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सदन की रिपोर्ट रद्दी में बेचने की जगह छात्रों को दें, कार्यवाही 11 के बजाय 10 बजे शुरू हो

अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन का हुआ समापन, 21 राज्यों के 87 प्रतिनिधियों ने दिए कई अहम सुझाव

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2018, 04:03 AM IST
Several imp suggestions given by delegates in whip Conference

उदयपुर. अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन के आखिरी दिन मंगलवार को कई अहम सुझाव आए। इसमें महत्वपूर्ण यह रहा कि सभी राजनीतिक पार्टियां मिलकर आचार संहिता बनाए कि कोई भी सदस्य सदन में विरोध के नाम पर वेल में नहीं आएगा। वेल में हंगामा करने वाले को एक दिन के लिए सदन से सस्पेंड कर दिया जाए। वहीं सदन की विभिन्न समितियों की रिपोर्ट रद्दी में बेचने के बजाय कॉलेजों को भेज दी जाए, जिससे वे उनसे नॉलेज ले सकें। सदन सुबह 11 बजे की बजाय दस बजे से चले। होटल रेडिसन ब्लू में हुए सम्मेलन में 21 राज्यों के 87 प्रतिनिधि शामिल हुए।

कम से कम 1 दिन और अधिकतम 1 सत्र के लिए हो निलंबन

समापन सत्र के दौरान कई सचेतकों ने सुझाव दिया कि काेई सदस्य वेल में आकर हंगामा करता है तो एक बार वेल में आने पर एक घंटे के लिए सदन से निलंबित किया जाए। दो बार अाए तो दो घंटा,तीन बार आए तो एक सप्ताह और चार बार वेल में आने पर एक सत्र के लिए निलंबित किया जाना चाहिए। सचेतकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि छाेटी विधानसभा कम से कम 50 दिन और बड़ी विधानसभा कम से कम 60 दिन चले। विधानसभा में जो भी रिपोर्ट आती है उस पर कम से कम एक सप्ताह बहस हो। सचेतकों ने यह भी कहा कि एक ऐसा संस्थान बनना चाहिए जहां सांसदों और विधायकों को प्रशिक्षण दिया जाए।

हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और
कर्नाटक से आए सेचतक ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल से कहा कि हाथी के दांत खाने के और होते हैं, और दिखाने के और। सचेतक ने कहा कि आप जब विपक्ष में होते हो तो वेल में आकर हंगामा करते हो और सत्ता में आते हो तो वेल में नहीं आने की बात करते हो। दूसरी तरफ विजय गोयल ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि वे एक बार मॉक पार्लियामेंट में गए तो वहां उसमें दिखाया गया कि प्रतिपक्ष के सदस्य वेल में आकर जोरदार हंगामा कर रहे हैं, आपस में झगड़ रहे हैं। इस पर गोयल ने तर्क दिया कि सदन में ऐसा नहीं होता है। इस पर माॅक पार्लियामेंट करने वालों ने कहा कि यही असली चेहरा है जो देश देखता है।

राजस्थान में विधानपरिषद के प्रस्ताव पर चल रही बात
राजस्थान में भी विधानपरिषद के गठन की मांग से जुड़े सवाल पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि इसके लिए कमेटी बनी हुई है। बीच-बीच में यह विषय भी आता है कि क्या विधानपरिषद की जरूरत हैω यह विषय कमेटी के पास गया हुआ है कि किन-किन राज्यों में विधानपरिषद बननी चाहिए या नहीं।

सदन में बहस का स्तर गिरा, छपास के रोगियों को दिखाना बंद कर दें, हंगामा कम हो जाएगा : मेघवाल
- राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा है कि लोकसभा और विधानसभा में बहस, भाषा और वैचारिक स्तर लगातार गिरता जा रहा है। शून्यकाल के दौरान हंगामा करने वालों की खबरें छपने पर प्रतिबंध लग जाए तो छपास के रोगी हंगामा करना ही बंद कर देंगे। हंगामा और टोका-टोकी ही सुर्खियां बन जाती हैं। इससे अच्छे वैचारिक भाषण भी लोगों तक नहीं पहुंच पाते हैं।

- मेघवाल ने कहा कि मुख्य सचेतक, सचेतक और लीडर के बीच समन्वय अच्छा हो तो फ्लोर मैनेजमेंट बहुत अच्छा हो सकता है। उन्होंने पन्नाधाय के बलिदान, पद्मिनी के जौहर, मीरा की भक्ति और महाराणा प्रताप की वीरता का गुणगान भी किया।

- राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सम्मेलन देश की संसदीय कार्य प्रणाली को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।

- समापन सत्र में संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल, अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव राजीव यादव और उदयपुर सांसद अर्जुन लाल मीणा भी मौजूद थे।

कालूलाल को मिला मंच, कहा-हम तो कठपुतली हैं, इसलिए कठपुतली गिफ्ट की है

- राजस्थान विधानसभा के सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर को अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन के दूसरे दिन मंच पर जगह दी गई। पहले दिन मंच पर नहीं बैठाने को लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए शिकायत की थी कि यह मंत्रियों का नहीं बल्कि सचेतकों का सम्मेलन है और मैं राजस्थान विधानसभा का मुख्य सचेतक हूं। मेजबान होने के नाते मुझे मंच पर सम्मान तो मिलना ही चाहिए था।

-सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को सीएम वसुंधरा राजे के कहने पर दी गई कठपुतलियों को लेकर गुर्जर ने कहा कि हमारा जीवन भी कठपुतली की तरह है। समर्थक, पार्टी के कार्यकर्ता और जनता कठपुतली की तरह हमसे काम लेती है। हम भी कठपुतली की तरह वहां नाचते हैं, इसलिए हम सभी को कठपुतली गिफ्ट दे रहे हैं। इसके बाद मंगलवार को समापन सत्र का आभार भी उन्होंने ही व्यक्त किया।

- उन्होंने सोमवार शाम को हुई अव्यवस्था को लेकर सचेतकों से क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि व्यवस्था करने का प्रयास किया, लेकिन हम मानते हैं कि हमारी मेहमान नवाजी में निश्चित तौर पर कहीं न कहीं कमी रही होगी। सोमवार शाम जगमंदिर में हुए सत्र और सांस्कृतिक संध्या के बाद वापस होटल पहुंचे कुछ सचेतकों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा था।

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