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डॉक्टर हड़ताल: अब मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज, छह दिन में 32 मरे

सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी स्ट्रेचर पर, आईसीयू के साथ वार्ड भी पड़ें हैं सूने

अमित राव | Last Modified - Dec 27, 2017, 04:01 AM IST

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    एमबी में इलाज के अभाव में अपने पिता को खोने के बाद यूं झलका एक बेबस बेटी का दर्द।

    उदयपुर. सेवारत अौर रेजीडेंट्स डॉक्टरों की लगातार चल रही हड़ताल एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी को ही स्ट्रेचर पर ले आई है। इमरजेंसी आईसीयू में मरीज दर्द से कराहते बिना इलाज के दम तोड़ रहे हैं। संभाग सहित मध्यप्रदेश के कई इलाकों से यहां इलाज कराकर जिंदगी पाने की आस लेकर आ रहे मरीजों को मौत मिल रही है। पिछले 6 दिनों में अब तक 32 जिंदगियां हड़ताल की भेंट चढ़ चुकी हैं।

    - मंगलवार को भी इमरजेंसी आईसीयू के करीब से जो गुजरा, उसे दर्द से कराहट, चीख-पुकार सुनाई देती रहीं लेकिन मरहम लगाने वाले डॉक्टरों का दूर तक पता नहीं था।

    - आईसीयू में एक और जिंदगी ने बैड पर इलाज का इंतजार करते करते दम तोड़ दिया। सुबह 11 बजे नावघाट निवासी सेवानिवृत्त हैड कांस्टेबल मोहनलाल की इलाज के इंतजार में ही मृत्यु हो गई।

    - पिता के चले जाने का गम उनकी बेटियों के आंसुओं में साफ दिख रहा था।

    - मोहनलाल के दामाद हरीश ने बताया कि उनके ससुर को सांस लेेने में तकलीफ हुई थी तो रविवार रात दो बजे एमबी में भर्ती कराया था, लेकिन अस्पताल में हालत और बिगड़ती गई। डॉक्टरों के अभाव में मरीज का ठीक से इलाज भी शुरू नहीं हो सका।


    21 से चल रहा मौतों का सिलसिला
    - बीते 6 दिन में 32 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सरकार और डॉक्टर्स के बीच बात नहीं बन पा रही है।

    - हॉस्पिटल के आंकड़ों के अनुसार 21 दिसम्बर को 8, 22 दिसम्बर को 9, 23 काे 3, 24 को 4, 25 को 6 और 26 दिसम्बर को दोपहर तक 2 मौतें हुईं।

    - आरएनटी मेडिकल के एमबी, जनाना और बाल चिकित्सालय में करीब 500 से ज्यादा भर्ती गंभीर मरीजों की सांसें नर्सिंग स्टाफ के भराेसे चल रही हैं।

    आफत...ओपीडी में तीन घंटे तक इंतजार करते रहे मरीज

    - विशेषज्ञ टीचर्स ने मंगलवार सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार किया। इससे ओपीडी में लोग डॉक्टर को दिखाने के इंतजार में तीन घंटे तक बैठे रहे। कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर 11 बजे बाद ओपीडी में पहुंचे।

    - डॉक्टर राहुल जैन ने बताया कि बैठक में सेवारत-रेजीडेंट डॉक्टरों के आंदोलन को गति देने पर चर्चा हुई। तय हुआ कि बुधवार सुबह 9 से 10 बजे तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

    - 09 सौ डॉक्टर हड़ताल पर (सेवारत) संभागभर में।
    - 03 सौ 70 डॉक्टर हड़ताल पर (रेजीडेंट-एमबी अस्पताल)
    - 05 सौ से ज्यादा गंभीर मरीज नर्सिंग कर्मियों के भरोसे

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    झुलसे बच्चे को बर्न वार्ड में भर्ती करने से मना कर दिया

    - फलासिया के माेतीलाल करंट से झुलसी अपनी 5 साल के बच्चे को इलाज के लिए हॉस्पिटल लाए। इमरजेंसी में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। फिर बच्चे की नाजुक हालत देख उसे बर्न वार्ड में भर्ती कराने के लिए भेज दिया। जब मोतीलाल बर्न वार्ड पहुंचा तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसे बोल दिया कि यहां के सभी डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इलाज नहीं हो पाएगा, आप किसी और हॉस्पिटल में ले जाओ।

    - इसके बाद मोतीलाल आधे घंटे तक वार्ड में बच्चे को स्ट्रेचर पर ही लेकर बैठा रहा। जब कोई डॉक्टर नहीं आया तो वह अपने बच्चे को लेकर वापस इमरजेंसी पहुंचा और वहां रोने लगा।

    - उसने भास्कर को बताया कि वह बहुत गरीब है। अपने बच्चे का इलाज किसी निजी हॉस्पिटल में कराने में सक्षम नहीं है। भास्कर ने जब हॉस्पिटल प्रशासन को इस बारे में सूचना दी तब जाकर मोतीलाल के बच्चे को भर्ती किया गया।

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Web Title: Patients Can Not Get Treatment Due To Doctors Strike
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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