बना हुआ है। जबतक लोगों की स्वास्थ्य से जुडी समस्या का हल नही हो जाता तबतक अन्य विकास का कोई ओचित्य नही है। लैब टैक्निशियन नही होने से डॉक्टरों द्वारा लिखी जांच के लिए मरीज इधर उधर भटकते है।

लैबोरेट्री को एक एनपीसीडीसीएस राष्ट्रीय कार्यक्रम में कार्यरत एक कार्मिक के भरोसे छोडा हुआ है। जोकि 400 से 500 मरीजों के आउट डोर पर प्रयाप्त नही है। हालात यह है कि मरीजों की मलेरिया व टीबी की जांच भी नही हो पारही है। बिना जांच के डॉक्टर मरीज को ठीक से परामर्श नही दे पा रहे है। उपर से इन दिनों मौसमी बीमारियों फैली हुई है। उपखण्ड मुख्यालय के अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर नियुक्त है। मुख्यालय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, आई स्पेशलिस्ट, एम.डी. चिकित्सक का अभाव बना हुआ है।

सरकार की अनदेखी से टोडा की सीएचसी का पीएचसी से भी बुरा हाल, दो डॉक्टरों के भरोसे मुख्यालय का अस्पताल

मांग करने के बावजूद सरकार नहीं सुन रही

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर ही लैब टेक्निशयन व दोदो डॉक्टर नियुक्त है। इससे इस सीएचसी का पीएचसी से बूरा हाल हो गया है। यहां के लोंगों के स्वास्थ्य से जुडी सबसे अहम समस्या के लिए बार बार मांग करने के बावजूद सरकार पही सून रही है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर जांचें भी प्रभावित हो रही है। अस्पताल में उपचार के लिए आए राकेश गुर्जर ने बताया कि उसकी बच्ची के तेज बुखार है और मलेरिया की जांच होनी है लेकिन लैब टैक्निशियन नही होने से अस्पताल में जांच नही हो पारही है। वही मंगल धोबी, नंद किशोर सैनी, हेमराज चावला ने बताया कि मलेरिया की जांच नही होने से उपचार नही हो पारहा है।

X
Todaraisingh - लैब टैक्निशियन ही नहीं नि:शुल्क जांचें प्रभावित
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें