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मुआवजा में रोड़ा बनी गिरदावरी रिपोर्ट, 1 लाख हेक्टेयर में उड़द-मूंग की फसल हुई थी खराब

मौसम की मार से खरीफ फसलों की बर्बादी झेल चुके किसानों के लिए दुखद खबर है। फसल खराबे को देखते हुए कराई गई गिरदावरी...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:27 AM IST
Tonk - girdavari report which was blocked in compensation crushed urad moong in 1 lakh hectares
मौसम की मार से खरीफ फसलों की बर्बादी झेल चुके किसानों के लिए दुखद खबर है। फसल खराबे को देखते हुए कराई गई गिरदावरी रिपोर्ट में मुआवजा योग्य 33 प्रतिशत भी फसल खराबा नहीं माना है। जबकि जिले के कई हिस्सों में लगातार दस-बारह दिन तक बारिश होने से उदड-मूंग, बाजरा आदि की फसल खराब हो गई थी।

इसकी पुष्टि अब तक समर्थन मूल्य के लगे कांटों पर काफी कम आई बिकने आए उडद-मूंग व मूंगफली से भी लगाया जा सकता है, लेकिन इसमें गिरदावरी रिपोर्ट के मापदंड रोडा बन गए। इसमें 33 प्रतिशत फसल खराबा नहीं आया है। उधर अब इस रिपोर्ट आने के बाद मुआवजा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को मायुस होना पडेगा। विदित रहे कि जिले में इस साल बारिश होने के साथ ही किसानों ने खरीफ फसल की बोआई तीन लाख हैक्टेयर में की थी।

इसमें सबसे अधिक बोआई करीब पौने तीन लाख हैक्टेयर में उदड-मूंग की हुई थी। शुरूआती दौर में यह फसल काफी अच्छी भी थी, लेेकिन सितंबर माह में लगातार करीब दस तक बारिश होने से उडद-मूंग की करीब एक लाख हैक्टेहर में फसल खराब हो गई थी। अन्य फसलों को भी काफी नुकसान हुआ था। इसको लेकर किसानों ने प्रशासन के समक्ष एसडीएम कार्योलयों से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक धरना प्रदर्शन किया था।

उड़द-मूंग की खराब हुई फसलों को दिखाया था। इसके चलते सरकार ने फसल खराबे के सर्वे के लिए गिरदावरी रिपोर्ट करने के आदेश जिला प्रशासन को दिए थे। इस पर जिला प्रशासन ने सभी तहसीलदारों को गिरदावरी रिपोर्ट करने को निर्देश दिए। जिला प्रशासन को सौंपी। इसमें उल्लेख किया गया कि जिले में कई भी 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल खराबा नहीं हुआ है।

जिले में खरीफ फसल की बोआई का रकबा

ज्वार 63 हजार 390 हैक्टेयर, बाजरा 44 हजार 700, मक्का नौ हजार 220, मूंग 57 हजार 798, उडद 55 हजार 540, मूंगफली 11 हजार 10,तिल 14 हजार 325,सोयाबीन 235, ग्वार छह हजार 40, अरंडी 30, कपास 940,सब्जियां एक हजार 705, हरा चारा सात हजार 735 हैक्टेयर के अलावा अन्य फसलों की बोआई दो हजार हैक्टेयर में हुई थी। इनमें से सबसे अधिक नुकसान उडद-मूंग व बाजरा में हुआ था।

पहले आर्थिक तंगी से गुजर रहे किसानों पर अब दोहरी मार

पहले ही खरीफ फसल के खराबे को लेकर आर्थिक संकट से गुजर रहे किसानों को अब इस गिरदावरी रिपोर्ट में मुआवजा का मापदंड 33 प्रतिशत या उससे अधिक खराबा नहीं होना सामने आने पर किसानों को दोहरी मार से गुजरना पडेगा। तीन माह से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को अब निराशा ही हाथ लगेगी।

दो हजार किसान भी नहीं आए उड़द-मूंग बेचने

जिले में अक्टूबर माह से उडद-मंग व मूंगफली की नौ केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है, लेकिन किसानों की यह फसल इतनी खराब हो चुकी है। जिले में करीब तीन लाख किसानों में से दो हजार किसान भी कृषि जिंस लेकर समर्थन मूल्य पर इन केंद्रों पर बैचने नहीं पहुंचे है। इसके पीछे सबसे बडा कारण है अधिकांश किसानों की फसलें खराब हो गई थी।

गत दिनों जिला प्रशासन ने भेज दी रिपोर्ट

गिरदावरी रिपोर्ट से जिला प्रशासन ने गत माह आपदा प्रबंधन सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के उप शासन सचिव को भेज दी है। अब सरकार ने कोई दूसरा फार्मूला नहीं निकाला तो किसानों को इतनी बडे नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी।

राजस्व गांव में बोई गई कुल फसल को मानते है इकाई

एसडीएम सीएल शर्मा ने बताया कि सरकार ने गिरदावरी रिपोर्ट के मापदंड तय कर रखे है। उसमें रेवन्यू विलेज(राजस्व गांव) में बोई गई फसल को इकाई मानकर गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की जाती है। जैसे कि एक रेवन्यू विलेज में सौ हैक्टेयर में उडद-मूंग, बाजरा,ज्वार तिल आदि फसलों की बोआई हुई है। इसमें प्राकृतिक आपदा में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल खराबा हो गया हो तो उस विलेज के किसान मुआवजे के हकदार बन जाते है। यदि कुल फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक खराब नहीं होता है और उसमें से किसी एक दो फसलें 33 प्रतिशत या उससे अधिक खराब हो जाती है तो भी उसके किसान मुआवजेे के पात्र नहीं माने जाएंगे। क्योिक गिरदावरी रिपोर्ट के मापदंड में मुआवजे के लिए किसान की पात्रता रेवन्यू विलेज की कुल फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक खराबा माना है। जिले में भी उडछ-मूंग में खराबा हुआ हैं, लेकिन वह मापदंड से बाहर है।

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