उदयपुर

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इस बार राजस्थान सरकार के कैलेंडर में मेवाड़ की झीलों की महिमा

इसमें राज्य की प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह की झीलें, शामिल की गई हैं।

Danik Bhaskar

Jan 17, 2018, 06:47 AM IST

उदयपुर. राजस्थान केंद्रीय मुद्रणालय में प्रकाशित राजस्थान सरकार के वार्षिक कैलेंडर में इस बार मेवाड़ सहित प्रदेश की झीलों को अहमियत दी गई है। इसमें उदयपुर की पांच झीलों सहित मेवाड़ की प्रमुख झीलें भी शामिल है। कैलेंडर में जलसंरक्षण के पारंपरिक स्रोतों की अहमियत बताई गई है।

- इसमें बताया गया है कि जल संरक्षण राजस्थान की परंपरा में समाहित है। यहां जल स्रोत धार्मिक आस्था से बंधे हैं। कैलेंडर के प्रत्येक माह के पेज पर एक झील का फोटो और उसका संक्षिप्त इतिहास और महत्व दर्शाया गया है। इनमें पीछोला-फतहसागर सहित मेवाड़ की नौ झीलों को शामिल किया गया है।

- कैलेंडर में बताया गया है कि राजस्थान की झीलें यहां की अनमोल विरासत हैं। ये सभी झीलें इतनी रमणीय हैं कि इनमें चांद से भी ज्यादा सुंदर उसका प्रतिबिंब दिखता है। इसमें राज्य की प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह की झीलें, शामिल की गई हैं।

उदयपुर की झीलों का जलतंत्र विश्व भर में अनूठा
उदयपुर शहर में स्थित झीलों का जलतंत्र विश्व भर में अनूठा है। शहर में स्थित पीछोला-कुम्हारिया तालाब-रंग सागर और स्वरूप सागर सीधे तौर पर आपस में जुड़ी हुई झीलें है,जबकि पीछोला-फतहसागर लिंक नहर से और पीछोला-गोवर्धन सागर खुली नहर से आपस में जुड़े हैं। इन झीलों का पानी एक झील से दूसरी झील में प्राकृतिक प्रवाह से आसानी से आ सकता है। इधर जयसमंद झील एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है। इसमें 9 नदियों और 99 नालों का पानी समाहित करने की क्षमता है।

राजस्थान की इन झीलों को भी कैलेंडर में मिली जगह

नक्की झील (माउंट आबू), सिलीसेढ़ झील (अलवर), पुष्कर झील, आना सागर ,फाई सागर (अजमेर), सांभर झील (जयपुर), बडाेपल झील, गजनेर झील (बीकानेर), गडसीसर झील (जैसलमेर),पचभद्रा झील (बाड़मेर), काडिला एवं मानसरोवर झील (झालावाड़),बुड्डा जोहड़ झील (गंगानगर), सरदार समंद झील, कायलाना झील, बालसमंद (जोधपुर), जयसमंद (अलवर), कोलायत झील (बीकानेर), रानीसर-पद्मसर (मेहरानगढ़ के पास),मानसागर (जयपुर-आमेर मार्ग पर ),नवल सागर झील, जैतसागर,दुगारी झील (बूंदी) और किशोर सागर (कोटा)।

मेवाड़ की इन झीलों का महत्व और इतिहास
जयसमंद, फतहसागर, पीछोला और इससे जुड़ी झीलें, उदयसागर और बड़ी तालाब (उदयपुर), राजसमंद झील (राजसमंद), गेप सागर (डूंगरपुर), आनंद सागर और डायलाब तालाब (बांसवाड़ा)।

कैलेंडर में ऐसी कहावतें भी

घी ढुल्यां म्हारा की नीं जासी, पानी ढुल्यां म्हारो जी बले ।। अर्थ : घी बह जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन पानी कहीं व्यर्थ बह गया तो बड़ा नुकसान माना जाता है।

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