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प्रदूषण से बचना है तो मिट्‌टी की प्रतिमा ही श्रेष्ठ

गणेशोत्सव सहित धार्मिक आयोजनों में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति के विसर्जन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण व...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 07:16 AM IST
Tonk - प्रदूषण से बचना है तो मिट्‌टी की प्रतिमा ही श्रेष्ठ
गणेशोत्सव सहित धार्मिक आयोजनों में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति के विसर्जन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण व एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदेशभर में जहां मिट्टी की बनी मुर्तियों पर खासा ध्यान दिया जा रहा हैं।

राजस्थान का लखनऊ कहलाने वाले टोंक शहर की सड़कों पर भी इन दिनों गणशोत्सव को लेकर तैयारियां दिखाई दे रही हैं। शहर के गांधी पार्क क्षेत्र में काली मिट्टी से बनी गणपति की प्रतिमाएं भी गणेशोत्सव की रौनक बनने के लिए तैयार नजर आ रही हैं। 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर जहां आमजन व धार्मिक संस्थाओं की तैयारियां परवान पर हैं। वही प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश प्रतिमाए बाजार में आने से पर्यावरण प्रदुषण का खतरा मंडराना स्वाभाविक हैं। दरअसल हर बार अनंत चर्तुदर्शी पर गणेश प्रतिमाओं के विर्सजन को लेकर सबसे बड़ी चिंता जल प्रदुषण को लेकर रहती हैं। क्योंकि प्लास्टर ऑफ पेरिस यानि पीओपी से बनी प्रतिमाए पानी में सही घुल नही पाती है और इन प्रतिमाओं के कारण होने वाला जल प्रदुशण पानी में रहने वालों जीवों के लिए हानीकारक साबित होती हैं। लेकिन देखा जाए तो पर्यावरण प्रदुशण को धत्ता बताते हुए बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस बनी गणेश प्रतिमाओं अच्छा खासा स्टाक बिकवाली के लिए तैयार हैं। लोगों की माने तों प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश प्रतिमाओं को बनने से रोकने के लिऐ गणेषोत्सव से पूर्व ही जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए थे।

गणेशोत्सव

कमलेश महावर| टोंक

गणेशोत्सव सहित धार्मिक आयोजनों में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति के विसर्जन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण व एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदेशभर में जहां मिट्टी की बनी मुर्तियों पर खासा ध्यान दिया जा रहा हैं।

राजस्थान का लखनऊ कहलाने वाले टोंक शहर की सड़कों पर भी इन दिनों गणशोत्सव को लेकर तैयारियां दिखाई दे रही हैं। शहर के गांधी पार्क क्षेत्र में काली मिट्टी से बनी गणपति की प्रतिमाएं भी गणेशोत्सव की रौनक बनने के लिए तैयार नजर आ रही हैं। 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर जहां आमजन व धार्मिक संस्थाओं की तैयारियां परवान पर हैं। वही प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश प्रतिमाए बाजार में आने से पर्यावरण प्रदुषण का खतरा मंडराना स्वाभाविक हैं। दरअसल हर बार अनंत चर्तुदर्शी पर गणेश प्रतिमाओं के विर्सजन को लेकर सबसे बड़ी चिंता जल प्रदुषण को लेकर रहती हैं। क्योंकि प्लास्टर ऑफ पेरिस यानि पीओपी से बनी प्रतिमाए पानी में सही घुल नही पाती है और इन प्रतिमाओं के कारण होने वाला जल प्रदुशण पानी में रहने वालों जीवों के लिए हानीकारक साबित होती हैं। लेकिन देखा जाए तो पर्यावरण प्रदुशण को धत्ता बताते हुए बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस बनी गणेश प्रतिमाओं अच्छा खासा स्टाक बिकवाली के लिए तैयार हैं। लोगों की माने तों प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश प्रतिमाओं को बनने से रोकने के लिऐ गणेषोत्सव से पूर्व ही जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए थे।

काली मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं गणेशोत्सव के लिए तैयार

कई सालों से बना रहे हैं गणेशजी की मिट्टी की प्रतिमाए

गांधी पार्क निवासी लड्डूराम एवं विष्णु प्रजापत का परिवार पिछले कई सालों से काली मिट्टी से गणेश की प्रतिमाए बना रहे हैं। विष्णु प्रजापत ने बताया कि पीओपी की मुर्ति पानी में ठीक ढंग से घुल नही पाती और टूकडे होकर पानी में बहती रहती हैं। जिससें जीवों को परेशानी होती हैं। उन्होने बताया कि यह प्रतिमाए पीओपी की प्रतिमाओं से कम मूल्य पर मिलती हैं। इस बार गणेशोत्सव के लिए उन्होने 100 से से लेकर 1100 रूपए तक प्रतिमाए बनाई हैं।

उमंग और उल्लास का त्यौहार गणेशोत्सव

दस दिवसीय गणेश उत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता हैं। पूरे भारत में भगवान गणेश के जन्मदिन के इस उत्सव को उनके भक्त बेहद ही उल्लास एवं उमंग के साथ मनाते हैं। गणेशोत्सव पर्व के दौरान भगवान गणेश के भक्त अपने घरों में उनकी मूर्ति की स्थापना करते हैं और 10 दिन बाद पवित्र जल या तालाबों में उस प्रतिमा का विर्सजन करते हैं।

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