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बढ़ती आबादी के बीच घटता रोडवेज का बेड़ा, नहीं मिल रही आगार को नई बसंे / बढ़ती आबादी के बीच घटता रोडवेज का बेड़ा, नहीं मिल रही आगार को नई बसंे

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 05:20 AM IST

Tonk News - जिले के जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों मंे लोगांे की सुविधा के लिए अधिकाधिक रोडवेज संचालन जोर देते है, वहीं दूसरी ओर...

Tonk News - increasing roadway fleet between growing population not getting the deposit is new
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जिले के जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों मंे लोगांे की सुविधा के लिए अधिकाधिक रोडवेज संचालन जोर देते है, वहीं दूसरी ओर टोंक आगार में बीते कई वर्षों से बसों मे इजाफा नहीं हुआ। दूसरी ओर समय बीतने के साथ दर्जनभर बसें नकारा घोषित की जा रही है। इसके विपरीत जिले की आबादी नियमित रूप से बढ़ रही है। ऐसी ही स्थिति जारी रही तो वर्ष 2022 तक रोडवेज लोगों को देखने को नहीं मिलेगी। इसका कारण यह है कि अधिकतर रोडवेज निर्धारित समय व किलोमीटर पूरे कर चुकी है। जिले की ढाई सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में आवाजाही की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टोंक आगार की ओर से बसों का संचालन किया जाता है।

इसके बावजूद कई गांव-ढाणियों के लोग आज भी रोडवेज सुविधा से वंचित है। लोग अवैध वाहनों का सहारा लेकर गन्त्व्य तक पहुंच रहे हैं। चौकाने वाली बात यह है कि 2014 के बाद टोंक आगार में नई बस नहीं आई। जबकि दर्जनभर बसें नाकारा साबित कर अजमेर वर्कशॉप भिजवा दी गई। ऐसे में आवाजाही के लिए सुरक्षित यात्रा की बात बेमानी साबित हो रही है। वर्ष 2013 में जब जिले की आबादी 12 लाख ही थी। उस दौरान बेड़े में बसों की संख्या सौ थी। अब जिले की आबादी साढ़े 14 लाख से अधिक होने के बावजूद भी बेड़े में रोडवेज की 74 बसें ही है। हालांकि 24 बसें रोडवेज की तो नहीं, लेकिन अनुबन्ध के तोर पर लगी है। इनमें 14 का िपछले दिनों फाईनेंस राशि जमा नहीं कराने पर संचालन बंद था।

इसके बाद अब 14 में से 6 का संचालन शुरू हो गया है। आगार की बसोंं में से दो बसें ही वर्ष 2014 मॉडल की है। जबकि अन्य सभी बसें वर्ष 2008 से 2013 लिलैण्ड मॉडल की है। जो अपने किलोमीटर व कार्यकाल पूरे कर चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक 8 लाख किलोमीटर चलने या फिर 8 वर्ष पूरे होने पर बस को नकारा मान लिया जाता है। चौकाने वाली बात यह है कि जल्द आगार को अपनी बसें नहीं मिली तो उपलब्ध बसों का समय भी वर्ष 2022 तक पूरा हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में सड़कों पर महज अनुबन्धित बसें ही दौड़ती हुई नजर आएगी।

आगार में संचालन का लक्ष्य भी नहीं हो पा रहा पूरा

आगार को प्रतिदिन करीब 33 हजार 500 किलोमीटर बसों के संचालन का लक्ष्य है। जबकि आगार महज 29 हजार किलोमीटर ही प्रतिदिन संचालन कर पाता है। इसका कारण बसों की कम संख्या व चालक-परिचालकों की कमी है। श्योपुर, फरीदाबाद आदि लम्बे मार्गों पर भी बसें संचालित की जाती है।

10 लाख किलोमीटर के करीब संचालन का प्रति माह लक्ष्य


टोंक के रोडवेज बस स्टैण्ड पर इन दिनों यात्रियों के लिए सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। गत दिनों बस स्टैण्ड परिसर स्थित प्लेटफार्म के आगे टीनशेड लगवाए गए है। इससे यात्रियों का धूप व बारिश मंे बचाव हो सकेगा। इसके साथ ही बस स्टैण्ड की सुन्दरता में भी निखार आया है। इससे पहले भी परिसर में टाईल्स लगवाकर मुख्य द्वार समेत कई कार्य कराए गए है। इसके अलावा यात्रियों की सुिवधा के लिए कुर्सियां आदि भी लगवाई गई थी।

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