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चिकित्सा सेवाओं का स्वास्थ्य बिगड़ा, जिले के 350 में से 288 सरकारी डॉक्टर रहे हड़ताल पर

हड़ताल पर रहने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गई।

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 07:01 AM IST

उदयपुर. जिले के 350 सरकारी डॉक्टरों में से 288 शुक्रवार को सामूहिक अवकाश पर रहे, लेकिन 62 डॉक्टरों ने सेवारत चिकित्सा संघ के आह्वान को न मानते हुए अपनी ड्यूटी निभाई। रेस्मा में कार्रवाई का दावा करने वाले प्रशासन ने एक भी डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं की है। संघ का दावा है कि संभाग करीब 1400 से अधिक डॉक्टर हड़ताल पर गए हैं। हड़ताल पर रहने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गई। ऐसे में मरीजों ने सीएचसी और जिला अस्पताल पहुंचे से परहेज किया, जो सीधे एमबी हॉस्पिटल और निजी अस्पताल पहुंचे।

चांदपोल और हिरणमगरी जैसे बड़े सेटेलाइट हॉस्पिटल भी 1-1 पीएमओ डॉक्टर के भरोसे चले। इससे मरीजों को काफी देर तक लाइन में लगना पड़ा। सेवारत डॉक्टरों के समर्थन में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने एमबी हॉस्पिटल परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. एके वर्मा ने बताया कि आरएनटी के सिर्फ 6 डॉक्टर ही अवकाश पर रहे, शेष सभी ने काम किया।


एक-एक पीएमओ के भरोसे चले सेटेलाइट अस्पताल : चांदपोल-सेटेलाइट हॉस्पिटल 1-1 पीएमआे डॉक्टर की मौजूदगी में चलाए गए, क्योंकि सेवारत डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहे। भर्ती मरीजों को एमबी में रैफर करने की नौबत नहीं आने दी।

यह थी वैकल्पिक व्यवस्था : 71 आयुष सहित 15 डॉक्टर लगाए

डिप्टी सीएमएचओ डॉ. राघवेंद्र राय ने बताया कि जिले के 310 में से 253 डॉक्टर और शहर के 40 में से 35 डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहने की सूचना है। वैकल्पिक तौर पर 71 आयुष डॉक्टरों सहित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 15 डॉक्टर स्वास्थ्य केंद्रों पर लगाए थे।

आज क्या : तंबू में देखेंगे मरीज, दो दिन बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल

अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. एसएल बामनिया ने बताया कि सभी 1450 डॉक्टर अपनी मांगें मनवाने शनिवार को भी सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर तंबू तानकर ही मरीजों को देखेंगे। फिर भी सरकार दो दिन में मांगें नहीं मानती है तो कोर कमेटी की बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की रणनीति तय की जाएगी।

जिले में ऐसे रहे स्वास्थ्य केंद्रों के हाल... झल्लारा में शिविर टला, बैरंग लौटे दिव्यांग

झल्लारा | पंडित दीनदयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन प्रमाणीकरण शिविर में चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से निरस्त हो गया। शिविर में पंचायत समिति क्षेत्र की 22 पंचायतें शामिल थी। शिविर को लेकर शुक्रवार की सुबह पीएचसी परिसर में सभी व्यवस्था भी की गई थी। शिविर में भाग लेने के लिए झल्लारा से 20 किमी दूर बनोड़ा, मानपुर, जोधपुर खुर्द, घटेड़, धावड़ा से दिव्यांग पहुंचे थे, जिनको बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। नवंबर माह में भी शिविर हड़ताल से निरस्त हो गया था।

बड़गांव में पांचों डॉक्टरों ने की ड्यूटी

बड़गांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी पांचों डॉक्टर ड्यूटी पर रहे। यहां बच्चों को निशुल्क कपड़े भी बांटे। डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि हड़ताल को लेकर डॉक्टर असमंजस में रहे। निर्णय आम सभा बुलाकर नहीं लिए जा रहे हैं।

गोगुंदा में प्राइवेट डाॅक्टर ने किया इलाज, खेरवाड़ा में भी नहीं आए डॉक्टर
गोगुंदा. मरीज 11 बजे तक अस्पताल में बैठे रहे। इसके बाद पेसिफिक हॉस्पिटल से आए डॉक्टर ने मरीजों का उपचार किया। वहीं लैब टेक्नीशियनों के भी हड़ताल पर से जांच नहीं हो सकी। खेरवाड़ा अस्पताल में भी सभी डॉक्टर अवकाश पर रहे।