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8 साल में बनी देश की सबसे लंबी डॉक्यूमेंट्री फिल्म, पूर्व राजपरिवार से है नाता

पूर्व राज परिवार के शिवेंद्र सिंह ने बनाई 420 मिनट की ‘चेकमेट इन्सर्च ऑफ जीरी मेंजल’ डॉक्यूमेंट्री फिल्म

राजेंद्र सिंह झाला | Last Modified - Jan 08, 2018, 08:24 AM IST

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    उदयपुर. फिल्मकार, फिल्म संरक्षक और डूंगरपुर के पूर्व राजपरिवार से जुड़े शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर ने यूरोपीय देशों के 60 के दशक में आए फिल्म जगत के परिवर्तन पर आधारित घटनाओं पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है। जिसका नाम ‘चेकमेट इन्सर्च ऑफ जीरी मेंजल’ है। यह फिल्म 7 घंटे की है, और इसका निर्माण पिछले 8 वर्षों चल रहा था। इस फिल्म को इसी साल तीन जनवरी को केन्द्रीय फिल्म सेंसर से सर्टिफिकेट भी मिल चुका है।

    - फिल्म के बारे मे जानकारी देते हुए शिवेंद्र सिंह ने बताया कि पुणे फिल्म संस्थान मे उन्होंने फिल्मकार जीरी मेंजिल की पहली फिल्म ‘क्लोस्ली वॉच्ड’ ट्रेन देखी थी।

    - इसके बाद 2010 में जब वे अपनी संस्था टफिल्म हेरिटेज फाउंडेशन’ के प्रोजेक्ट्स को लेकर यूरोपीय दौरे पर थे, तब उन्हें इस विषय पर फिल्म बनाने का आइडिया आया।

    - शिवेंद्र सिंह ने बताया कि इस फिल्म के निर्माण के दौरान उन्होंने विश्व के प्रसिद्ध 85 से ज्यादा फिल्मकारों और इतिहासकारों के इंटरव्यू किए। जिसमें वूडी एलन, केन लोच, इमिर कुस्तुरिका, रौल को उतार्ड, इस्त्व स्जाबों और अंद्रेजेज वाजदा जैसे नाम शामिल हैं।

    275 मिनट की थावामई थावामिर्न्दा अब दूसरे नंबर पर

    - भारतीय फिल्म उद्योग में सबसे लंबी फिल्म बनाने के क्रम में चेरन की थावामई थावामिर्न्दा (275 मिनट), एंटी रामाराव कि दाना वीरा सूरा करना (257 मिनट), राजकपूर कि मेरा नाम जोकर (244 मिनट), जेपी दत्ता कि एलओसी कारगिल (255 मिनट), लगान (224 मिनट), और जोधा अकबर (214 मिनट) और इस फिल्म का समय 420 मिनट का है। जो देश में अब तक बनी फिल्मों में सबसे ज्यादा है।

    - यह निर्माण फिल्म संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही फिल्म इंडस्ट्री के विद्यार्थियों को सीखने के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।

    - इस फिल्म के विषय से प्रेरित होकर प्रसिद्ध फिल्मकार क्रिस्टोफर नोलन ने शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर से संपर्क कर 30 मार्च को उनकी संस्था “फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन’ का अवलोकन करने का मन बना लिया है।

    सेलूलाइड मैन को मिला था राष्ट्रपति पुरस्कार

    - 420 मिनट कि इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म से पहले शिवेंद्र सिंह ने फिल्म संरक्षण पर काम करने वाले पीके नायर पर जीवन “सेलूलाइड मैन’ और “इमोर्तल’ जैसी फिल्में भी बना चुके हैं। इसमें से सेलूलाइड मैन को 2012 मे राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था।

    - इसके अलावा इन दोनों फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में 50 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं।

    - शिवेंद्र के संस्थान से अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी, विदु विनोद चौपड़ा, कमल हासन के अलावा कई बड़े फिल्म निर्माता और निर्देशक जुड़े हुए हैं। वे अब तक पांच सौ से ज्यादा एड फिल्में भी बना चुके हैं।

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