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पूर्णिमा के साथ लग रही भद्रा, शाम 7:43 बजे होली दहन का मुहूर्त

रंग व मस्ती का त्योहार होली गुरुवार को उत्साह व उल्लास के साथ मनाई जाएगी। जिले भर में जगह-जगह कांटेदार झाड़ियों या...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 07:00 AM IST
रंग व मस्ती का त्योहार होली गुरुवार को उत्साह व उल्लास के साथ मनाई जाएगी। जिले भर में जगह-जगह कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा कर तैयार बनाई गई होली का दहन किया जाएगा। पंड़ित डॉ. पवन सागर ने बताया कि पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन किया जाता है। इस बार 1 मार्च को सुबह 8:58 बजे से पूर्णिमा तिथि लग रही है। पूर्णिमा के साथ भद्रा भी लग रही है। भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। शाम 7:42 बजे पर भद्रा समाप्त हो रही है। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद शाम 7:43 बज से 8 बजे होलिका दहन का समय श्रेष्ठ रहेगा। महिलाएं व पुरूष परिजनों के साथ शुभ मुहूर्त में होली स्थल पर जाकर पूजा करेंगें। विशेष तौर पर गोबर से बनाए गए बडूले आदि होली में अर्पित कर रोली, मोली के साथ पूजन किया जाएगा। शुभ मुहूर्त में होलिका दहन होगा। घर में सुख-समृद्धि की कामना के लिए होलिका दहन की आग में गेहूं की बालियां सैंकी जाएंगी।

रंगों की मस्ती में होंगे सरोबार, निकलेगी सवारी

दो दिवसीय रंगोत्सव के तहत शुक्रवार को जिले में धुलण्डी मनाई जाएगी। इस दिन लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल के साथ होली खेलेंगे। ढोल, मंजिरों की धुन पर होली के गीत गाए जाएंगे। घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाएगा। होली एवं गणगौर महोत्सव समिति की ओर से पुरानी टोंक अजमेर वालों की कोठी से ऐतिहासिक बादशाह की सवारी निकाली जाएगी। यह पूरे लवाजमें के बीच मुख्य बजार में निकलेगी तथा बडा कुआं होकर वापस पुरानी टोंक पहुंचेगी।

शुरू होगी गणगौर की धूम, रंग पंचमी व शीतलाष्टमी भी मनेगी

धुलंड़ी के दिन से गणगौर पर्व की धूम शुरू हो जाएगी। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक 18 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में कुंवारी लड़कियां गण (शिव) तथा गौर (पार्वती) से मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं। विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजा के दौरान दूब से पानी के छांटे देते हुए गौर गौर गौमती गीत गाती हैं। 6 मार्च को चैत्र मास की कृष्ण पंचमी पर रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन उढाए जाने वाले विभिन्न रंगों की ओर देवता आकर्षित होते हैं। इसे होली के पर्व का अंतिम दिन भी माना जाता है। 9 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर शीतलाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व को बसौड़ा भी कहा जाता है। इस दिन शीतला मां की पूजा अर्चना कर बासी (ठंडा) खाना का भोग लगया जाएगा। मान्यतानुसार देवी शीतला चेचक जैसे रोग कि देवी है। इसके व्रत व पूजा करने से व्यक्ति के पूरे परिवार में दाह ज्वर, पीत ज्वर, फोड़े-फुंसी, आंखों के सारे रोग, माता की फुंसियों के निशान ठीक हो जाते हैं।

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