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मंगलवाड़ के पास हादसा, एलडीसी की परीक्षा देने जा रहे थे कानोड़ के भाई-बहन सहित 4 की मौत

भास्कर न्यूज | मंगलवाड़/कानोड़ उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर मंगलवाड़ चौराहा के पास शनिवार दोपहर दो वाहनों में...

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 07:16 AM IST
भास्कर न्यूज | मंगलवाड़/कानोड़

उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर मंगलवाड़ चौराहा के पास शनिवार दोपहर दो वाहनों में भिड़ंत में चार जनों की मौत हो गई। इनमें दो कानोड़ क्षेत्र के परीक्षार्थी भाई-बहन भी शामिल हैं। हादसे में इनकी मां भी गंभीर घायल हो गई। दोनों भाई-बहन रविवार को भीलवाड़ा में होने वाली लिपिक भर्ती परीक्षा देने के लिए एक दिन पहले मां को साथ लेकर वैन में जा रहे थे। शनिवार दोपहर सवा बजे अजमेर पासिंग कार चित्तौड़ से उदयपुर की ओर जा रही थी। मंगलवाड़ चौराहा से एक किमी दूर ब्रजवासी होटल के सामने एक कट पर अचानक ब्रेक लगने से कार असंतुलित होकर दूसरी साइड में चली गई। वहां ये कार सामने से आ रही चित्तौड़ पासिंग वैन से जा भिड़ी। वैन में सवार कानोड़ के रावतपुरा गांव मादड़ा रेलवे स्टेशन निवासी नारायण (21) पुत्र अंबालाल मेघवाल और राधेश्याम (22) तथा कार सवार कृष्णगंज अजमेर निवासी 50 वर्षीय अरविंद (50) पुत्र पदम कुमार जैन की मौके पर मौत हो गई, जबकि वैन में सवार नारायण की बहन माया (18) और मां मांगीबाई समेत तीन गंभीर घायल हो गए। इनको उदयपुर ले जाया गया, जहां माया ने भी दम तोड़ दिया।

मृतक माया

हादसे के बाद क्षतिग्रस्त वैन में फंसे दोनों युवक।

परिवार का सहारा बनने के लिए दे रहे थे प्रतियोगी परीक्षा

मृतक छात्रा माया और नारायण के पिता अंबालाल मेघवाल महाराष्ट्र के पुणे में भेल पकौड़ी का काम करते हैं। मां मांगीबाई घर पर रहती है। दोनों मृतक अविवाहित होकर रोजगार की तलाश में थे। अब परिवार पर गुजारे का संकट आ गया है। दोनों मृतक भाई-बहन चित्तौडग़ढ़ जिला परिषद के सदस्य डॉ. ताराचंद मेघवाल की बहन के बच्चे थे। डॉ. ताराचंद ने बताया कि उनकी भांजी माया और भांजा नारायण का रविवार को भीलवाड़ा में एलडीसी परीक्षा का पेपर था। उनके साथ मां मांगीबाई और 22 वर्षीय राधेश्याम भी वैन में बैठकर जा रहे थे। पेपर सुबह आठ बजे होने से ये लोग एक दिन पहले ही निकल गए थे।

हर वक्त साथ रहते थे दोनों दोस्त, साथ ही दुनिया छोड़ी

मृतक नारायण और राधेश्याम

कानोड़ निवासी मृतक नारायण मेघवाल और राधेश्याम दोनों में गहरी दोस्ती थी। दोनों हरदम साथ-साथ ही रहते थे। दोनों सोशल मीडिया पर साथ की सेल्फी भी पोस्ट करते रहते थे। जब नारायण और उसकी बहन माया मां मांगीबाई को लेकर वैन में भीलवाड़ा जा रहे थे तो राधेश्याम भी उनके साथ रवाना हुआ। वैन नारायण चला रहा था, जबकि राधेश्याम उसकी बगल में बैठा था। साथ रहने वाले दोनों दोस्तों ने दुनिया भी एक साथ ही छोड़ी।

क्रेन की मदद से निकाले शव

धमाका सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। उनमें फंसे लोगों को बाहर निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान बारिश भी हो रही थी। हाईवे एंबुलेंस के अलावा भादसोड़ा, डूंगला से भी 108 एंबुलेंस को बुलाया। घायलों को जैसे-तैसे बाहर निकालकर मंगलवाड़ अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उदयपुर रेफर किया गया। तीनों शव तो इतनी बुरी तरह फंसे हुए रहे कि क्रेन के आने के बाद ही निकल पाए।