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परिजन बोले- गलत इंजेक्शन से शिशु का पैर खराब कर दिया, हॉस्पिटल में हंगामा

एमबी के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल बोले-राहत अस्पताल मेरा नहीं है, इलाज भी मैं नहीं कर रहा था

Bhaskar News | Last Modified - Dec 10, 2017, 06:25 AM IST

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    उदयपुर. मधुबन स्थित राहत हॉस्पिटल में 11 दिन की नवजात बच्ची के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए शनिवार को परिजनों सहित अन्य ने तोड़फोड़ कर दी। दोपहर साढ़े 12 बजे कुछ युवकों ने डाक्टर रूम, रिसेप्शन, वेटिंग एरिया और मेडिकल स्टोर में जबरदस्त तोड़फोड़ करते हुए स्लाइडिंग गेट, पार्टिशंस सहित एलईडी टीवी और कंप्यूटर तोड़ डाला। आधा घंटा जमकर हंगामा किया।

    इसके बाद हाथीपोल पुलिस और कंट्रोल रूम से जाब्ते सहित डिप्टी गोपाल सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हंगामा मचा रहे युवकाें को बाहर निकाला और कुछ लोगों को हाथीपोल थाना ले गई। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और नवजात बच्ची के पिता ने हाथीपोल थाने में एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई है।

    बच्ची के पिता निर्भय सिंह ने रिपोर्ट में राहत अस्पताल में बच्ची का इलाज करने वाले एमबी अस्पताल के कार्यवाहक अधीक्षक डाॅ. लाखन पोसवाल सहित डाॅ. सुरेश धाकड़ और डाॅ. देवेंद्र के खिलाफ इलाज में लापरवाही करने का नामजद आरोप लगाया है।

    रिपोर्ट में बताया कि गलत इंजेक्शन से बच्ची के पांव में गैंगरीन होकर काला पड़ गया है। डॉक्टरों से कई बार पूछने पर उन्होंने न तो हालत की जानकारी दी और न ही आईसीयू में देखने दिया था।

    इधर राहत अस्पताल के निदेशक डाॅ. अरविंदर सिंह ने रिपोर्ट में शिशु के परिजनाें सहित अन्य पर एक महिला डाक्टर और कंपाउंडर को पीटने, तोड़फोड़ करने और रिसेप्शन काउंटर से रुपए लूटने का आरोप लगाया।

    अस्पताल प्रबंधन : प्री मेच्योर डिलीवरी थी, हमारी कोई गलती नहीं

    राहत अस्पताल के निदेशक डाॅ. अरविंदर सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि सेक्टर 14 सवीना निवासी निर्भय सिंह की पत्नी पायल के 29 नवंबर को कल्पना नर्सिंग होम में 26 वें सप्ताह में प्री मेच्योर डिलीवरी हुई थी। बच्ची की हालत जन्म से ही नाजुक थी। वजन भी 700 ग्राम था। नवजात को उसी दिन राहत अस्पताल में लाए थे। तभी से बच्ची वेंटिलेटर पर थी। शनिवार सुबह माता-पिता ने बच्चे को एमबी अस्पताल में शिफ्ट करने को कहा। रिपोर्ट के मुताबिक 50 हजार का बिल बना था। शनिवार का शुल्क 5 हजार कम कर दिया गया। उन्होंने 45 हजार रुपए जमा करा दिए थे। रसीद और डिस्चार्ज टिकट लेकर वे बच्चे को एमबी अस्पताल के बाल चिकित्सालय की नर्सरी में ले गए थे। हमारे अस्पताल का स्टाफ एंबुलेंस के साथ एमबी अस्पताल गया। थोड़ी देर बाद शिशु की माता पिता कुछ रिश्तेदार के साथ हॉस्पिटल आकर हंगामा मचाने लगे। उन्होंने फोन कर कई युवकों को बुला लिया था। इन्होंने डॉक्टर पूजा चंडोलिया के साथ हाथापाई की। बीच बचाव के लिए आए नर्सिंग हैड रियाज की भी पिटाई कर दी। आरोप है ये अस्पताल में तोड़फोड़ कर रिसेप्शनिस्ट विद्या पालीवाल से कैश छीन कर ले गए।

    परिजन : गलत इंजेक्शन से पांव में हो गया गैंगरीन, हमें बच्ची को आईसीयू में देखने तक नहीं दिया

    सवीना सेक्टर 14 खेड़ा निवासी निर्भय सिंह देवड़ा ने पुलिस में राहत हॉस्पिटल और कल्पना नर्सिंग होम के खिलाफ रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में राहत अस्पताल में इलाज करने वाले डाॅ. लाखन पोसवाल, डाॅ. सुरेश धाकड़ और डाॅ. देवेंद्र के खिलाफ नामजद आरोप लगाए हैं। आरोप है कि उनकी नवजात बेटी को राहत हॉस्पिटल में गलत इंजेक्शन लगाकर पैर पूरी तरह खराब कर दिया। दो हजार रुपए प्रतिदिन लेने की बात बोलकर 29 नवंबर को कल्पना नर्सिंग होम से उनकी बेटी को राहत के लिए रैफर किया गया। लेकिन यहां रोज तीन हजार वेंटिलेशन चार्ज, दो हजार रूम चार्ज और दो-तीन हजार रुपए दवाओं के नाम पर वसूले गए। इस दौरान डॉक्टर बच्ची का सिर्फ चेहरा दिखाते थे, पैर नहीं। गुरुवार को जब डॉ. लाखन पोसवाल ने बोला कि आपकी बेटी को फायदा है, जिसे एमबी के बाल चिकित्सालय में भर्ती करा दो। वहां ले गए तो डॉक्टर ने पैर से पट्टी हटाते ही कहा कि पैर घुटने तक खराब कर अब यहां क्यों लाए हो। कहीं इलाज नहीं करायाω फिर राहत हॉस्पिटल जाकर बात की तो डॉक्टर अभद्र व्यवहार करने लगे। इसके बाद हाथापाई और तोड़फोड़ हो गई। निर्भय सिंह देवड़ा और छात्र नेता मयूरध्वज सिंह ने कहा कि नवजात का इलाज सरासर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो।

    एमबी के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल बोले-राहत अस्पताल मेरा नहीं है, इलाज भी मैं नहीं कर रहा था

    Q. आप खुद एमबी हॉस्पिटल के कार्यवाहक अधीक्षक हैं फिर किस नियम के तहत अस्पताल चला रहे हैं, आज आक्रोशित में तोड़फोड़ भी की है?
    राहत हॉस्पिटल से मेरा कोई संबंध नहीं है। इसके मालिक डॉ. अरविंदर सिंह हैं जो 2011 से इस हॉस्पिटल को अर्थ संस्था के तहत राहत मेडी केयर एंड हॉस्पिटल के नाम से चलाते आ रहे हैं। यह बिल्डिंग मेरी है, जिसके दूसरी मंजिल पर मैं रहता हूं। मेरा चैंबर भी यहां हॉस्पिटल से अलग है।

    Q. नवजात के परिजन बोल रहे हैं कि इलाज आपकी ही देखरेख में चल रहा था ?
    नहीं, हॉस्पिटल के तीन अपने डॉक्टर हैं वे ही देख रहे होंगे। लोग मेरा नाम बीच में घसीटकर दबाव बनाना चाहते हैं।

    सीसीटीवी में सरकारी डॉक्टर निजी में इलाज करते मिला तो कार्रवाई : मंत्री
    निजी हॉस्पिटल में अगर डॉ. लाखन पोसवाल सीसीटीवी में इलाज करते नजर आए तो कार्रवाई करेंगे। सीएमएचओ और ज्वाइंट डायरेक्टर से जांच कराउंगा।
    -बंशीधर बाजिया, चिकित्सा राज्यमंत्री

    आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीपी सिंह : कोई शिकायत देगा तो जांच करेंगे

    Q. डॉ. लाखन पोसवाल एमबी के कार्यवाहक अधीक्षक हैं, आरोप है कि वे निजी हॉस्पिटल चला रहे हैं।ω शिशु के परिजनों ने रिपोर्ट में नामजद रिपोर्ट भी लिखाई है ?
    -ऐसे ही किसी मामले की पहले भी जांच हुई थी, जिसमें पाया गया था कि राहत हॉस्पिटल लाखन पोसवाल का नहीं है, न ही वे उसमें सेवाएं देते हैं। अगर, कोई लिखित में शिकायत करेगा तो मामला दिखवाएंगे।

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