उपलब्धि / 12 छात्रों का एनडीए में चयन, देश के 31 सैनिक स्कूलों में सबसे अधिक, रक्षा मंत्री ट्रॉफी मिलेगी



दूरदर्शी राजनेता रहे तत्कालीन सीएम मोहनलाल सुखाडिय़ा ने राजस्थान का पहला सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में ही ऐसे ही नहीं खुलवाया। इसलिए कि शौर्य की धरा पर इस नाम से पढऩे वाले बच्चे वीरता और उपलब्धियों के आयाम रच सके। प्राइड आफ स्कूल के नाम से यहां लगी ये 26 तस्वीरें इसी का उदाहरण है। स्कूल हर नए गौरव के बाद आगे की तस्वीर दर्पण के रूप में खाली रखता है। उसके नीचे लिखा है यू आर नेक्सट। ताकि पढ़ने वाला बच्चा उसमें अपनी शक्ल रखकर बड़ा सपना बुन सके। दूरदर्शी राजनेता रहे तत्कालीन सीएम मोहनलाल सुखाडिय़ा ने राजस्थान का पहला सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में ही ऐसे ही नहीं खुलवाया। इसलिए कि शौर्य की धरा पर इस नाम से पढऩे वाले बच्चे वीरता और उपलब्धियों के आयाम रच सके। प्राइड आफ स्कूल के नाम से यहां लगी ये 26 तस्वीरें इसी का उदाहरण है। स्कूल हर नए गौरव के बाद आगे की तस्वीर दर्पण के रूप में खाली रखता है। उसके नीचे लिखा है यू आर नेक्सट। ताकि पढ़ने वाला बच्चा उसमें अपनी शक्ल रखकर बड़ा सपना बुन सके।
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दूरदर्शी राजनेता रहे तत्कालीन सीएम मोहनलाल सुखाडिय़ा ने राजस्थान का पहला सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में ही ऐसे ही नहीं खुलवाया। इसलिए कि शौर्य की धरा पर इस नाम से पढऩे वाले बच्चे वीरता और उपलब्धियों के आयाम रच सके। प्राइड आफ स्कूल के नाम से यहां लगी ये 26 तस्वीरें इसी का उदाहरण है। स्कूल हर नए गौरव के बाद आगे की तस्वीर दर्पण के रूप में खाली रखता है। उसके नीचे लिखा है यू आर नेक्सट। ताकि पढ़ने वाला बच्चा उसमें अपनी शक्ल रखकर बड़ा सपना बुन सके।दूरदर्शी राजनेता रहे तत्कालीन सीएम मोहनलाल सुखाडिय़ा ने राजस्थान का पहला सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में ही ऐसे ही नहीं खुलवाया। इसलिए कि शौर्य की धरा पर इस नाम से पढऩे वाले बच्चे वीरता और उपलब्धियों के आयाम रच सके। प्राइड आफ स्कूल के नाम से यहां लगी ये 26 तस्वीरें इसी का उदाहरण है। स्कूल हर नए गौरव के बाद आगे की तस्वीर दर्पण के रूप में खाली रखता है। उसके नीचे लिखा है यू आर नेक्सट। ताकि पढ़ने वाला बच्चा उसमें अपनी शक्ल रखकर बड़ा सपना बुन सके।

  • चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल का आज 58वां स्थापना दिवस, पूर्व संध्या पर ही मिली यह खुश खबर
  • पहले के छह छात्रों को मिलाकर एनडीए में इस साल उसका रिजल्ट 24 प्रतिशत

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2019, 01:13 AM IST

चित्तौड़गढ़. शौर्य की धरती चित्तौड़गढ़ का सैनिक स्कूल बुधवार को 59वें साल में प्रवेश कर रहा है। स्थापना दिवस की बेला में ही आई एक खुशखबर ने उसका सीना और चौड़ा कर दिया। स्कूल के 6 छात्रों का एनडीए में चयन हुआ है।

 

पहले के छह छात्रों को मिलाकर एनडीए में इस साल उसका रिजल्ट 24 प्रतिशत है, जो देश के सभी 31 सैनिक स्कूलों में सबसे अधिक है। इस कारण इस रक्षा मंत्री ट्रॉफी भी मिल सकती हैं। स्कूल को मंगलवार सुबह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से मिले पत्र में बताया गया कि जून में हुई 142 एनडीए कोर्स परीक्षा में उसके छह छात्राें दीपक शर्मा, रजत गोदारा, आलोक आनंद, सुरेंद्रसिंह, अभिनवकुमार व रोबिन पटेल पास हुए हैं। जनवरी में हुई 141 परीक्षा में भी उसके छह छात्र पास हुए थे।

 

स्थापना के अब तक 59 साल में सेना को एक जनरल व 11 लेफ्टिनेंट जनरल दिए

सैनिक स्कूल में हर छात्र को स्कूल नंबर अलॉट होता है। सात अगस्त 1961 को स्थापना के साथ यानी 59 साल में 5969 छात्र इस स्कूल में पढ़ लिए। यह देश का इकलौता सैनिक स्कूल है, जहां के छात्र दलबीरसिंह सुहाग सेना जनरल यानी आर्मी चीफ तक बने। कुल 11 लेफ्टिनेंट जनरल बने। जिनमें से तीन वर्तमान में भारतीय थल सेना में रक्षा की कमान संभाले हुए हैं। सबसे पहले लेफ्टिनेंट जनरल बनने का गौरव भी स्कूल के प्रथम छात्र मानधातासिंह को ही मिला। स्कूल अब तक 15 मेजर जनरल दे चुका है।

 

ये भी जानिए

  • 1 जनरल सेना में 
  • 11 लेफ्टिनेंट जनरल 
  • 15  मेजर जनरल 
  • 1 राज्यपाल 
  • 6 आईएएस 
  • 4 आईपीएस 
  • 5 आईएफएस 
  • 2 विदेश सेवा अधिकारी

 

  • 5969 अभी तक छात्रों का प्रवेश
  • 550 से अधिक एनडीए में चयनित
  • 59 साल में 550 से अधिक छात्रों का हो चुका एनडीएम में चयन
  • 06 पूर्व छात्र सैन्य अधिकारी रहते हुए सरहदों पर दे चुके हैं शहादत

 

चित्तौड़गढ़ में सैनिक स्कूल अपनी स्थापना के मकसद पर खरा उतरा है। छात्रों को शैक्षणिक के साथ अन्य क्षेत्र में भी आगे बढ़ाते है़। इसी कारण यहां के छात्र शीर्ष पर पहुंच रहे हैं। पूर्व छात्रों की उपलब्धियां हमें गर्व से अभिभूत करती हैं। -मेजर जनरल संजीव ग्रोवर, चेयरमैन, सैनिक स्कूल प्रबंध समिति, चेयरमैन एवं जीओसी 61 सब एरिया

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