--Advertisement--

गायों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए 150 बीघा का फार्म हाउस, रोजाना Rs.1 लाख खर्च

गोसेवा की पहल: 150 बीघा में बोई हाथी घास, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, गोपाल गोशाला में हैं 2 हजार गाय

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 01:31 AM IST
one lakh rupees per day spent to increase hemoglobin in cows

सांवलियाजी/चित्तौड़गढ़. सांवलिया सेठ का विग्रह विष्णु स्वरूप है पर उनकी सेवा-पूजा गोपाल कृष्ण के रूप में होती है। इसी रूप में वे यहां करीब दाे हजार गायों को भी पाल रहे हैं। करीब 75 बीघा की गोशाला से लगता मंदिर का 150 बीघा का फार्म हाउस गोवंश को ही समर्पित है। जिसमें मैथी-घास, ज्वार व बाजरा के साथ अब हाथी घास भी बोई गई है, जो गायों का हीमोग्लोबिन बढ़ाती है।

- गोसेवा में करीब 100 कर्मचारी तैनात हैं। गोशाला का कुल खर्च सालाना चार करोड़ यानी प्रतिदिन एक लाख रुपए से अधिक है।

- वर्ष 1985 में 11 गायों से शुरू हुई इस गोशाला में अब दो हजार गायें हैं। इनमें से मात्र 100 गायें दुधारू हैं। उनसे भी दो क्विंटल दूध ही निकाला जाता है। बाकी बछड़ों को पिला दिया जाता है।

- छह साल पहले नियुक्त गोशाला प्रभारी कालूलाल तेली ने बुवाई का रकबा 50 से बढाकर 150 बीघा तक पहुंचाया। हाथी घास बोने का प्रयोग सफल रहा। इसमें रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता अधिक होती है।

-गायें दूध भी अधिक देती है। इस तरह के नवाचार के कारण गोशाला और प्रभारी कालूलाल तेली को जिलास्तरीय समारोहों के साथ मंदिर मंडल भी सम्मानित कर चुका है।

गोशाला क्षेत्र में लगाए 1100 पौधे, गायों की बेहतरी के लिए और प्रयास भी
- खेती जैविक खाद से, गोकुल जैसा वन क्षेत्र बनेगा: फव्वारा सिंचाई पद्धति में 30 बीघा में रेनगन से सिंचाई लाइन को आगे बढाया जा रहा है। खेतों में रासायनिक खाद की जगह गोशाला में निर्मित जैविक खाद का ही उपयोग हो रहा है। गोशाला को गोकुल वन क्षेत्र जैसा बनाया रहा है। करीब 225 बीघा भूमि में चारदीवारी के साथ करीब 1100 पौधे लगाए हैं।

भगवान का दोपहर फलाहार भी यहीं से

- गोशाला के खेत में आम, अमरूद, अनार, जामुन, संतरा, चीकू व बेर जैसे पौधे लगाए गए, ताकि भगवान सांवलियाजी के दोपहर के फलाहार भोग में ताजा व शुद्ध फल मिलें।

- चकरा नींबू व आंवला जैसे औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं। गायों में नस्ल सुधार चल रहा है। छंटनी करके गिर नस्ल तैयार की जा रही है। वर्तमान में 100 मादा गायें है।

मृत्यु दर में भी कमी

- गोशाला में आने वाली अधिकांश गायें उपेक्षित या बीमार ही होती हैं। बीमार गायों की विशेष वार्ड में देखभाल होने से दवा के खर्च तथा गायों की मृत्युदर में भी कमी आई है।

- कोई पालने के लिए गाय ले जाना चाहे तो उसे 1100 रुपए में गाय दी भी जा रही है। बेहतर पालन के लिए मंदिर मंडल द्वारा निरीक्षण के अधिकार सहित पंचायत से प्रमाणीकरण कराया जाता है।

एक्सपर्ट व्यू
एलीफेंट ग्रास यानी हाथी घास की खेती फिलिपींस से शुरू हुई और आज अफ्रीका, यूएस और एशिया में भी होने लगी। इसकी न्यूट्रीशियन वैल्यू अच्छी होने से पशुओं को अत्यधिक लाभ मिलता है। यह तेजी से बढ़ती भी है। प्रत्येक साइलेज यानी 100 ग्राम में 10.9 ग्राम पानी, 8.2 ग्राम प्रोटीन, 1.8 ग्राम वसा, 68.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.34 ग्राम फाइबर व 15.9 ग्राम ऐश की मात्रा होने से स्वास्थ्य की दृष्टि से अति पौष्टिक है। सुखाकर इसकी न्यूट्रीशिनल वैल्यू और बढ़ाई जा सकती है। इसकी एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण पशुओं की बीमारियों से लड़ने की क्षमता यानी हीमोग्लोबिन बढ़ता है। घाव भरने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए पशुओं खासकर गायों के लिए अति उत्तम आहार है।

- इम्तियाज अली, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी

हाथी घास: एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है, पौष्टिक भी है
इस घास के लिए बुआई एरिया लगातार बढ़ा रहे हैं। किसानों को भी बीजवारा दिया जा रहा है, ताकि वे अपने पशुओं के लिए लाभ ले सकें। किसान खुद भी इसे बोने लगे हैं। गोशाला में नए टीनशेड, सीसी रोड व लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, शौचालय, भोजन शेड बनाने की मांग कर रखी है। परिसर व मार्ग में गोप-ग्वालों व गायों की छवियां एवं मूर्तियां लगाने का भी सुझाव है।
- कालूलाल तेली, गोशाला प्रभारी

X
one lakh rupees per day spent to increase hemoglobin in cows
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..