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दूनी में भामाशाहों ने बदली श्मशान की तस्वीर, अब मिल रही सभी सुविधाएं
कस्बे के घाड़ रोड पर श्मशान पर कभी सुविधा ना के बराबर थी। कुछ हद तक यह अतिक्रमण की भेंट भी चढ़ चुका था। हालत यह थी कि शवदाह गृह के अभाव में बारिश के दिनों में चिता जलाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता था। दूनी के भामाशाहों ने अपने स्तर पर श्मशान की तस्वीर ही बदल दी। इसके लिए घर-घर जाकर जन सहयोग से राशि भी एकत्र की थी। दूनी कस्बे की आबादी 10 से 12 हजार के बीच है। यहां श्मशान के कायाकल्प के बारे में प्रशासन और सरकार के स्तर पर किसी ने कोई
ठोस प्रयास नहीं किया।
क्षेत्र के लोगों को इस बात का भी मलाल है कि सरकार व सत्ता में हिस्सेदारी निभा चुके क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कभी अपने स्तर पर इस श्मशान की कायापलट करने का प्रयास नहीं किया।
वृद्धा ने पेंशन राशि से बनवाया शवदाह गृह
दूनी निवासी स्व. शांति देवी ने अपने जीवन काल में श्मशान में शवदाह गृह का निर्माण करवाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने अपनी पेंशन की राशि से जमा किए 50 हजार रुपए गुरु गोलवलकर योजना में जमा कराए। इसके बाद सरकार ने 5 लाख रुपए योजना में स्वीकृत किए। इस राशि से शवदाह गृह का निर्माण करवाया गया। शांति देवी के पति स्व. सीताराम शर्मा भी एक सामाजिक और धार्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने बस स्टैंड स्थित मंदिर में शिव-हनुमान मूर्ति स्थापित करवाई थी।
अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों की व्यवस्था
घटते वन व आरा मशीन बंद होने के साथ शव जलाने के लिए लकड़ियों की समस्या उत्पन्न हो गई। इसके समाधान के लिए यहां लकड़ियों की भी पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई। यह व्यवस्था अब तक जारी है। इससे अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ियों के लिए लोगों को इधर-उधर परेशान नहीं होना पड़ता।
गुरु गोलवलकर योजना में ऐसे मिलती है स्वीकृति
सरकार द्वारा चलाई जाने वाली गुरु गोलवलकर योजना में श्मशान, कब्रिस्तान के निर्माण व चारदीवारी के लिए कोई भी व्यक्ति निर्माण लागत का 10 प्रतिशत जिला परिषद के नाम बैंक ड्राफ्ट बनवाकर जमा करवाकर स्वीकृत करवा सकता है। इसके लिए ग्राम पंचायत की बैठक में कोरम का प्रस्ताव व हल्का पटवारी की रिपोर्ट के बाद जिला परिषद द्वारा स्वीकृति दी जाती है।
भामाशाह के सहयोग से करा्रई चारदीवारी
कस्बे के भामाशाहों ने शुरुआती दौर में श्मशान को अतिक्रमण से मुक्त रखने व यहां सुविधाएं उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया। दूनी हाल जयपुर निवासी भामाशाह पारस गोखरू ने गुरु गोलवलकर योजना में 90 हजार रुपए जमा करवाकर 9 लाख रुपए की राशि स्वीकृत करवाई। इसके बाद शेष बची चारदीवारी का निर्माण करवाया गया। शिक्षक सत्यनारायण तिवारी, सेवानिवृत्त गिरदावर राधेश्याम सेन, सत्यनारायण सोनी, सुशील कुमार बज, रामदेव साहू, विनोद शर्मा ने जन सहयोग से 2.35 लाख रुपए इकट्ठे किए। बाद में करीब 35 हजार रुपए का चंदा एकत्र कर नहाने के लिए टंकी व नल लगाए।
दूनी| स्व. शांति देवी ने अपनी पेंशन से शमशान घाट में 5 लाख की लागत से शवदाह गृह का निर्माण करवाया जो उपयोगी साबित हो रहा है।