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ICU में 100 नवजात, 250 से अधिक मरीजों की अटकी हैं सांसें, तीसरे दिन भी डॉक्टर भूमिगत

डेढ़ सौ किमी दूर-दूर से आईं 100 से अधिक गर्भवती महिलाएं, नंबर आया तो जवाब मिला- डॉक्टर नहीं है 10 दिन बाद आइए

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 07:10 AM IST

उदयपुर. मरीजों के भगवान कहे जाने वाले आरएनटी के 407 रेजीडेंट्स और 303 सेवारत डॉक्टर लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी भूमिगत रहे। डॉक्टर कम होने के कारण एमबी में पिछले दो दिन में 70 से अधिक ऑपरेशन टाल दिए गए। सबसे ज्यादा परेशानी जनाना और बाल चिकित्सालय में भर्ती गर्भवती महिलाओं और नवजातों को हुई। सौ-डेढ़ सौ किलोमीटर दूर संभाग के कई हिस्सों से इलाज के लिए एमबी आईं 100 से अधिक गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की तारीख 20 से बढ़ाकर 29 दिसंबर कर दी गई। 10 ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू में 250 से अधिक गंभीर मरीज ऑक्सीजन पर हैं। वहीं बाल चिकित्सालय के आईसीयू में वेंटिलेटर पर 20 नवजात, 6 एनआईसीयू और पीआईसीयू में करीब 100 से अधिक भर्ती शिशु भर्ती हैं जिनकी सांसें जिंदगी-मौत के बीच चल रही हैं।


डॉक्टर बोले : सभी मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक हड़ताल
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. एसएल बामनिया और आरएनटी मेडिकल कॉलेज की रेजीडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि एक अधिकारी को पद से इधर-उधर करने मात्र से डॉक्टर फिर सरकार के बहकाने में आने वाले नहीं है। जब तक यह निम्न मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

हड़ताल में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर भी दे रहे हैं सेवाएं
सेवारत डॉक्टरों की हड़ताल में गीतांजलि मेडिकल कॉलेज, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज, अनंता अस्पताल, शर्मा अस्पताल राजसमंद आदि के डॉक्टर भी सेवाएं दे रहे हैं।

बाल चिकित्सालय में 1 से 30 दिन के नवजात नर्सिंग स्टाफ के भरोसे

बाल चिकित्सालय के एनआईसीयू में गंभीर भर्ती 1 से 30 दिन तक के कई नवजात नर्सिंग स्टाफ के भरोसे वेंटिलेटर पर जिंदगी-मौत के बीच जूझते रहे। नवजातों के परिजन डॉक्टर नहीं होने के कारण चिंतित दिखाई दिए। इधर आरएनटी के सभी ओपीडी में गंभीर बीमार 9-9 घंटे तक इलाज के इंतजार में कराहते रहे। हॉस्पिटल प्रशासन के मुताबिक कार्डियक आईसीयू, मेडिकल आईसीयू, सर्जिकल आईसीयू, न्यूरो सर्जरी आईसीयू, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी आईसीयू, बाल चिकित्सालय आईसीयू, बाल चिकित्सालय के ही एनआईसीयू और पीआईसीयू, ट्रोमा आईसीयू, न्यूरोलॉजी आईसीयू, जनाना आईसीयू, इमरजेंसी विंग, इमरजेंसी आईसीयू, सभी दस ऑपरेशन थियेटर में 250 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती हैं जिन्हें ऑन कॉल पर भी डॉक्टर देख रहे हैं।

ठंड में अस्थमा, सर्दी-खांसी के मरीज भी बढ़ रहे, इलाज के लिए घंटों इंतजार

इधर संभाग में मौसमी बीमारी के मरीज भी इलाज कराने के लिए एमबी में बढ़ रहे हैं। हड़ताल के कारण पहले से ही गंभीर मरीजों को मुश्किल से इलाज मिल पा रहा है ऐसे में मरीजों की काफी भीड़ लगी रही। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के लगभग 100 विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों की संख्या के आगे बहुत ही कम हैं। सिर्फ 90-100 विशेषज्ञ डॉक्टर ही संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल में हजारों मरीजों का इलाज करते रहे। इन डॉक्टरों ने दो व तीन-तीन शिफ्ट में 24 घंटे ड्यूटी दी। ऐसे में जनाना-एमबी-बाल चिकित्सालय में दूसरे दिन भी 36 इलेक्टिव व अन्य ऑपरेशन नहीं हो सके। मंगलवार को भी 34 ऑपरेशन टाल दिए गए थे।

परेशानी मरीजों की जुबानी 100 किमी से आकर लौटना पड़ा

साकरोदा निवासी 37 वर्षीय भग्गी बाई, सलूंबर निवासी 31 वर्षीय मनोरमा के साथ दर्जनों महिलाओं ने बताया कि उन्हें पहले 20 दिसंबर को सोनोग्राफी कराने की तारीख दी गई थी। काफी परेशान होकर सौ किलोमीटर से भी दूर की यात्रा कर सुबह 9 बजे एमबी हॉस्पिटल पहुंच गई थीं। लेकिन जब खिड़की पर 10.30 बजे नंबर आने लगा तो सभी से मैडम बोली : डॉक्टर साहब हड़ताल पर हैं अब 29 दिसंबर को आना। इसके बाद लौटना पड़ा।

तीसरा दिन : जिले के हॉस्पिटल के हालात

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