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20 साल पहले हुए थे रिटायर, 87 की उम्र में हर रोज करते हैं 10 से 12 आॅर्थो सर्जरी

डॉ. ए.एस. चूंडावत कर चुके 90 हजार ऑपरेशन, नारायण सेवा संस्थान में दिव्यांगों की कर रहे हैं सेवा

Danik Bhaskar | Dec 18, 2017, 04:47 AM IST

उदयपुर. ये हैं 87 साल के डॉक्टर एएस चूंडावत। रिटायर्ड होने के बाद भी इस उम्र में रोज 10 से 12 दिव्यांगों के ऑपरेशन करते हैं। इन्होंने देश-दुनिया के हजारों ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को मुस्कान दी है जो विकलांगता और लकवा जैसी गंभीर बीमारी से कभी अपने पैरों पर खड़े भी नहीं हो सकते थे लेकिन आज दौड़ते-भागते हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे बच्चे थे, जिनके हाथ और पैरों की हड्डियां 50 फीसदी से ज्यादा मुड़ी हुई थीं। इलाज के बाद आज ऐसे कई बच्चों ने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है और कई लोग आद जगह-जगह नौकरी भी कर रहे हैं। डॉ. चूंडावत निजी संस्था नारायण सेवा संस्थान में बीते 20 साल में लगभग 90 हजार दिव्यांगों के ऑपरेशन कर चुके हैं। ये ऑपरेशन उन्होंने आरएनटी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद से रिटायर होने के बाद किए हैं।

भेदभाव मिटे, कलेक्टर ने विकलांग बेटी को बनाया बहू, इलाज के बाद अब चल फिर सकती है वो

- डॉ. चूंडावत बताते हैं कि करीब पांच साल पहले गुजरात के एक कलेक्टर अपनी विकलांग बहू का इलाज कराने यहां लाए थे। कलेक्टर ने मुझे बताया कि उनका बेटा विकलांग नहीं है लेकिन उन्होंने अपने बेटे की शादी विकलांग बेटी से कराई है, ताकि समाज में विकलांगता के प्रति भेदभाव मिट सके।

- डॉक्टर ने बताया कि इलाज के बाद उनकी बहू आज दोनों पैरों पर आज खड़ी हो सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि विदेशों से भी कई ऐसे केस मेरे पास आए, जिनके माता-पिता ने अपने बच्चे को पैरों पर खड़ा देखने के लिए जगह-जगह इलाज में लाखों रुपए खर्च कर डाले, लेकिन वे यहां से खुश होकर लौटे।

हम पर बड़ी जिम्मेदारी

डॉ. चूंडावत बताते हैं कि देश में 70 लाख और राजस्थान में 7 लाख बच्चे पोलियाे से ग्रस्त हैं जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं। अगर इन बच्चों को इलाज देकर काबिल बनाया जाए तो देश के लिए बड़ा कदम होगा।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नहीं होती री-कंस्ट्रक्टिव सर्जरी

डॉ. चूंडावत ने बताया कि किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में री-कंस्ट्रक्टिव सर्जरी नहीं होती। इनके ऑर्थोपेडिक विभागों में सिर्फ दुर्घटनाग्रस्त रोगियों का ही इलाज होता है। जबकि विकलांगता और दिमागी लकवा का भी इलाज होना चाहिए।