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डाॅक्टरों ने निकाला कैंडल मार्च, दूसरे दिन भी तंबू, पार्किंग में बैठ टटोली नब्ज

शनिवार को ईद मिलादुन्नबी के अवकाश पर मरीजों का सुबह 9 से 11 बजे तक अस्पतालों के बाहर तंबू तानकर और पार्किंग स्पेस में बै

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 07:34 AM IST
Doctors and residents can go on indefinite strike

उदयपुर. राज्य सरकार को अपनी 33 सूत्री मांगें मनवाने के लिए अड़े डॉक्टरों ने विरोध के दूसरे दिन शनिवार को ईद मिलादुन्नबी के अवकाश पर मरीजों का सुबह 9 से 11 बजे तक अस्पतालों के बाहर तंबू तानकर और पार्किंग स्पेस में बैठकर उपचार किया।


डॉक्टरों ने जगह-जगह अपनी मांगों के बैनर ताने, जिनको मरीजों ने भी पढ़ा। अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के 12 डॉक्टरों के ट्रांसफर के बाद भड़के डॉक्टरों का विरोध बढ़ता जा रहा है। गत तीन दिन से रोज रणनीति बनाकर फिर से हड़ताल की जा रही है। रही सही कसर संघ-रेजीडेंट्स यूनियन के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने शाम 7 बजे फतह सागर पाल पर कैंडल मार्च निकालकर आंदोलन का खुलकर आगाज करके पूरी कर दी।सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. एसएल बामनिया और रेजीडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि संघ और आरएनटी मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट्स की बैठक दोपहर 12.30 बजे सेक्टर-14 में हुई। बैठक में तय किया गया कि 72 घंटे के अल्टीमेटम बाद भी रविवार तक मांगें नहीं मानीं तो सभी सेवारत और रेजीडेंट्स डॉक्टर एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि आखिरी निर्णय रविवार को जयपुर में होने वाली कोर कमेटी की बैठक में लिया जाएगा।

अब रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने अपनी मांगों के लिए खोला मोर्चा
सरकार से समझौता होने के बाद भी रेजीडेंट्स डॉक्टरों की 12 में से एक भी मांग पर अमल नहीं किया गया है। जिसका सभी रेजीडेंट्स ने विरोध करने की रणनीति लगभग तय कर ली है। रेजीडेंट्स की कोर कमेटी की सोमवार को होने वाली बैठक में निर्णय होगा।

इन मांगों पर अड़े हुए सेवारत चिकित्सक

- सेवारत चिकित्सक संघ के 12 डॉक्टरों के ट्रांसफर निरस्त किए जाएं।
- हड़ताल के दौरान करीब 30-35 चिकित्सकों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
- हड़ताल पर रहे डॉक्टरों की छुट्टियां दर्ज नहीं की जाएं।
- डॉक्टर की जगह निदेशालय में लगाए अतिरिक्त निदेशक आरएएस अधिकारी को तुरंत हटाया जाए और समझौता-पत्र के तहत मांगी मांगों पर सरकार अभी अमल करे।

रेजीडेंट्स की यह मांगें हैं
- 7वें वेतनमान का लाभ दिया जाए।
- उचित आवास सुविधा मुहैया कराई जाए।
- सप्ताह में एक दिन अवकाश दिया जाए।
-एमबीबीएस के छात्र उपलब्ध होने के बाद भी एमसीआई की गाइडलाइन के मुताबिक एमएससी के छात्रों का चयन रोका जाए।

आज भी कई जगह डॉक्टरों ने खड़े-खड़े ही देखी नब्ज

डॉक्टरों ने दूसरे दिन दो घंटे ओपीडी में जिले की 98 पीएचसी, 28 सीएचसी, 7 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 6 राजकीय चिकित्सालय और 2 सेटेलाइट हॉस्पिटल आने वाले मरीजों को देखा। इनमें से कुछ स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर स्टूल और एक्जामिनेशन स्कॉच नहीं रखने के कारण बेबस मरीजों को खड़े-खड़े ही मर्ज दिखाकर दवा लिखवानी पड़ी। जबकि डॉक्टर खुद टेबल और कुर्सियों पर बैठकर काम करते रहे।

डॉक्टरों को कल सैलेरी की आस, एक सप्ताह की तनख्वाह पर संकट
डॉक्टरों ने 12 चिकित्सकों के स्थानांतरण निरस्त करने, डॉक्टर की जगह निदेशालय में अतिरिक्त निदेशक पद पर लगाए आरएएस अधिकारी गिरीश पाराशर को हटाने, आंदोलन के दौरान करीब 30-35 चिकित्सकों पर दर्ज किए मुकदमें वापस लेने और डॉक्टरों के गत 6 से 12 नवंबर तक हड़ताल पर रहने के कारण संभाग के लगभग 1100 सहित प्रदेश के 10 हजार डॉक्टरों की अटकी तनख्वाह सोमवार को उनके बैंक खातों में आने की पूरी उम्मीद है। लेकिन एक माह की सैलेरी में हड़ताल के एक सप्ताह की सैलेरी मिलना मुश्किल लग रहा है। हालांकि इस एक सप्ताह को छुट्टियों में बदलने की मांग भी की जा रही है।

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