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क्रिकेटर ने हादसे में खोया सीधा हाथ, अब उल्टे से ही 143 KM की स्पीड पर बॉलिंग

क्रिकेट टीम के उपकप्तान अंकुश का दुर्घटना में हाथ कट गया था, फिर भी नहीं छोड़ा क्रिकेट।

​प्रमोद कल्याण | Last Modified - Dec 04, 2017, 01:31 AM IST

क्रिकेटर ने हादसे में खोया सीधा हाथ, अब उल्टे से ही 143 KM की स्पीड पर बॉलिंग

उदयपुर.बेटे के क्रिकेट खेलने से नाराज मां ने बैट जला दिया था। पिता ने इंजन पर काम करने भेजा तो वहां दायां हाथ कट गया। फिर भी क्रिकेट को लेकर जुनून कम नहीं हुआ। क्रिकेट खेलना जारी रखा। 100 किमी से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हैं। ये खिलाड़ी हैं भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के उपकप्तान अंकुश सिंह। 24 साल के अंकुश ने हाल ही में मुंबई में सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग में हिस्सा लिया। उनका दिव्यांग क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में चुना जाना लगभग तय है। यह वर्ल्ड कप 2019 में लंदन में खेला जाएगा। इसके लिए जनवरी में सिलेक्शन ट्रायल होगा। ट्रेनिंग मुंबई और बड़ौदा में होगी।


- राजस्थान के भरतपुर जिले के छोटे से गांव कुम्हेर के अंकुश को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। इससे माता-पिता नाराज रहते। वे चाहते कि बेटा पढ़ाई करे और घर के काम में हाथ बंटाए, लेकिन अंकुश का मन तो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने में लगा रहता।

- बात 10 साल पहले की है। एक दिन मां ने बेटे का बैट जला दिया और बेटे को डांटकर कहा कि जाकर इंजन पर काम करो। अंकुश चला गया। दुर्भाग्य से दायां हाथ इंजन के पट्‌टे में आ गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों को हाथ काटना पड़ा।

- बेहोशी की हालत में भी बेटे को क्रिकेट-क्रिकेट बोलते देख माता-पिता की आंखों में आंसू आ गए और अपनी गलती का अहसास हुआ। बेटे के बिना कहे ही गेंद और बैट ले आए।

- एक हाथ न होने से निराश अंकुश दुखी होकर साथियों को देखते। पिता बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए उसके साथ क्रिकेट खेलने लगे। अंकुश में भी जोश आया। उन्होंने बॉलिंग पर फोकस करने का फैसला किया।

- रोजाना 7-8 घंटे बॉलिंग प्रैक्टिस करते। जल्दी ही स्पीड 100 किमी/घंटे को पार कर गई। 2012 में अंकुश ने राजस्थान की दिव्यांग क्रिकेट टीम के लिए 243 खिलाड़ियों के साथ सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लिया। उनका एक बार में ही चयन हो गया। अगले साल मुंबई की दिव्यांग टीम के कप्तान बने। अब भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के उपकप्तान हैं।

- मुंबई में अंकुश का 135 से 143 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से गेंदबाजी करना चर्चा में रहा था। कई फिल्म एक्ट्रेस भारतीय दिव्यांग टीम को प्रमोट कर रहे हैं। अंकुश सिंह कहते हैं कि-मैंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा। इसलिए आज इस मुकाम पर हूं।

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