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जागरूकता के अभाव में अरुचि, अभिभावकों की कम भागीदारी से शैक्षिक बैठकें औपचारिक

जिले के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ाने व विकास को लेकर विद्यालय स्तरों पर गठित विद्यालय...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:30 AM IST
Tonk - disadvantage in lack of awareness educational meetings with less participation of guardians formally
जिले के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ाने व विकास को लेकर विद्यालय स्तरों पर गठित विद्यालय प्रबंध समितियों व शिक्षक अभिभावकों की बैठकें कागजों मे सिमट कर रह गई हैं। हालांकि कई विद्यालयों में बैठकों का आयोजन होता भी है, लेकिन अध्यक्ष, सदस्यों की सक्रिय भागीदारी नहीं रहने से कभी-कभार होने वाली यह बैठकें औपचारिक साबित हो रही है। सरकारी विद्यालयों में विकास कार्यों पर चर्चा करने व सुधार को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक विद्यालयों में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद से ही शाला प्रबंध समितियां (एसएमसी) गठित की हुई है। विभाग की ओर से गत दिनों प्रत्येक माह की अमावस्या को एसएमसी की बैठक आयोजित करने का प्रावधान है। जिससे कि विद्यालय में विकास कार्यों व शैक्षिक गतिविधियों को गति मिल सके। अमावस्या के दिन अवकाश होने की स्थिति में बैठक अगले दिन किए जाने के निर्देश है। इसके बावजूद अधिकतर विद्यालयों में शनिवार काे इसकी औपचारिकता निभाई गई। जबकि कई विद्यालयों में बैठकों का आयोजन ही नहीं हुआ। संस्था प्रभारियों से बातचीत में सामने आया कि अधिकतर विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की ओर से फोन कर अभिभावकों को बुलाया जाता है। इसके बावजूद गिने-चुने सदस्य ही बैठकों में पहुंच पाते हैं।

मॉनिटरिंग का भी अभाव

13 सदस्यीय प्रत्येक समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत सदस्य शामिल होते है। इनमें पांच सदस्य मनोनीत होते है। गांवों में कामकाज के दिन होने से अभिभावक सदस्य बैठकों में शामिल नहीं होते। हालांकि चार दिन पहले सभी को सूचना भिजवाए जाने के निर्देश है। रामलखन, श्यामसुंदर आदि अभिभावक सदस्यों का कहना है कि रबी फसलों का सीजन होने से कौन काम छोड़ बैठकों में शामिल होने पहुंचे। समिति में शामिल सदस्यों के समय-समय पर मॉनिटरिंग नहीं किए जाने से भी एसएमसी की उपयोगिता साबित नहीं हो पा रही।

समितियों के ये हैं अधिकार

विद्यालय स्तर पर गठित शाला प्रबंध समिति का उपयोग विकास योजना का अंजाम देना, विद्यालय परिसर की समय पर मरम्मत का प्रस्ताव लेना, सम्पति का लेखा-जोखा रखना, विकास गतिविधियों को बढ़ावा देना भवन विस्तार, सुविधाओं को बढ़ाना, विद्यालय समय पर खुले व बंद हो, इसकी मॉनिटरिंग करने समेत वेतन, कोष, आय के स्रोत बढ़ाना आदि कार्य शामिल है।

अभिभावकों से लेते हैं सुझाव

विद्यालय में नियमित शाला प्रबंध समिति व शिक्षक-अभिभावकों की बैठकें आयोजित करने का प्रावधान है। गांव के जागरूक अभिभावकों से मिले सुझावों पर भी शिक्षक अमल भी करते है। समय पर शिक्षक भी मिलकर शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा करते है।

-खुशीराम रावत, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक टोंक

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