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सक्सेस के पीछे मत भागो, काबिल बनो; कामयाबी मिलेगी

उदयपुर में तपोवन आश्रम में ‘विमुक्त शिक्षा’ पर सम्मेलन में लोगों ने साझा किए अनुभव

Bhaskar News | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:43 AM IST

सक्सेस के पीछे मत भागो, काबिल बनो; कामयाबी मिलेगी

उदयपुर. ये देश के ऐसे शिक्षित परिवार हैं जिन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को मानसिक बोझ समझ अपने बच्चों को कभी स्कूल नहीं भेजा। किसी ने हॉवर्ड से पढ़ाई की और यूनेस्को-यूनिसेफ और विश्व बैंक में सेवाएं दी तो कोई अपने शहर का मशहूर डॉक्टर है लेकिन इनके बच्चों ने कभी क्लासरूम-ब्लैकबोर्ड नहीं देखे। न ही इन्होंने कभी बोर्ड परीक्षाओं और पढ़ने-लिखने का अपने बच्चों पर दबाव बनाया। लेकिन खास बात यह है कि ये बच्चे पढ़े-लिखे बच्चों से कम नहीं हैं। अंग्रेजी में बात करते हैं। अपनी रुचि के क्षेत्र में मास्टर हैं। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने बच्चों को प्राथमिक स्तर तक पढ़ाकर स्कूल छुड़वा दिया।

- नयाखेड़ा स्थित तपोवन आश्रम में रविवार से शुरू हुए ‘विमुक्त शिक्षा’ पर चार दिवसीय सम्मेलन में दिल्ली, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, अहमदाबाद और राजस्थान के ऐसे 21 परिवारों का एक दल शामिल हुआ। इन्होंने अभिभावकों को बताया कि सक्सेस के पीछे बच्चों को मत भागने दो। उन्हें काबिल बनने दो और बनाओ। देखना कामयाबी तो दौड़ी चली आएगी।

- उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा किस तरह से बच्चों पर मानसिक तनाव पैदा कर रही है। हालात ये हैं कि कई बच्चे आत्महत्या तक कर लेते हैं। इन परिवारों का कहना है कि वे शिक्षा विरोधी नहीं हैं, लेकिन शिक्षा के अलावा भी बच्चे के सामने और भी कई रास्ते हैं।

मेडिसिन में पीजी हैं भावना, बेटियों को नहीं पढ़ाती हैं

- उदयपुर की भावना त्रिवेदी ने 11 साल की बेटी कश्वी को तीसरी के बाद और सात साल की बेटी यवी को कभी स्कूल ही नहीं भेजा।

- मेडिसिन में पीजी भावना बताती हैं कि जो चीजें बच्चों को पसंद नहीं, वे उन्हें तनाव देती हैं। स्किल्स के साथ जीवन जीने से बच्चा मल्टी टेलेंटेड बनता है। बच्चों के लिए स्कूल पूरी दुनिया नहीं, बल्कि पूरी दुनिया स्कूल हाेनी चाहिए। हम बच्चे की कभी सुनते ही नहीं, खुद ही ये निर्णय करते हैं कि उसे क्या करना है और करवाना है।बेटी कश्वी को ईयरिंग बनाने और पेंट करने का बहुत शौक है। वह स्टॉल्स लगाकर पैसे भी कमाती है।

अहमदाबाद निवासी सुमि ने दो बेटों को कभी स्कूल नहीं भेजा
- अहमदाबाद निवासी सुमि चंद्रेश के दोनों बेटे कुदरत(18)और अजन्म्य(15) कभी स्कूल नहीं गए।

- कुदरत का कहना है कि स्कूल जाने वाला समय दूसरी स्किल्स डेवलप करने में उपयोग किया। कुदरत को सामाजिक मुद्दों और हैरिटेज विषय पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाने का शौक है तो अजन्म्य को फोटोग्राफी का। दोनों को कभी कोई डिग्री-डिप्लोमा की जरूरत नहीं पड़ी। अंग्रेजी की जरूरत महसूस हुई तो साथियों से अंग्रेजी सीख ली। आज अंग्रेजी में बात करते हैं, अंग्रेजी मूवी देखते हैं। दुकान से सामान लेते-लेते हिसाब लगाना भी आ गया।

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Web Title: skses ke pichhe mt bhaagao, kabil bano; kamyaabi milegai
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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