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तलवारें थाम सड़कों पर उतरीं महिलाएं, टॉकीज मैनेजर बोले- नहीं दिखाएंगे 'पद्मावत'

महिलाएं हाथों में तलवारें लिए फिल्म निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली के विरोध और पदमिनी के सम्मान में नारे लगा रही थीं

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 11:43 PM IST

चित्तौड़गढ़. विवादित फिल्म पद्मावत के विरोध में रविवार को महिलाओं ने किले के जौहर स्थल से शहर में जौहर भवन तक स्वाभिमान रैली निकाली। रैली का समापन सकारात्मक पहल से हुआ। जब महिलाओं ने सिनेमा हॉल के मैनेजर को राखी बांधी तो बदले में उन्होंने फिल्म नहीं चलाने का संकल्प दिया। पैदल और वाहन सवार महिलाएं हाथों में तलवारें लिए फिल्म निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली के विरोध और पदमिनी के सम्मान में नारे लगा रही थीं। शहर के चंद्रलोक छविगृह पहुंचकर यह फिल्म नहीं चलाने का संकल्प दिलाया। बाद में राष्ट्रपति अौर प्रधानमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन दिया। इसमें फिल्म बैन नहीं होने पर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी।

- जौहर क्षत्राणी मंच के बैनर तले महिलाएं सुबह दस बजे से विजय स्तंभ के पास जौहर स्थल पर एकत्र होने लगीं।

- इसके बाद प. अरविंद भट्ट के मंत्रोच्चार के बीच जौहर हवन कुंड में हवन कर पद्मावत फिल्म को नहीं चलने देने का संकल्प लिया गया।

- डेढ़ बजे महिलाओं की स्वाभिमान रैली शुरू हुई, जिसमें करीब 300 महिलाओं के अलावा 100 से अधिक युवक शामिल थे।

- टॉकीज प्रबंधक सहित कर्मचारियों को बाहर बुलाकर उनको राखी बांधी। भाई बनकर संकल्प लिया कि वे यह फिल्म यहां नहीं चलने देंगे।

बैनर पर टॉकीज की ओर से यह लिखा
- महिलाओं व करणी सेना की ओर से तैयार बैनर भी मुख्य बोर्ड पर टांक दिया। जिसमें लिखा कि मेवाड़ के गौरव का आदर करते हुए पदमावत का चंद्रलोक सिनेमा में प्रदर्शन नहीं होगा।

मेवाड़, मालवा और मारवाड़ से आई महिलाएं
- मेवाड़ के अलावा मध्यप्रदेश व मारवाड़ से भी महिलाएं पहुंची। भीलवाड़ा से महिला जिलाध्यक्ष प्रतिभा चुंडावत और महामंत्री अनिता शक्तावत की अगुवाई में महिलाएं आई।

पदमावती के सम्मान में क्षत्राणियां मैदान में
- प्रदर्शन में दर्जनों महिलाओं के हाथों में तलवारें थीं। कुछ युवतियों ने केसरिया बाना भी पहन रखा था। ज्यादातर महिलाएं पैदल चल रही थी तो कई वाहनों में भी थीं।

इच्छा मृत्यु मांग पर कहा
- सभा स्थल पर ही एसडीएम सुरेश खटीक को जौहर क्षत्राणी मंच जिलाध्यक्ष मंजूश्री बंबोरी, महामंत्री निर्मला राठौड़ आदि 200 महिलाओं का हस्ताक्षरयुक्त इच्छा मृत्यु संबंधी ज्ञापन दिया गया।