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'विधानसभाएं बन गई हैं बजट पारण और शोरशराबा सभाएं'

दो दिवसीय 18वें अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन की हुई शुरुआत

Bhaskar News | Last Modified - Jan 09, 2018, 05:57 AM IST

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    उदयपुर. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी में सोमवार को होटल रेडिसन ब्लू में 18वें राष्ट्रीय सचेतक सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। इसमें मुख्यमंत्री सहित 19 राज्यों से आए 90 प्रतिनिधियों ने विधानसभा और लोकसभा की कार्यवाहियों के स्तर को लेकर चिंता जताई। सरकारी मुख्य सचेतकों और संसदीय मंत्रियों ने कहा कि विधानसभाएं बजट पारण और शोरशराबा सभाएं बनकर गई हैं। यह अफसोसनाक है। कानून चुटकियों में बनाए जाते हैं, जबकि विधानसभाओं का काम ही बहुत मंथन के साथ कानून बनाना है।


    ऐसे बदल सकता है सदन
    - मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चिंता जताई कि सदन की कार्यवाही बहुत जल्दी स्थगित हो जाती है। सदन चलने में गेप नहीं होना चाहिए। सदन चलता है तब कुछ लोग समाचार पत्रों की सुर्खियों में आ जाते हैं और जो व्यवस्थित बोलते हैं, उनकी दो लाइन छपकर रह जाती है। इसको बदलने की जरूरत है। शॉर्टकट पॉलिटिक्स नहीं चल सकती।
    - संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि संसद की कार्यवाही 120 से घटकर 70-80 दिन पर आ गई। संसद में एक सत्र ऐसा भी होना चाहिए कि सांसद, प्रधानमंत्री से एक-एक सवाल पूछे और प्रधानमंत्री उसका जवाब दें।
    - राज्य सरकार के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, लोकसभा में लोक महत्व के मुद्दे नहीं उठते। विधानसभाएं बजट पारण और शोर सभाएं बन कर रह गई हैं। सदन की दो बैठकों में छह का नहीं, चार माह का अंतराल हो। सदन कम से कम 70 दिन चले। विधान बनाने का काम चुटकियों में होता है जबकि यह बहुत गंभीर काम है।
    - शून्यकाल सबसे अंत में हो, ताकि लोग सदन में रुकें।
    - विभिन्न देशों की तरह हर माह के आखिरी सप्ताह 5 दिन विधानसभा सत्र अनिवार्य हो।
    - शून्य काल और याचिका के दौरान सभी विधायकों को अपने मुद्दे उठाने की इजाजत हो।
    - विधायकों का वेतन परफोर्मेंस से जोड़ा जाए।
    - सदन में वेतन बढ़ाने के बजाय अफसरों की तरह विधायकों का वेतन बढ़े।

    मेजबान मुख्य सचेतक गुर्जर नाराज, बोले- मुझे नहीं बिठाया मंच पर

    - मुख्य सचेतकों के सम्मेलन में मेजबान राजस्थान के चीफ व्हिप कालूलाल गुर्जर मंच पर नहीं बिठाए जाने से असंतुष्ट हो गए और उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों से शिकायत कर दी। गुर्जर ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल से की थी।

    - मेघवाल से भास्कर ने पूछा तो उन्होंने बताया कि यह प्रकरण केंद्रीय संसदीय मंत्री से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर वही निर्णय करेंगे। मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

    - गुर्जर से इस प्रकरण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रदेश से हमारे संसदीय मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़, गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, सांसद अर्जुुन मीणा आदि लोग थे। मैंने अपनी आपत्ति केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल से जता दी थी।

    - प्रदेश के उप मुख्य सचेतक मदन राठौड़ ने कहा कि मुख्य सचेतकों के सम्मेलन में अगर प्रदेश के सांसद और संसदीय मंत्री को मंच पर बिठाया जा सकता है तो मुख्य सचेतक का तो हक बनता ही है। मेजबान प्रदेश के चीफ व्हिप को ही मंच पर जगह नहीं मिलना अफसाेसनाक है।

    - यह वाकई एक चूक थी और मेजबान प्रदेश में ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह बात मैंने सम्मेलन का संचालन कर रहे अधिकारियों के सामने उठाई थी। लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे हो गया, यह उनकी जानकारी में नहीं है।

    लोकतंत्र में सचेतक की भूमिका अहम, सदन में भले ही टोका-टोकी हो पर व्यक्तिगत हमले नहीं : वसुंधरा

    मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि लोकतंत्र में सचेतक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उपस्थिति, अनुशासन और आदेश की पालना कराना सचेतक का काम होता है, जो बहुत मुश्किल भी है। सदन हमारी गरिमा का सवाल है और सभी पार्टियों का दायित्व बनता है कि यह सही से चले। सदन में टोका-टोकी जरूरी होनी चाहिए लेकिन व्यक्तिगत हमले नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की अपेक्षा को पूरा करना मुश्किल काम है, लेकिन सदन को अच्छे से चलाने में सचेतक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उसके सामने सदन को चलाना एक बड़ा टास्क होता है। वसुंधरा राजे ने पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत का जिक्र करते हुए कहा कि शेखावत ने हम लोगों को बहुत ही बढ़िया बात सिखाई कि सरकार कैसे चलती है। विपक्ष का रोल क्या होता है। सम्मेलन में संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव राजीव यादव, लोकसभा में सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राकेशसिंह, राज्यसभा में सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक नारायणलाल पंचारिया, राजस्थान विधानसभा के सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर, उप मुख्य सचेतक मदन राठौड़, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, सांसद अर्जुनलाल मीणा सहित देश भर के 19 राज्यों और केंद्र से संबंधित करीब 90 प्रतिनिधि मौजूद थे।

    सीएम ने पूछा- सचेतकों को गिफ्ट क्या दे रहे हो

    उद्घाटन सत्र के बाद मुख्यमंत्री ने सचेतक और अन्य प्रतिनिधियों को आतिथ्य सत्कार स्वरूप दिए जाने वाले गिफ्ट के बारे मेंं पर्यटन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर सुमिता सरोच से चर्चा की। उसके बाद जब मुख्यमंत्री होटल से रवाना हो रही थीं तब उनकी नजर कठपुतली पर पड़ी। सीएम ने सुमिता सरोच से कहा कि गिफ्ट में एक-एक कठपुतली भी रखवा देना।

    दो दिन में डेढ़ करोड़ का खर्चा, आज करेंगे सैर सपाटा
    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सम्मेलन पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसे राज्य सरकार और केन्द्र का संसदीय कार्य मंत्रालय वहन करेंगे। सचेतक मंगलवार काे उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। इसके लिए प्रशासन ने चार रूट तय किए हैं। मंगलवार को समापन सत्र के बाद दोपहर का भोज हाेगा। भ्रमण के लिए पहले रूट में सिटी पैलेस, क्रिस्टल गैलेरी, सहेलियों की बाड़ी और सज्जनगढ़ शामिल किया गया है। दूसरे रूट में शिल्पग्राम, सिटी पैलेस, क्रिस्टल गैलेरी और सहेलियों की बाड़ी, तीसरे रूट में सहेलियों की बाड़ी, सिटी पैलेस, क्रिस्टल गैलेरी, मोती मगरी और फतहसागर को शामिल किया गया है। चौथे रूट में शिल्पग्राम, प्रताप गौरव केंद्र और सहेलियों की बाड़ी शामिल किए हैं।

    व्हिप का मतलब कोड़ा होता है, वर्षों से चला आ रहा है, बदलना चाहिए : गोयल

    संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने वर्षों से चली आ रही प्रथा में परिवर्तन पर जोर दिया और कहा कि व्हिप (सचेतक) शब्द का मतलब क्या होता है, जब गूगल पर सर्च किया तो व्हिप का मतलब निकला कि एक काेड़ा या चाबुक जो कि मनुष्य या पशु पर इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इस व्हिप शब्द को बदला जाना चाहिए। गोयल ने कहा कि सम्मन भेजा जाता है, उसको निमंत्रण पत्र का नाम दिया जाना चाहिए। 50 साल से जो प्रथा चल रही है, उसके परिवर्तन करने हमने कभी ध्यान नहीं दिया।

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