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पद्मावत से भी 15 साल पुरानी किताब है 'छताई चरित्र', जिसमें है रानी पद्मिनी की गाथा

फिल्म का नाम पद्मावत कर 25 को रिलीज करने पर बिफरे इतिहासकार

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 06:25 AM IST
historians express resentment over padmavati or padmavat

उदयपुर. केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने रिव्यू कमेटी के कड़े विरोध के बाद अब फिल्म पद्मावती को ‘पद्मावत’ नाम से 25 दिसंबर को रिलीज करने को लेकर मेवाड़ में फिर आक्रोश उबाल पर है। फिल्म को अब काल्पनिक काव्य पद्मावत की आड़ में रिलीज करने को लेकर मेवाड़ सहित देश के कई प्रसिद्ध इतिहासकारों ने आक्रोश जताया है।

- सीबीएफसी की रिव्यू कमेटी के सदस्य और दिल्ली के प्रसिद्ध इतिहासविद् प्रो. कपिल कुमार ने पद्मावत को मेवाड़ के इतिहास की प्रमुख पुस्तक वीर विनोद, उदयपुर राज्य का इतिहास, द एनाल्स एंड एंटीक्वीटीज ऑफ राजस्थान से भी पुराना बताकर फिल्म रिलीज के सवाल पर कहा है कि, ‘भारत या उसके भाग मेवाड़ का इतिहास भी ठीक वैसे ही लिखा गया है जैसे अन्य देशों का लिखा गया है। मेवाड़ के इस पवित्र इतिहास पर मेरी फिल्म वालों यानी संजय लीला भंसाली को फिर खुली चुनौती है कि जब चाहें तब बहस के लिए सामने आ जाएं’।

- उन्होंने यह भी दो टूक कहा है कि अगर यह फिल्म रिलीज होती है तो देश में आग लगा देगी।

छताई चरित्र

- वहीं, मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासविद प्रो. कृष्णस्वरूप गुप्ता बताते हैं कि जायसी के काल्पनिक काव्य पद्मावत से भी करीब 15 साल पहले 1526 में सलहदी तोमर शासक के दरबार में लिखी पुस्तक ‘छताई चरित्र’ में भी चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी का उल्लेख है। जबकि जायसी के पद्मावत में 1303 के जौहर से जुड़ी रानी पद्मिनी, महारावल रत्नसिंह, रानी पद्मिनी, अलाउद्दीन खिलजी, गौरा-बादल के बारे में कल्पनाएं लिख दी गईं। जबकि यह सभी ऐतिहासिक पात्र हैं। ऐसे में ऐतिहासिक पात्रों के नाम पर काल्पनिक फिल्मांकन पूरी तरह गलत है।

अगर चित्तौड़ हमले का कारण पद्मिनी होती तो खिलजी के दो इतिहासकार कहीं तो लिखते : डॉ शर्मा

- विजेता प्रताप पुस्तक के लेखक डॉ. चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि अलाउद्दीन खिलजी के समकालीन इतिहासकार और राजनैतिक विचारक जियाउद्दीन बरनी ने खिलजी के 1299 में गुजरात राज्य पर आक्रमण का कारण वहां की महारानी कमला देवी और उनकी पुत्री देवल देवी को प्राप्त करना बताया है। अगर चित्तौड़ आक्रमण का कारण रानी पद्मिनी होती तो बरनी इसका भी जिक्र करते।

- इसके अलावा 1303 में अल्लाउद्दीन के चित्तौड़ हमले में सेना के साथ आए लेखक अमीर खुसरों ने इस युद्ध का अपनी पुस्तक खजाइन-उल-फतूह और तरीकब उल इलाही में वर्णन किया है। लेकिन कहीं भी युद्ध का कारण मेवाड़ की महारानी पद्मिनी को नहीं बताया।

- लेखक: पुस्तक : पांडुलिपि लेखन वर्ष
- अमीर खुशरो : खजाइन-उल-फतूह (सन 1312-15)
- हरिभद्र सुरी : छताई चरित्र : (सन 1526)
- मलिक मोहम्मद जायसी : पद्मावत : (सन 1540)
- वीर विनोद : कवि राजा श्यामल दास : (सन 1874-84)
- द एनाल्स एंड एंटीक्वीटीज आफ राजस्थान : कर्नल जेम्स टॉड : (1829-32)
- उदयपुर राज्य का इतिहास : गौरीशंकर हीराचंद ओझा : (सन 1928-32)
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