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इस तस्वीर की तरह है ये बजट: मिठाई देख कर आप खुश हो सकते हैं, लेकिन खा नहीं सकते क्योंकि...

अभी ये योजना है...माही से भरेंगे जयसमंद को, जाखम और देवास 3-4 से बुझेगी उदयपुर-राजसमंद की प्यास

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 07:41 AM IST

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    उदयपुर. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने मौजूदा कार्यकाल का आखिर बजट सोमवार को पेश किया। मेवाड़ की सिंचाई और बड़ी पेयजल परियोजनाओं को महत्व देते हुए इस बार के बजट में इसके लिए 9015 करोड़ का प्रावधान किया गया है। बांसवाड़ा के माही बांध से उदयपुर जिले की जयसमंद झील को भरने के लिए 450 करोड़ की योजना की घोषणा हुई, वहीं प्रतापगढ़ जिले में स्थित जाखम और उदयपुर के गोगुंदा क्षेत्र में प्रस्तावित देवास प्रोजेक्ट 3-4 से पानी लाकर उदयपुर और राजसमंद की प्यास बुझाने के लिए भी 3000 करोड़ की परियोजना की घोषणा की गई है। माही बांध से नागलिया पिकअप वियर को भरने का बड़ा काम भी इस बजट में शामिल है। बजट में कई विधायकों की उम्मीदें पूरी हुईं तो कई को उम्मीद के अनुसार घोषणा नहीं होने से निराशा भी हुई है।

    इन घोषणाओं के जमीन पर आने में कम से कम 5 से 15 साल तक लगेंगे

    माही बांध से जयसमंद को भरने 450 करोड़ की घोषणा की है। जाखम बांध और प्रस्तावित देवास प्रोजेक्ट 3-4 से पानी लाकर उदयपुर और राजसमंद की प्यास बुझाने 3000 करोड़ की घोषणा और माही बांध से नागलिया पिकअप वियर को भरने की बड़ी घोषणा हुई है। मगर इन बड़ी घोषणाओं पर विशेषज्ञों का कहना है कि इनको जमीन पर आने में कम से कम 5 से 15 साल लग सकते हैं। सिंचाई विभाग के रिटायर्ड एसई जीपी सोनी ने बताया कि कम से कम दो साल तो कागजी प्रक्रिया पूरी करने और फॉरेस्ट क्लियरेंस लेने में ही लग सकते हैं। जलसंसाधन विभाग के सेवानिवृत सहायक अभियंता नरेंद्र पंचौली ने बताया कि तीनों ही योजना वन क्षेत्र से प्रभावित है और शिलान्यास से पहले फॉरेस्ट क्लियरेंस लेने का काम सबसे पहले करने की जरूरत होगी। समय पर पर्याप्त बजट नहीं मिला तो योजना पूरी होने में 10 साल भी लग सकते हैं।

    देवास प्रोजेक्ट 3-4 ने फिर खाए हिचकोले

    इस बजट घोषणा में शामिल देवास प्रोजेक्ट 3-4 में उलझन है कि पानी उदयपुर आएगा या राजसमंद। यह योजना हिचकोले ले रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत गोगुंदा क्षेत्र के नाथियाथल (देवास-3) में 703 एमसीएफटी और अंबावा में 390 (देवास-4) एमसीएफटी भराव क्षमता के दो बांध बनने हैं। दोनों का पानी 11.05 किमी सुरंग बनाकर देवास-2 के तहत बने आकोदड़ा बांध में लाना प्रस्तावित किया गया। आकोदड़ा से यहीं पानी देवास-2 की 11 किमी लंबी सुरंग से होता हुआ उदयपुर की झीलों में लाना तय किया गया। इसके लिए वर्ष 2015 में 1187 कराेड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई।

    ड्रीम प्रोजेक्ट ड्रीम ही रह गया
    प्रोजेक्ट की डीपीआर के बाद मंत्रीमंडल फेरबदल में जलदाय मंत्री बनी किरण माहेश्वरी ने गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के ड्रीम प्रोजेक्ट में सेंध मारते हुए योजना में ही बदलाव करवा दिया और देवास 3-4 का पानी राजसमंद ले जाने के लिए वर्ष 2015 के राज्य बजट में डीपीआर बनाने घोषणा भी करवा दी। इसके बाद 2016 के बजट में देवास-3,4 का पानी राजसमंद ले जाने के लिए मुख्यमंत्री राजे ने 1064 करोड़ की घोषणा भी कर दी। हालांकि इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

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