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राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं तो बीजेपी को वोट भी नहीं

अब अजमेर और मांडलगढ़ में होने वाले उप चुनाव में राजस्थानी भाषा के लिए डेरा डालेंगे।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 04:49 AM IST
Rajasthani Language Recognition Committee

उदयपुर. राजस्थानी भाषा मान्यता समिति ने कहा है, भाजपा ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा पत्र में राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के जो वादे किए, वह याद दिलाने के बावजूद भुला दिए गए हैं। अगर भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार को राजस्थानी को मान्यता दिलाने की परवाह नहीं तो राजस्थानी भाषा और साहित्य से जुड़े लोगों को भी भाजपा की परवाह नहीं।


- उदयपुर आए समिति के प्रदेश सलाहकार देवकिशन राजपुरोहित ने बताया कि वे राजभाषा प्रेमियों, साहित्यकारों, पाठकों और राजस्थानियों के बीच जाकर अब राजस्थानी के लिए अलख जगाएंगे। पहले भाषा और फिर वोट की बात होगी। राजपुरोहित उदयपुर में आगे की रणनीति को लेकर वातावरण तैयार करने आए हुए हैं।

- उन्होंने बताया, राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की सरकार की मानसिकता ही नहीं थी। इस कारण जयपुर से लेकर दिल्ली तक हजारों लोगों ने धरना दिया। मान्यता नहीं मिलने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

- उन्होंने कहा, मेवाड़ से डॉ. देव कोठारी, शिवदानसिंह जोलावास, डॉ. राजेन्द्र बारहठ, रामदयाल मेहरा सहित कई लोगों का योगदान रहा है, लेकिन भाषा को मान्यता नहीं मिलने से ये सब भी निराश हैं।

नेपाल में मान्यता और राजस्थान में नहीं
- देवकिशन राजपुरोहित ने बताया, देश-दुनिया में राजस्थानी भाषा बोलने वाले करीब 10 करोड़ और राजस्थान में पांच करोड़ लोग हैं। करीब 1500 साल पुरानी राजस्थानी भाषा को नेपाल में मान्यता दी गई है लेकिन हमारे यहां नहीं।

- यह भाषा मीरा की, महाराणा की, पृथ्वीराज चौहान, वीर तेजाजी, देवनारायण, बांकीदास, कृपाराम बारहठ की भाषा है।

- रवीन्द्रनाथ ने कहा था कि राजस्थानी वह भाषा है, जिसकी कविताओं को पढ़कर पूरे राष्ट्र को गर्व होता है। राजपुरोहित ने बताया कि वे अब अजमेर और मांडलगढ़ में होने वाले उप चुनाव में राजस्थानी भाषा के लिए डेरा डालेंगे।

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Rajasthani Language Recognition Committee
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