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4 साल में हमारे 8 विधायकों को मिले 64 करोड़, 16 करोड़ के काम ही पूरे करा पाए

गृहमंत्री कटारिया ने काम कराने के सबसे कम 86 प्रस्ताव भेजे, एकमात्र कांग्रेस विधायक हीरालाल दरांगी सब पर भारी

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 07:37 AM IST
वर्किंग एजेंसी का इंट्रेस्ट छोटे-मोटे कामों में नहीं होता : कटारिया वर्किंग एजेंसी का इंट्रेस्ट छोटे-मोटे कामों में नहीं होता : कटारिया

उदयपुर. उदयपुर जिले के आठ विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में (एमएलए फंड के तहत) काम कराने के लिए सरकार से चार साल में 64 करोड़ मिले, लेकिन ये विधायक 16.43 करोड़ के काम ही पूरे करा पाए हैं। 9 करोड़ 87 लाख के 231 काम अभी तक शुरू भी नहीं हो पाए हैं। वहीं 35.11 करोड़ के काम चल ही रहे हैं। आठों विधायकों ने 1596 कामों के प्रस्ताव बनाकर भेजे जिनमें से 70 फीसदी शुरू भी नहीं हो पाए हैं या फिर उनकी स्वीकृति ही जारी नहीं हो पाई है। बता दें कि हर विधायक को अपने विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के लिए प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपए मिलते हैं।

- आंकड़ों के अनुसार आठों विधायकों में राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपने क्षेत्र शहरी विधानसभा में सबसे कम 86 कामों के प्रस्ताव बनाकर भेजे। जबकि सबसे अधिक 316 कामों के प्रस्ताव भींडर विधायक रणधीर सिंह ने दिए। वहीं सबसे अधिक 109 काम जिले के एकमात्र कांग्रेस विधायक हीरालाल दरांगी ने पूरे कराए।

नवंबर-दिसंबर में हो सकते हैं चुनाव, 6 माह पहले आचार संहिता लगेगी, अटके काम अटके ही रह जाएंगे

बता दें कि विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में होने हैं और चुनाव से 6 माह पहले प्रदेश में आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में 231 से अधिक मूलभूत सुविधाओं से जुड़े काम हो अब हो पाएंगे, इस पर संदेह है।

ये एक बड़ा कारण, इसलिए अटक जाते हैं काम

काम पूरे नहीं होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि विधायक अपने क्षेत्र में सही से फील्ड सर्वे कराए बिना प्रस्ताव बनाकर भेज देते हैं। विधायक सबसे पहले अपने विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न कामों के प्रस्ताव की प्रशासनिक स्वीकृति देते हैं। फिर जब तकनीकी स्वीकृति को फाइल संबंधित विभाग काे जाती है, तब पता चलता है कि जिस जमीन पर भवन बनना प्रस्तावित है, उसका पट्टा ही नहीं है या फिर जमीन चारागाह है। कहीं वन विभाग के नियम आड़े आ जाते हैं। ऐसे में कन्वर्जन में बहुत समय लगता है और फाइलों में ही लम्बे समय से काम अटके रहते हैं।

वर्किंग एजेंसी का इंट्रेस्ट छोटे-मोटे कामों में नहीं होता : कटारिया

अब तक मुझे 8 करोड़ रुपए मिले। जिसमें से करीब 5.50 करोड़ रुपए दे चुका हूं। इसमें 3.50 करोड़ रुपए के काम हो चुके हैं। अब तो छोटे-छोटे काम बचे हैं जो जल्द पूरे हो जाएंगे, क्योंकि इसमें किसी का इंट्रेस्ट नहीं रहता। जो भी वर्किंग एजेंसी हैं उसको लमसम बड़ा काम मिले तो उसकी निगाह उस पर रहती है। छोटे-मोटे काम में उनकी ज्यादा रुचि नहीं रहती।

तकनीकी मंजूरी में समय लगता है : भींडर तकनीकी मंजूरी में समय लगता है : भींडर

 प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाती है लेकिन तकनीकी मंजूरी में समय लग जाता है। जमीन का पट्टा नहीं मिल पाता तो कहीं सरकार जमीन नहीं मिलती। 23 जनवरी को नगर पालिका की बैठक में इस समस्या का समाधान करूंगा। जो काम नहीं हो सकते, उनकी जगह दूसरे काम कराए जाएंगे।

 

विभागीय स्तर पर लंबित हैं काम : दलीचंद विभागीय स्तर पर लंबित हैं काम : दलीचंद

मैंने मेरे विधायक मद से चार साल का फंड विभिन्न कामों के लिए विभाग को दे दिया है। विभागीय स्तर पर काम लंबित हो सकते हैं। कुछ कामों की स्वीकृतियां पट्टा नहीं बनने या अन्य कारण से अटकी हैं। अगर बेवजह काम में देरी हो रही है तो मैं इसकी मॉनिटरिंग करूंगा। 

आचार संहिता लगने से पहले तक पूरे हो जाएंगे सभी काम: दरांगी आचार संहिता लगने से पहले तक पूरे हो जाएंगे सभी काम: दरांगी

 बड़े काम ज्यादा नहीं बचे हैं। सारे पूरे हो चुके हैं। सीसी रोड, सामुदायिक भवन, हैंडपंप जैसे छोटे काम चल रहे हैं जो संभवत आगामी चुनाव में आचार संहिता लगने से पहले तक पूरे हो जाएंगे।

ज्यादातर कामों में पट्टे की समस्या: अमृतलाल मीणा ज्यादातर कामों में पट्टे की समस्या: अमृतलाल मीणा

ज्यादातर कामों में पट्टे की समस्या है। पंचायतों का स्वार्थ सिद्ध नहीं हाेता तो वे पट्टे जारी नहीं करते। मैंने तो विधायक फंड से चार साल के पूरे बजट के प्रस्ताव दे दिए। 14.72 लाख के काम के प्रस्ताव भी दिए हैं। माही-जाखम का पानी जयसमंद में पहुंचाना प्राथमिकता है जिसकी डीपीआर बन चुकी है। 

देरी वाले कामों की सूचना कलेक्टर-सीईओ को दे दी : नानालाल देरी वाले कामों की सूचना कलेक्टर-सीईओ को दे दी : नानालाल

सामुदायिक भवन, सड़क और पुलिया जैसे कुछ काम हैं जिनमें  किसी कारण देरी हो रही है। ऐसे कामों के बारे में कलेक्टर और जिला परिषद सीईओ को सूचना दी है। काम जल्द कराने काे कहा है। अंतिम साल में कोशिश है कि कोई काम बाकी नहीं है। विधायक फंड का जनता के लिए सही उपयोग हो। 

कई कामों के टेंडर हो चुके, लेकिन छोटी अड़चने हैं : प्रतापलाल कई कामों के टेंडर हो चुके, लेकिन छोटी अड़चने हैं : प्रतापलाल

सायरा पंचायत समिति भवन, पदराड़ा पेयजल स्कीम, गुमान गांव पुलिया जैसे बड़े कामों के टेंडर हो चुके, लेकिन छोटी-मोटी अड़चन आ रही है जिसे दूर करके जल्द काम शुरू कराया जाएगा। आने वाले 6 माह सभी काम पूरा कराना लक्ष्य है।

रेती नहीं मिलने से परेशानी: फूलसिंह रेती नहीं मिलने से परेशानी: फूलसिंह

मेरी कोशिश है कि सभी विकास के काम तय समय में पूरे हों। फिर भी काेई काम समय पर नहीं हुआ तो ठेकेदार पर पेनल्टी लगेगी। काम नहीं किया तो कम्पनी को ब्लैक लिस्टेड करेंगे। रेती नहीं मिलने से भी काम पूरे कराने में दिक्कत हो रही है।