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राज्य के सबसे बड़े यूनानी कॉलेज में स्टाफ की कमी, जीरो सेशन का खतरा, नहीं होंगे नए प्रवेश

2 वर्ष पहले
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राजस्थान सरकार ने जहां निरोगी राजस्थान का नारा देते हुए स्वास्थ्य पर अधिक फोकस किए जाने के भले ही संकेत दिए हो। लेकिन राज्य का एक मात्र सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज का स्वास्थ्य अब भी पूरी तरह खराब बना हुआ है। भावी हकीमों का भविष्य अधर में नजर आ रहा है। हालात ये हैं कि इस वर्ष पांचवां सेशन चलाया जाना मुश्किल स्थिति में है। गत वर्ष तो राज्य के प्रमुख शासन सचिव ने आयुष मंत्रालय को स्टाफ एवं नॉम्स पूरे किए जाने का भरोसा दिलाते हुए चौथा सेशन शुरू करवा लिया था। लेकिन अब तक हालत ये है कि वहां पर स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो सकी है। जिसके कारण आगामी सेशन जीरो सेशन भी हो सकता है। यानी की स्टाफ एवं नॉम्स पूरी नहीं होने पर इस बार उसमें नया प्रवेश नहीं हो सकेगा। हालांकि ऐसा नहीं हो इसके लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।

नया सत्र के लिए आयुष मंत्रालय की टीम करती है निरीक्षण

एक साल में तीन-तीन बार नियुक्तियां निकाले जाने के बाद ही स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो पाई तो ऐसे में आगामी दिनों में कैसे हो पाएगी। ये अपने अाप में एक सवाल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार अगला सत्र को संचालित करने के लिए आयुष मंत्रालय की टीम सभी नियमों एवं नॉम्स आदि का निरीक्षण करती है। वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेती है। उसके बाद सभी व्यवस्थाएं ठीक पाए जाने के बाद सेशन शुरू किए जाने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की अभावग्रस्त व्यवस्थाओं को देखते हुए मई-जून से शुरू होने वाले सत्र को मंजूरी मिल सकेगी, ये सवाल बना हुआ है। प्राचार्य डॉ. मोहम्मद इरशाद ने बताया कि स्टाफ की कमी को पूरी करने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में यहां पर फर्नीचर, इलेक्ट्रिक आदि कार्य कराए जाने के लिए करीब 17 लाख की लागत की निविदाएं जारी की गई है। स्थाई नियुक्तियों के लिए प्रयास सरकार स्तर पर किए जाने की सूचना मिल रही है।

वर्तमान स्थिति : 13 एसोसिएट व सहायक प्रोफेसर की कमी

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जोधपुर के अधीन संचालित यूनानी मेडिकल कॉलेज में करीब 30 टीचर्स की ज़रुरत है। इसके विपरीत यहां पर संविदा एवं डेपुटेशन पर करीब 17 टीचर्स है। 13 एसोसिएट एवं सहायक प्रोफेसर की कमी चल रही है। मेडिकल कॉलेज को 2016 में साढे पांच साल के बीयूएमएस के अध्ययन के लिए मंजूरी भारत सरकार द्वारा दी गई थी। लेकिन उसके बाद से अब तक यहां पर अभावग्रस्त व्यवस्थाएं बनी हुई है। मानदेय कम एवं स्थायी नियुक्तियों नहीं होने के कारण भी स्टाफ की कमी पूरी होना असंभव बना हुआ है।

अस्पताल का भी हाल खराब

यूनानी मेडिकल कॉलेज ही नहीं बग्गी खाने में संचालित यूनानी चिकित्सालय में भी व्यवस्थाएं अधूरी ही बनी हुई है। यहां पर कई जांच सुविधाएं, दवाओं आदि की व्यवस्थाएं चरमराई हुई है। साथ ही यहां पर भी हकीमों को छोड़कर सभी स्टाफ संविदा पर कार्यरत है। जिनको 5 से 6 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। जिसमें भी कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की हठधर्मिता के कारण कटौती की शिकायतें बनी हुई है।

सीधे राज्य सरकार के हो अधीन

कई जानकारों का कहना है कि यूनानी मेडिकल कॉलेज में स्थाई नियुक्त एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के कारण इसका सीधे राज्य सरकार के अधीन किया जाना जरूरी भी समझा जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखे गए हैं। लेकिन हालही में जारी बजट में राज्य सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। राज्य सरकार के अधीन कॉलेज होने पर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को भारी भरकम फीस से भी राहत मिल सकती है।

यूनानी मेडिकल कॉलेज में चार साल बाद भी स्थायी स्टाफ नहीं

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