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'राजपूतों की हद से ज्यादा तारीफ और मुस्लिम विरोधी डायलॉग बिगाड़ सकते हैं माहौल'

पद्मावती फिल्म राजपूतों के साथ-साथ मुस्लिमों का निरादर करने वाली भी, इसे रिलीज करना कतई उचित नहीं : अरविंद सिंह

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 05:04 AM IST
मेवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े अरविंद सिंह मेवाड़ ने भास्कर को बताया कि फिल्म देखने के बाद मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। लेकिन बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलकर और कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया। मेवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े अरविंद सिंह मेवाड़ ने भास्कर को बताया कि फिल्म देखने के बाद मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। लेकिन बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलकर और कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया।

उदयपुर. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने भले ही कुछ बदलाव के साथ फिल्म पद्मावती को हरी झंडी दे दी है लेकिन मेवाड़ राजघराने ने फिल्म को पूरी तरह से नकार दिया है। रिव्यू कमेटी में शामिल रहे मेवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े अरविंद सिंह मेवाड़ ने भास्कर को बताया कि फिल्म देखने के बाद मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की, लेकिन बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलकर और कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया।

- मेवाड़ ने बताया कि फिल्म ऐसी है कि नाम बदलने के बाद भी हिंदू-मुस्लिमों में झगड़ा-फसाद होने की संभावना है।

- रिव्यू कमेटी में मेवाड़ राजघराने के अरविंद सिंह मेवाड़, इग्नू विवि दिल्ली के प्रो. केके सिंह और जयपुर से चंद्रमणि सिंह शामिल थे।

- बताया जा रहा है कि असहमति के बाद भी फिल्म को रिलीज करने के निर्णय में मुख्य भूमिका सीबीएफसी चेयरमैन प्रसून जोशी की रही।

- अरविंद सिंह ने बताया कि फिल्म में राजपूतों का ही अनादर नहीं, बल्कि मुस्लिमों का भी अनादर दिखाया गया है।

जायसी के पद्मावत पर फिल्म, तो नाम पद्मावत

- फिल्म का नाम पद्मावती से पद्मावत करने के पीछे काल्पनिक काव्य पद्मावत वजह मानी जा रहा है।

- जायसी के काल्पनिक पद्मावत के आधार पर फिल्म बनाई गई है, इसलिए इसका नाम बदला गया, मगर मेवाड़ ने जायसी के पद्मावत को भी यह कहकर नकारा कि मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत को 1540 में लिखा था। जबकि पद्मावती के जौहर से जुड़ी घटना 1303 की है।

पर्दे के पीछे की कुछ ताकतें देश में तमाशा कराने पर आमादा हैं : महेंद्र सिंह मेवाड़ पर्दे के पीछे की कुछ ताकतें देश में तमाशा कराने पर आमादा हैं : महेंद्र सिंह मेवाड़

मेवाड़ के पूर्व राजघराने से ही जुड़े पूर्व महाराणा महेन्द्र सिंह मेवाड़ ने भी बोर्ड के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा है कि फिल्म किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। पर्दे के पीछे की कुछ ताकतें देश में तमाशा कराने पर आमादा हैं जो फिल्म को प्रदर्शित कर हिंदू-मुस्लिमों के बीच नफरत के बीज बोने का काम करेंगी। फिल्म में डायलॉग हिंदू-मुस्लिमों को भड़काने वाले और राजपूतों की हद से ज्यादा तारीफ कर उन्हें मुस्लिम विरोधी बताने वाले हैं। ऐसा लगता है कि अन्य जगहों की तरह मेवाड़ में भी सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ेंगे। 

मेरे परिवार पर बनी है फिल्म, कट लगाने से नहीं बदलेंगे पूर्वजों के नाम : विश्वराज सिंह मेरे परिवार पर बनी है फिल्म, कट लगाने से नहीं बदलेंगे पूर्वजों के नाम : विश्वराज सिंह

महेन्द्र सिंह मेवाड़ के पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ ने शनिवार को ही सीबीएफसी को पत्र लिखकर कहा है कि फिल्म का नाम पद्मावती से बदलकर पद्मावत करने, 26 कट लगाने और घूमर गाने को बदलना मृगतृष्णा है, क्योंकि फिल्म से जोड़े गए उनके पूर्वज और ऐतिहासिक स्थान तो वही दिखेंगे। वैसे भी जग जाहिर है कि पद्मावती मेरे परिवार पर बनी फिल्म है।

 

उन्होंने सीबीएफसी चेयरमैन प्रसून जोशी से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि जब उन्हें फिल्म की रिव्यू कमेटी के लिए बुलाया गया तो फिर ऐसे कैसे गुपचुप रिव्यू कमेटी की मीटिंग कर निर्णय ले लिया गया।

बदलावों की इस पेशकश में कई सकारात्मक संकेत भी : लक्ष्यराज बदलावों की इस पेशकश में कई सकारात्मक संकेत भी : लक्ष्यराज

मेवाड़ पूर्व राजघराने से जुड़े और अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा है कि फिल्म में नाम के बदलाव और इसके दृश्यों की काटछांट की पेशकश में कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। इन संकेतों के आधार पर इस फिल्म को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को हल किया जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी मेवाड़ ने कहा था कि रानी पद्मिनी जैसी पवित्र और गौरवपूर्ण नारी को इस तरह किसी विवादास्पद फिल्म का विषय बनाया जा सकता है? मनोरंजन के नाम पर इतिहास से छेड़छाड़ उचित नहीं। 

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मेवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े अरविंद सिंह मेवाड़ ने भास्कर को बताया कि फिल्म देखने के बाद मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। लेकिन बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलकर और कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया।मेवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े अरविंद सिंह मेवाड़ ने भास्कर को बताया कि फिल्म देखने के बाद मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। लेकिन बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलकर और कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया।
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