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भंडारी अस्पताल में टांकों में पड़ी मवाद ने छीन लिया उदय और सुशीला का हर्षित सपना

मां सुशीला और पिता उदयलाल के साथ-साथ अड़ोसी-पड़ोसी और रिश्तेदारों को भी स्तब्ध कर दिया है।

Danik Bhaskar | Jan 07, 2018, 08:00 AM IST

उदयपुर. भूपालपुरा के भंडारी चाइल्ड हॉस्पिटल में 19 दिन से भर्ती 11 माह के हर्षित की मौत ने मां सुशीला और पिता उदयलाल के साथ-साथ अड़ोसी-पड़ोसी और रिश्तेदारों को भी स्तब्ध कर दिया है। अस्पताल के बाहर दुखी और क्षुब्ध लोगों की भीड़ जमा है। तीन बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हर्षित की मौत ने मां सुशीला को सदमे में ला दिया है। सुशीला बिलखती है, बेहोश होती है और होश में आती है तो फिर बिलखने लगती है। अभी तो उसने बेटे के मुंह से मां शब्द भी ठीक से नहीं सुना था।

माता- पिता ने डॉक्टरों पर लगाया आरोप

दो बहनों का यह लाड़ला भाई अब इस दुनिया में नहीं है। माता-पिता के आरोप के अनुसार उसे अस्पताल लाए थे तो सिर्फ उसे सिर्फ जुकाम था, लेकिन डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन कर दिया। और तो और मौत के बाद भी भंडारी अस्पताल के बाद डाॅक्टर महंगी दवाएं मंगवाते रहे। लेकिन डॉक्टरों ने भास्कर को बताया कि उन्होंने इलाज सही किया। उनकी कोई गलती नहीं।

जुकाम का इलाज कराने लगाए थे, डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दिया ऑपरेशन

पिता ने रिपोर्ट में बताया कि हर्षित को जुकाम होने पर 13 दिसंबर को भंडारी बाल चिकित्सालय में लाए थे। डॉक्टर ने जांच कर दवाई दी थी। हालात में सुधार नहीं होने पर 18 दिसंबर को फिर लेकर आए। डॉक्टर ने जांच कर ऑपरेशन कराने को कहा। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल में धागा नहीं होने से मोटे धागे से ही डॉक्टरों ने पेट में टांके लगा दिए। इससे बच्चे के टांकों में पस जमा हो गई। 18 दिन बाद गुरुवार को टांके नहीं सूखे तो लापरवाही से स्प्रे छिड़क कर सुखाने की नाकाम कोशिश की। हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बोल दिया कि बच्चे का ब्रेन डैड हो गया है। बच्चे को यहां से ले जाएं। इससे पहले शुक्रवार रात से ही उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हॉस्पिटल के सामने परिजनों के साथ लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। शनिवार सुबह भी काफी संख्या में लोग हॉस्पिटल पहुंच गए थे। भीड़ को देखते हुए ऐहतियात के तौर पर पुलिस ने जाब्ता भी लगाया था।

टांके लगाते समय डाॅक्टर की डिमांड को परिजनों ने गलत सुना : डॉ. भंडारी
भंडारी बाल चिकित्सालय के डॉ. बी भंडारी ने बताया कि शिशु सर्जन ने हर्षित की जांच की। इस दौरान उसके अम्बलाइकल के अंदर आॅब्सट्रक्टिव हर्निया विथ पेरिटोनाइटिस था। इसमें पस और फीकल मेटर मिल जाता है। इस पर उसे सामान्य कंडीशन में लाते हुए सर्जरी के लायक बनाया। सर्जरी में पारदर्शिता रखने के लिए बच्चे की सर्जरी के दौरान इलियोस्टमी के समय परिजनों को थियेटर में बुलाया गया। टांके लगाते समय डाॅक्टर ने वाइक्रील धागे की डिमांड की जिसे जानकारी के अभाव में परिजनों ने गलत सुन लिया। सर्जन ने मेडिकल मापदंडों के अनुसार वाइक्रील टू जीरो सूचर लगाया जो एकदम सही है। यह धागा सभी सर्जरी में काम में लिया जाता है।