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आत्महत्या के मामले बढ़े, प्रति माह 6 से अधिक लोग कर रहे विषाक्त सेवन
जिले में मौत को गले लगाने की घटनाएं गत कुछ वर्षों से आम हो गई है। मानो लोगों में खासकर युवाओं में जीवन से संघर्ष की हिम्मत जवाब दे रही है। यही कारण है कि जिला अस्पताल में प्रति माह औसतन 6 से अधिक लोग विषाक्त का सेवन कर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं दो दिन पहले पीपलू व बरोनी क्षेत्र में दो युवकों के फंदे से झूलने की वारदात लोगों के सामने है। विषाक्त का सेवन करने वाले कुछ सफल तो कुछ असफल रहते है। बाद में कानून की पेचीदगी व अनदेखी के चलते पुलिस कारणों तक नहीं पहुंच पाती। सआदत अस्पताल के मेडिकल वार्ड में एक जनवरी से 12 मार्च तक 20 से अधिक मामले विषाक्त के सेवन के सामने आए। इसमें पारिवारिक व अन्य क्लेश के चलते तो कुछ लोग खेतों में दवा का छिड़काव करते समय विषाक्त की चपेट में आए। इनमें कई स्वस्थ्य होकर घरों को लौट गए तो कुछ की स्थिति गम्भीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जयपुर रेफर कर दिया। अधिकतर मामलों में पुलिस के पहुंचने पर भर्ती रोगी भूलवश विषाक्त का सेवन करने की बात कबूलते है। इसके पीछे परिवारजनों का दबाव माने या फिर समाज में बदनामी का भय। इस पर पुलिस भी विषाक्त के सेवन के कारणों की तह तक नहीं पहुंच पाती।
भर्ती होने के बाद अज्ञानवश सेवन का बनाते हैं बहाना
गत दिनों शहर में विषाक्त का सेवन कर सआदत अस्पताल पहुंची विवाहिता ने भावावेश में आकर विषाक्त का सेवन तो कर लिया, बाद में पुलिस के पहुंचने पर भूलवश विषाक्त खाना बताया। सरवराबाद निवासी युवक ने परिवार में हुई कहासुनी के बाद विषाक्त का सेवन कर लिया। होश में आने के बाद परिवार के दबाव के चलते घर में रखी चूहे मारने की पुड़िया से भूलवश मंजन करने का बयान दे दिया।
एक ही दिन में फंदे से झूलने की दो घटनाओं ने झकझोरा
दो दिन पहले दो युवकों ने पीपलू व बरौनी थाना क्षेत्र में पेड व पंखे झूलकर आत्महत्या करने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। पहली घटना पीपलू कस्बे बनीपार्क कॉलोनी में हुई। यहां युवक ने गृह क्लेश से तंग आकर बुधवार शाम को रस्सी से गले में फंदा लगाकर घर के पास बबूल के पड़ से लटककर आत्महत्या कर ली।
मृतक बनी पार्क कॉलोनी निवासी हनुमान (22) पुत्र रामलाल बागरिया था। प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि उसने गृह क्लेश से तंग आकर आत्महत्या की है। दूसरी घटना डारडातुर्की गांव में हुई। यहां भी एक युवक ने घर में टीन शेड की लकड़ी के साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक डारडातुर्की निवासी मुकेश (28) पुत्र जगदीश बैरवा ने घर में साड़ी से
फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
अधिक अपेक्षा भी एक कारण
सआदत अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ.सी.पी. बैरवा का कहना है कि सामजिक ताने-बाने में बिखराव, भागमभाग जिंदगी, पैसा व शोहरत कमाने की मंशा से भी युवा मानसिक अवसाद में आ रहे हैं। इसके साथ ही पढ़ाई के दौरान परिजनों की ओर से की जाने वाली अपेक्षाएं भी इसमें शामिल है। प्रतिस्पर्द्धा व समाज के लोगों के सामने बेहतर रूप से उभरने के लिए विद्यार्थी परीक्षा को लेकर तनाव में रहते है। विद्यार्थियों में परीक्षा का भूत इस कदर सवार रहता है कि उनकी दिनचर्या तक बदल जाती है। विद्यार्थियों को समय सारिणी बनाकर पढ़ाई का समय तय करें। अभिभावक भी बच्चों का सहयोग करें न कि अधिक अपेक्षाएं पाले। बच्चें व अभिभावक समय-समय पर मन की बात एक-दूसरे से साझा करें। इससे मन में तनाव व भय दूर होगा तथा उत्साह बना रहेगा।
विषाक्त के सेवन के मामले
वर्ष रोगी
2016 63
2017 72
2018 81
2019 86
(स्रोत: सआदत अस्पताल टोंक)
अधिकतर मामलों में पुलिस के पहुंचने पर भर्ती रोगी भूलवश विषाक्त सेवन करने की कहते हैं बात
टोंक | सआदत अस्पताल।