--Advertisement--

रमजान माह में पढ़ाएंगे तरावीह की नमाज

रमजान माह में पढ़ाएंगे तरावीह की नमाज टोंक| रमजान माह में तरावीह की नमाज हाफिजों द्वारा पढ़ाई जाती है।...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 07:30 AM IST
रमजान माह में पढ़ाएंगे तरावीह की नमाज
रमजान माह में पढ़ाएंगे तरावीह की नमाज

टोंक| रमजान माह में तरावीह की नमाज हाफिजों द्वारा पढ़ाई जाती है। जानकारी के अनुसार मस्जिद काफला हाफिज अब्दुल समद, नमाज़े तरावीह, शाही जामा मस्जिद अमीरगंज बड़ा कुआं में मुफ्ती इस्लाहुद्दीन खिजऱ नदवी, छावनी जामा मस्जि़द में मोहम्मद आरिफ अंसारी, बूटा बेगम में कारी ज़ाकिर हुसैन, मस्जिद गोल मुफ्ती आसिम अख्तर, हट्टो कि मस्जि़द में हाफिज सिद्दीक़ पठान, मेहंदी बाग जामा मस्जिद में हाफिज़ मोइनुद्दीन, लाड़ली बैगम में हाफिज आरिफ खान, मस्जिद ख़लीिलया में हाफिज अफसार, मुनीर खां में अब्दुल रहमान, नजऱ बाग़ में मोहम्मद युसूफ, बहीर में हाफिज सरदार, धन्ना तलाई मोहम्मदिया में मोहमद फिऱोज़, जामा मस्जिद छोटा बाजार पुरानी टोंक में हाफिज निसार, आज़म शाह में कारी अंसार, सआदत मस्जिद काली पलटन मोहम्मद आमीन, लुहारों का महल्ला बमोर गेट की मस्जिद अहंगरान में मिन्हाजुल हसन, बारूद खाना में हाफिज असरार, मौलाना साहब में हाफिज जावेद, मस्जिद आयशा में मौलवी अमीन, मस्जिद गोल मुफ्ति आसिम अख्तर आदि माहे रमज़ान में तरावीह की नमाज अदा कराएंगे।

सहरी के बाद शाम को ही जलता था चूल्हा

रियासत काल एवं उसके बाद तक रमजान माह में चूल्हा सहरी के बाद शाम को ही जला करता था। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि रियासत काल में एवं उसके बाद तक, माहे रमजान में मुस्लिम घरों में सभी सदस्य रोजा रखते थे। यदि किसी शरई उज्र के किसी का रोजा छूट भी जाता था तो उसको उसका बहुत मलाल हुआ करता था। अब हालांकि इसमें कुछ कमी देखी जा रही है। लेकिन अब भी मुस्लिम समाज के अधिकांश घरों में सहरी के बाद शाम को ही चूल्हा जलता है। किसी घर में कोई बच्चा एवं बीमार आदि हुआ करता था, तो उस के लिए खाना आदि सहरी के समय ही बना लिया जाता था। किसी मुस्लिम के घर से सुबह में धुआं निकलता था, तो उससे सवाल तक कर लिया जाता था।

X
रमजान माह में पढ़ाएंगे तरावीह की नमाज
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..