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स्ट्रेचर पर था ऑक्सीजन सिलेंडर लगा दुधमुंहा, भटकते परिजनों की आंखों में थे आंसू

बच्चे की सांसें थमने के डर से फैमिली की आंखों से आंसू टपक रहे थे।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 13, 2018, 07:33 AM IST

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    मां बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर घूमती हुई।

    उदयपुर.संभाग के सबसे बड़े एमबी हॉस्पिटल के बाल चिकित्सालय में सोमवार को 1 माह के भर्ती शिशु के इलाज में लापरवाही का रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। ऑक्सीजन पर बाल चिकित्सालय में भर्ती नवजात को उसके पिता मनोहर, मां और 65 वर्षीय नानी कमला बाई ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्ट्रेचर पर रखकर उसे कार्डियोलॉजी में डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने ले गए। बच्चे की सांसें थमने के डर से तीनों की आंखों से आंसू टपक रहे थे, क्योंकि परिसर की सड़क पर वाहन सरपट दौड़ रहे थे। ये था मामला...

    गड्ढों में फंस जाने पर ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने का खतरा भी कदम-कदम पर सता रहा था। हैरानी की बात यह है कि यह घटनाक्रम करीब एक घंटे तक अस्पताल परिसर में चला फिर भी किसी डॉक्टर की नजर तक नहीं पड़ी। जबकि आईसीयू में भर्ती गंभीर बीमार को स्ट्रेचर पर लाने-ले जाने की जवाबदारी अटेंडर, वार्ड ब्वॉय, रेजीडेंट डॉक्टर आदि की रहती है। मनोहर ने बताया कि बच्चा 7 दिनों से एनआईसीयू में भर्ती है, जिसका इलाज चल रहा है। जांच में पता चला है कि बच्चे के दिल में छेद है, जिसका ऑपरेशन एमबी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने करने से मना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वे गरीब हैं। ऑटो चलाकर घर की गाड़ी जैसे-तैसे चला रहे हैं। ऐसे में बाहर ऑपरेशन कराने उनके पास पैसे नहीं हैं।

    बार-बार बोलने पर भी कोई तैयार नहीं हुआ तो खुद ही ले जाना पड़ा

    घाटोल, बांसवाड़ा निवासी मनोहर और उदयपुर निवासी नानी कमला बाई ने बताया कि बाल चिकित्सालय के डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती उनके बच्चे को कार्डियोलॉजी में हृरदय रोग विशेषज्ञ को दिखाने और जांच कराने के लिए बोल दिया। उन्होंने बच्चे को बाल चिकित्सालय से कार्डियोलॉजी में ले-जाने के लिए नर्सिंग स्टाफ और वार्ड ब्वॉय से कई बार बोला, लेकिन उसे कोई भी ले जाने को तैयार ही नहीं हुआ। ऐसे में आईसीयू में भर्ती मासूम बच्चे को ऑक्सीजन सिलेंडर सहित स्ट्रेचर पर रखकर उसके पिता मनोहर, नानी कमला बाई खुद ही पूछते-पूछते कार्डियोलॉजी ले गए। उन्होंने कहा कि बच्चे के आक्सीजन सिलेंडर लगा होने के कारण उन्हें डर लग रहा था कि कहीं पाइप नहीं निकल जाए।

    आईसीयू में भर्ती बच्चे को स्ट्रेचर पर लाने-ले जाने की जवाबदारी अटेंडर व वार्ड ब्वॉय की है। सीरियस रोगी के साथ डॉक्टर का रहना भी जरूरी है। मामले की पूरी रिपोर्ट बाल चिकित्सालय के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश गोयल से ली जाएगी। -डॉ. विनय जोशी, अधीक्षक एमबी हॉस्पिटल

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    स्ट्रेचर पर एक महीने का मासूम।
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Web Title: People Life In Danger Due To Hospital Negligence
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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