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किडनी दान दी, फैमिली को 20 साल बाद बताया; अब लिया देहदान का संकल्प

ये अपनी एक किडनी दान कर चुके हैं और परिवार वालों को यह रहस्य 20 साल बाद बताया।

Dainik Bhaskar

Mar 05, 2018, 06:46 AM IST
Interesting and passionable story of former soldier choudhary parma ram

उदयपुर. ये अनूठे दानी हैं। सैनिक का जज्बा सिर्फ मोर्चे पर तैनात रहने तक सीमित नहीं होता। यही साबित कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के चौधरी परमा राम। सेना में बरसों की सर्विस के बाद घर वापसी हुई तो समाज सेवा शुरू की। फिलहाल उनके कामों की फेहरिस्त काफी लंबी है। ये अपनी एक किडनी दान कर चुके हैं और परिवार वालों को यह रहस्य 20 साल बाद बताया। वे अब देहदान करने का संकल्प ले चुके हैं। बेटे के नाम वसीयत में उन्होंने यही अंतिम इच्छा बताई है। हाल ही किसान सम्मेलन में शामिल होने आए चौधरी परमा राम से दैनिक भास्कर ने उनके कामों और मकसद पर बातचीत की। दिलचस्प और जज्बे से भरी अनूठी कहानी सामने आई।

- किस्सा ये कि चौधरी सेना में सिपाही थे। साल 1996 में शिमला में बेटी बीमार हो गईं। उससे मिलने हॉस्पिटल पहुंचे। वहां पता चला कि वहां एक मरीज की दोनों किडनी खराब हैं और उसे कहीं से भी मदद नहीं मिल पा रही है। चौधरी डाॅक्टर से मिले और पहचान छिपाने की शर्त के साथ अपनी किडनी दान कर दी।

- घरवालों को 2017 में बताया कि वे अपनी एक किडनी दान कर चुके हैं और अब देहदान करना चाहते हैं। किडनी देने का पता लगने पर बेटा चौंका, लेकिन देहदान पर राजी नहीं हुआ। चौधरी बोले, मेरी यही अंतिम इच्छा है। हालांकि शुरुआती प्रतिरोध के बाद परिवार भी अब सहमति दे चुका है।

अपने स्कूल में गरीब बच्चों को मुफ्त दे रहे शिक्षा

- चौधरी परमा राम ने हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए बाइक ट्रैक्टर बनाया था। इससे किसानों को छोटे और पहाड़ी क्षेत्र के खेतों की जुताई में काफी सुविधा मिला। जो किसान ट्रैक्टर नहीं खरीद सकते थे, उनके लिए बाइक ट्रैक्टर सस्ता और सुलभ भी रहा। इसके लिए चौधरी को गुजरात में सरकार ने पुरस्कार दिया था।

- इससे पहले उन्होंने 1997 में हिमाचल में लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल हाई स्कूल की शुरुआत की, जहां स्लम एरिया के गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन देते हैं। इन बच्चों के लिए स्टेशनरी से लेकर पढ़ाई से जुड़ी हर चीज मुफ्त है। यह स्कूल 26 बच्चों से शुरू हुआ था, आज इसमें 350 बच्चे पढ़ते हैं।

रेसलिंग भी सिखाते हैं
साल 2002 में सरकार ने चौधरी को कनसा चौक में जमीन दी थी। अब इस जगह वह बच्चों को रेसलिंग सिखाते हैं। ट्रेनिंग के साथ बच्चों को पौष्टिक खाना भी देते हैं।

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