• Hindi News
  • National
  • Tonk News Rajasthan News Not A Permanent Staff In The Greek Medical College The Future Of The Future Of Prizes By The Contract Staff

यूनानी मेडिकल कॉलेज में स्थायी स्टाफ नहीं, ठेके के कर्मचारियों के भराेसे भावी हकीमों का भविष्य

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राज्य का पहला सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज में तीन साल बाद भी स्थायी स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके कारण इस कॉलेज के खुलने से जो उम्मीद लगाई गई थी, वो धूमिल ही होती नजर आने लगी है।

हालत ये हैं कि वहां पर अध्ययन करने वाले भावी डॉक्टर्स (हकीमों) को पढ़ाने के लिए स्थायी टीचर्स तक नहीं है। उसके बावजूद यहां पर प्रति वर्ष 90 हजार रुपए फीस देनी पड़ रही है। जबकि सरकारी एमबीबीएस एवं सरकार के अधीन चलने वाले इस के समकक्ष कॉलेजों में फीस बेहद कम एवं नाम मात्र की है। साथ ही वहां कई सुविधाएं भी मुहैया है। लेकिन राज्य के पहले यूनानी कॉलेज में अब तक कई सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने यहां पर बालिका छात्रावास के लिए बजट स्वीकृत किया था। लेकिन अब तक यहां पर ये सुविधां मुहैया नहीं हो सकी है। वर्तमान में ये कॉलेज डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के अधीन संचालित हो रहा है।

प्रशासनिक-वित्तीय नियंत्रण सरकार के अधीन होने पर कॉलेज का बढ़ सकता है महत्व
टोंक | राज्य का पहला सरकारी यूनानी मेडिकल काॅलेज। जहां सारा सारा स्टाफ ठेके पर है।

लगते रहे हैं आरोप
युसुफपुरा चराई में स्थित पहले यूनानी मेडिकल कॉलेज में टीचर्स पर आरोप है कि वो नियमित नहीं आते हैं। वहीं कॉलेज शहर से दूर होने से उनकी जांच भी नहीं हो पा रही है। जिसका खामियाजा यहां पर अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को ही भुगतना पड़ता है। यहां राज्य सरकार के नियमानुसार फीस नहीं ली जा रही है। वहीं बग्गी खाना स्थित यूनानी चिकित्सालय का में भी मरीजों को पूरी निशुल्क दवाएं नहीं मिल पा रही है।

जोधपुर से टोंक आया कॉलेज, 15 करोड़ की आई लागत
तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 2012 में राज्य का पहला मेडिकल यूनानी कॉलेज जोधपुर में खोलने की घोषणा की गई थी। बाद में इस निर्णय को बदलकर टोंक में यूनानी कॉलेज खोलने का फैसला किया गया। 15 करोड़ की लागत से इस कॉलेज के लिए भवन आदि तैयार किए गए। युसूफपुरा चराई में कॉलेज का संचालन 2016 से शुरू हुआ। लेकिन जब से अब तक यहां पर बजट घोषणा के बाद भी बालिका छात्रावास नहीं है। इससे बालिकाओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई जानकारों का मानना है कि इस मेडिकल कॉलेज को उदयपुर में स्थित सरकारी आयुर्वेदी कॉलेज की भांति सरकार के नियंत्रण में लिए जाने की ज़रूरत है। प्रशासनिक एवं वित्तीय नियंत्रण सरकार के अधीन होने पर यहां पर कई सुधार एवं आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से की जा सकती है। इससे यहां पर फीस कम होने के साथ ही स्थायी स्टाफ आदि लगाए जाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

90 हजार प्रति वर्ष फीस
प्रिंसिपल मोहम्मद इरशाद का कहना है कि कॉलेज में सभी कांटेक्ट बेस पर है। यहां पर 90 हजार रुप प्रति वर्ष की फीस है। अगले बैच की परमिशन मिल गई है।

अस्पताल भी बेहाल : बग्गी खाना स्थित यूनानी चिकित्सालय का हाल भी खराब है। वहां पर मरीजों को पूरी निशुल्क दवाएं नहीं मिल पा रही है। वहीं जांच की सुविधा भी नहीं है। इसके कारण गरीब मरीजों को निजी लेब एवं दवाओं के लिए महंगे दाम खर्च करने पड़ रहे हैं।

खबरें और भी हैं...