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100 ऑपरेशन टले, नहीं मिल रहा इलाज, मरीज बोले- भर्ती होने में भी लगता है डर

1200 बेड का एमबी लगभग खाली, और बढ़ी आफत : आज निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी एक घंटा करेंगे कार्य बहिष्कार

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 03:13 AM IST
एमबी के मेडिसीन वार्ड में एक मरीज उसको भी देखने कोई डाक्टर नही आया । एमबी के मेडिसीन वार्ड में एक मरीज उसको भी देखने कोई डाक्टर नही आया ।

उदयपुर. सरकार और डॉक्टरों के बीच सहमति नहीं बनने से मरीजों की जान सांसत में आ पड़ी है। 407 रेजीडेंट्स और जिले के 303 सेवारत डॉक्टर लगातार चौथे दिन गुरुवार को भी ड्यूटी पर नहीं आए। संभाग के सबसे बड़े एमबी हॉस्पिटल, जनाना, बाल चिकित्सालय में पिछले तीन दिन में 100 से अधिक ऑपरेशन नहीं हो सके। डॉक्टर नहीं होने से हमेशा फुल रहने वाला 1200 बेड का एमबी हॉस्पिटल लगभग खाली हो गया। गुरुवार को 448 मरीज ही भर्ती रहे जो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं उन्हें भी देखने वाला कोई नहीं था। 150-200 गर्भवती महिलाओं व अन्य को सोनोग्राफी की तारीख 21 से बढ़ाकर 30 दिसंबर कर दी गई है। इधर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सेवारत और रेजीडेंट्स डॉक्टरों की हड़ताल का समर्थन कर मरीजों की आफत बढ़ा दी है।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सुनील चुघ और सचिव डॉ. आनंद गुप्ता ने बताया कि आईएमए के उदयपुर में 750 और प्रदेश में 6000 से ज्यादा डॉक्टर शुक्रवार से सुबह 9 से 10 बजे तक सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्य बहिष्कार करेंगे। सरकार ने 24 घंटे में सभी मांगें नहीं मानीं तो आईएमए के यह सभी डॉक्टर अस्पताल बंदकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। गुरुवार को आईएमए के डॉक्टरों ने कालीपट्टी बांधकर विरोध भी जताया है।

डॉक्टरों ने दर्द से करहाते गंभीर मरीजों को भी दवा देकर रवाना किया

चित्तौडग़ढ़ निवासी 78 वर्षीय माधोगिरी सिर पकड़कर असहाय बैठे दिखे। इतने बीमार थे कि अपना नाम भी पांच बार सांस लेकर बता सके। बताया कि वे सुबह 8 बजे से बैठे हैं। डॉक्टर साहब ने दवा देकर बोला है कि इनसे आराम मिल जाएगा। भर्ती बाद में करेंगे। चित्तौडग़ढ़ निवासी 55 वर्षीय मधुलाल मेडिसिन वार्ड में ऑक्सीजन पर थे। उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब कभी-कभी दिखते हैं। यहां भर्ती रहने में भी डर लग रहा है। यही हालात कार्डियक आईसीयू, मेडिकल, सर्जिकल, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, ट्रोमा, न्यूरोलॉजी, इमरजेंसी विंग, इमरजेंसी आईसीयू में भर्ती 250 से ज्यादा मरीजों का था।

संभाग भर से आईं गर्भवती महिलाओं को भी जांच के लिए 10 दिन बाद बुलाया

चित्तौड़गढ़ निवासी 32 वर्षीय सीमा, बांसवाड़ा निवासी 21 वर्षीय पूजा व अन्य ने बताया कि उनके यहां भी डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मुश्किल से यहां आई थी लेकिन आने पर पता चला कि यहां भी डॉक्टर नहीं हैं। अब 10 दिन तारीख बढ़ा दी गई है। तीमारदार बीमारों को निजी अस्पतालों में ले जाते दिखे तो कई गंभीर बीमार इलाज के इंतजार में घंटों तड़पते बैठे रहे। 100 डॉक्टरों के भरोसे पूरा अस्पताल रहा। विशेषज्ञ डॉक्टर राउंड लेने के बाद ऑन कॉल रहे। आईसीयू और वार्डों में भर्ती गंभीर मरीजों और तीमारदारों को दिनभर सांसें अटकी रहीं। कई मरीज को घबरा कर हॉस्पिटल से दूसरे अस्पतालों के लिए निकल लिए।