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साइबर क्राइम की बढ़ रही वारदातें, पुलिस नहीं लगा पा रही अंकुश

एक वर्ष पहले
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पुलिस आईडी हैक करने एवं एटीएम के माध्यम से ठगी करने वालों तक पहुंच नहीं पा रही है। साइबर क्राइम की इन होती घटनाओं को रोकने के लिए अब तक पुलिस नाकाम ही साबित हुई है।

जानकारी के अनुसार कुछ माह पूर्व निवाई के सुरज्ञान सिंह, मुकेश डोई, गत दिनों मीडिया से जुड़े मोइन आफरीदी इससे पूर्व भाजपा नेता वकार खान, एवं कांग्रेस नेता युसूफ खान यूनिवर्सल एवं एक पुलिस कर्मी सहित कई लोगों की एफबी हैक करके राशि मांगी जा चुकी है। इसमें से कुछ के जानकारों ठगी के शिकार भी हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज किया तथा सभी आरोपी राज्य के बाहर के पाए गए। समय एवं संसाधनों के अभाव में पुलिस का वहां तक पहुंचना आसान भी नहीं है। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना और उनको पकड़ना चुनौति बना हुआ है।

ऐसे में कई मामले तो परिवादियों ने परेशान होकर वापस तक ले लिए। बहरहाल साइबर क्राइम पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। वहीं इसके लिए नई व्यवस्थाओं की भी दरकार है। जहां से आरोप बताया जाए वहां की पुलिस की जिम्मेदारी निर्धारित होने पर कुछ हो सकता है। लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं है। ठगी का शिकार होने एवं आईडी हैक करने वाले अधिकांश लोगों का कहना है कि मामले में कोई सफलता नहीं मिल पा रही है।

ठगी के 31 मामले हैं पेंडिंग

जिले में एटीएम से ठगी करने के करीब 31 मामले पेंडिंग है। जबकि इससे पूर्व सितंबर तक 38 मामले थे, जिसमें से 10 मामलों में राशि वापस मिलने के कारण उसका निस्तारण किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार एटीएम से ठगी दो प्रकार से हो रही है, एक तो एटीएम का क्लोन बनाकर ठगी के माले सामने आए हैं। वहीं दूसरी तरह ओटीपी आदि की जानकारी लेकर ठग राशि खाते से निकालने में सफल हो रहे हैं। सदर थाना में एटीएम ठगी के मामलों को देख रहे लोकेश का कहना है कि ठगी के मामले में पुलिस कार्रवाई करती है। लेकिन लोगों की सावधानी की जरूरत अधिक है। किसी को भी एटीएम नंबर एवं ओटीपी की जानकारी नहीं दी जाए। बैंक अधिकारी से व्यक्तिगत रुप से जाकर बात की जाए। सावधानी बरतने की भी जरूरत है। विशेष एप के जरिए भी फेसबुक आईडी हैक की जा रही है।

पूर्व में हो चुकी है कई घटनाएं

ऑनलाइन शॉपिंग, एटीएम के पिन नंबर पूछना, केवाईसी अपडेट करने सहित कई बहाने बनाकर ठगी की जिले में कई घटनाएं हो चुकी है। बैंकों से राशि भी निकाली जा चुकी है। लेकिन उसके बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भय की स्थितियां भी रहती है। पुलिस मामले को पकड़ने के बजाय कई मामलों में देखा गया है कि मामले को रफा-दफा करने में अधिक दिलचस्पी दिखा रही है।

जिले में एटीएम से ठगी के देवली में 7, लांबा, नगर, पीपलू में एक-एक, कोतवाली टोंक में 4, मेहंदवास में 2, निवाई में 5, पुरानी टोंक में 2, सदर में 3, घाड़ में 1 एवं बरोनी में 2 मामले दर्ज है।

ज्यादातर ग्रामीण दूसरे प्रदेशों के

साइबर क्राइम को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। टीमें बनाकर कार्रवाई की जाती है। अधिकांश आरोपी राज्य के बाहर के होने के कारण कुछ परेशानी भी आती है। फिर भी कई मामलों में कार्रवाई कर राशि दिलाई गई है।
-सौरभ तिवाड़ी, डीएसपी

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