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घर पर प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर को देनी होगी रसीद, लगानी होगी फीस की तख्ती

एक वर्ष पहले
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घर पर प्रेक्टिस करने वालों को अब रोगी को शुल्क रसीद देनी होगी, वहीं तख्ती लगाकर ली जाने वाली फीस को दर्शाना भी होगा। उल्लेखनीय है कि जिलेभर में अधिकांश डॉक्टर मरीजों को अस्पताल में कम एवं घरों पर अधिक देखते नजर आते हैं। वहीं मरीज को शुल्क की रसीद नहीं देकर वो कहीं ना कहीं आयकर भी बचत कर रहे हैं। लेकिन अब उनपर अंकुश लगाए जाने की तैयारी की जाने लगे हैं।

कई लोगों की शिकायत के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान के अतिरिक्त निदेशक चिकित्सा प्रकोष्ठ ने दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें ली जाने वाली फीस की रसीद रोगी को दिए जाने एवं निर्धारित दरों से अधिक फीस नहीं लिए जाने पर जोर दिया गया है। जानकारी के अनुसार चिकित्सक होम प्रेक्टिस फीस असिस्टेंट प्रो. 100, एसोसिएट प्रो. 125, प्रोफेसर 150, सीनियर प्रो. 200 रुपए निर्धारित बताए जाते हैं। लेकिन हालत ये हैं कि कई जगह बिना रसीद के निर्धारित से अधिक फीस भी ली जा रही है एवं ऐसे डाक्टरों की क्लीनिकों एवं घरों के बाहर कोई लिए जाने वाले शुल्क की तख्ती भी नहीं होती है।

जिले के चिकित्सा अधिकारियों ने विभाग के आदेशों की पालना के लिए दिशा निर्देश जिले में भी जारी करते हुए रोगी रसीद देने एवं शुल्क की तख्ती लगाने को कहा है। जो चिकित्सक नॉन प्रैक्टिस एलाउंस ले रहे हैं और प्रेक्टिस कर रहे हैं। उनपर भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है। निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान जयपुर के अतिरिक्त निदेशक चि.प्र. के जारी दिशा निर्देशानुसार श़ुल्क के संबंध में बताया गया है कि विभाग के ध्यान में लाया गया है कि चिकित्सकों द्वारा अपने
निवास पर रोगियों को देखने की शुल्क निर्धारित शुल्क से
ज्यादा लिए जाता है तथा उक्त शुल्क की प्राप्ति रसीद भी नहीं दी जाती। साथ ही अपने परामर्श कक्ष में लिए जाने वाले शुल्क का प्रदर्शन भी नहीं करते।

चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित करते हुए बताया गया है कि अपने निवास पर ली जाने वाली फीस राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों से वसूल करें, और ली
जाने वाली फीस की प्रति रसीद रोगी को उपलब्ध कराए। साथ ही अपने परामर्श कक्ष में लिए जाने वाले शुल्क की तख्ती लगाकर प्रदर्शन करें।

ये भी बनी हुई है समस्या

जिले में कई जगह आवासी भवनों में कॉमर्शियल क्लीनिक एवं बाहर से आए डॉक्टरों द्वारा प्रैक्टिस की जा रही है। जिनके बारे में कोई जानकारी तक नहीं है। वो किस लेवल एवं किस स्तर के डॉक्टर है। लेकिन वो यहां पर कई आवासों एवं क्लीनिकों पर आकर मरीजों से 400 से 500 रुपए तक फीस वसूल रहे हैं। जिनकी जांच की भी मांग की जा रही है। वो भी मरीज को रसीद नहीं दे रहे हैं।

मनमानी पर लगेगा अंकुश

जानकारों ने बताया कि डाक्टरों द्वारा अस्पताल की अपेक्षा घरों पर मरीजों को अधिक बुलाया जा रहा है। रोगी को फीस की रसीद दिए जाने से मरीजों को राहत मिलेगी। साथ ही ऐसा करने वाले डॉक्टर की मनमानी पर भी कुछ अंकुश लग सकेगा।

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