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झोलाछापों की चांदी, जिम्मेदारोंं को जानकारी ही नहीं / झोलाछापों की चांदी, जिम्मेदारोंं को जानकारी ही नहीं

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 05:16 AM IST

Tonk News - चिकित्सा विभाग की उदासीनता के चलते जिले में झोलाछाप चिकित्सकों की पौ-बारह है। गांव से लेकर ढाणी तक झोलाछाप...

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चिकित्सा विभाग की उदासीनता के चलते जिले में झोलाछाप चिकित्सकों की पौ-बारह है। गांव से लेकर ढाणी तक झोलाछाप चिकित्सकों का जाल बिछता जा रहा हैं। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में नीक- हकीम बैखोफ बीच बाजार में दुकानें सजाकर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है।

आलम यह है कि हाथ में डिग्री नही होने के बावजूद झोलाछाप चिकित्सक कैसी भी बिमारी का इलाज करने से नही चूक रहे। प्रशासन व चिकित्सा विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नही होने से झोलाछाप चिकित्सकों के हौसले बुलन्द हैं। शहर के गली मोहल्लों समेत ग्रामीण इलाकों में भी झोलाछाप चिकित्सकों का मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जारी है।

इनके उपचार से रोगियों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे है, इसके बावजूद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इक्की-दुक्की कार्रवाई कर इतिश्री करने में जुटा है।

ढाई हजार से अधिक झोलाछाप

शहर के हर गली मोहल्लों समेत जिले के सभी गांवों में झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार जारी है।

जानकारी में सामने आया कि जिले में करीब ढाई हजार से अधिक झोलाछाप नीक-हकीम सक्रिय होकर प्रशासन को धता बताते हुए मरीजों से सस्ता उपचार के बहाने चांदी कूट रहे है।

बीमारी बढ़ने पर आते हैं

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग झोलाछाप चिकित्सकों के चंगुल में फंसकर अपनी जान तक गंवा देते है।

सआदत अस्पताल के डॉ. जसवन्त चौधरी के मुताबिक मामूली बीमारी के बाद हालात बिगड़ने पर मरीज सरकारी अस्पतालों की ओर रूख करते है। ऐसे में समय गंवाना मरीज के स्वास्थ्य पर भारी साबित होता है।

विभाग की ओर से फौरी कार्रवाई

पिछले पांच वर्षो में टीम ने टोडारायसिंह, खरेड़ा, बगड़ी, बनेठा, उनियारा, घाड़ व देवली समेत लाम्बाहरिसिंह में एक-एक झोलाछाप चिकित्सक पर कार्रवाई कर उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। फौरी कार्रवाई होने से झोलाछाप चिकित्सकों पर अंकुश नही लग पा रहा।

इन्हंे है कार्रवाई का अधिकार

नीम हकीमों के खिलाफ कार्रवाई अधिकार जिला कलक्टर को है। इसके अलावा जिला स्तरीय कमेटी में उपखण्ड अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, औषधि निरीक्षक आदि लोग टीम में शामिल होते है। इधर, सीएमएचओ एके भण्डारी ने बताया कि शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाती है। इसमें मामले दर्ज कराना भी शामिल है।

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